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चुनाव बाद बंगाल में बढ़ा खूनी संघर्ष, 6 लोगों की मौत से सुलगा सियासी माहौल; किस पार्टी को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान?

पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही। अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। भाजपा और टीएमसी दोनों ने एक-दूसरे पर राजनीतिक बदले की भावना से हमले कराने के आरोप लगाए हैं। कई जिलों में तनाव और पुलिस कार्रवाई जारी है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 07 May 2026 11:49:53

चुनाव बाद बंगाल में बढ़ा खूनी संघर्ष, 6 लोगों की मौत से सुलगा सियासी माहौल; किस पार्टी को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने के बाद राजनीतिक हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद शुरू हुआ टकराव अब खूनी संघर्ष का रूप ले चुका है। अलग-अलग जिलों से लगातार मारपीट, हमले और हत्या की घटनाएं सामने आ रही हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अब तक कम से कम 6 लोगों की जान जा चुकी है। इन घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चुनावी नतीजों के बाद कई जिलों में तनाव

4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ही पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में तनाव बना हुआ है। खासकर उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, बीरभूम, हावड़ा और कोलकाता के कुछ इलाकों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच झड़पों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के बाद दोनों प्रमुख दलों — भाजपा और तृणमूल कांग्रेस — के समर्थकों के बीच संघर्ष तेज हो गया है। कई जगह विजय जुलूसों और राजनीतिक रैलियों के दौरान हिंसा भड़कने की भी बात सामने आई है।

भाजपा से जुड़े 3 लोगों की गई जान

अब तक हुई हिंसा में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सबसे चर्चित मामला उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम का है, जहां भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बताया गया कि अज्ञात हमलावरों ने उनकी कार पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

दूसरी घटना हावड़ा जिले के उदयनारायणपुर इलाके से सामने आई। यहां भाजपा समर्थक यादव बोर पर कथित तौर पर उस समय हमला किया गया जब वह पार्टी की जीत का जश्न मनाकर घर लौट रहे थे। हमलावरों ने उन पर धारदार हथियारों से हमला किया, जिसमें उनकी जान चली गई।

वहीं तीसरी घटना न्यू टाउन इलाके की बताई जा रही है। यहां विजय जुलूस के दौरान भाजपा कार्यकर्ता मधु मंडल की कथित पिटाई की गई, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। भाजपा ने इन सभी मामलों के लिए सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया है।

तृणमूल कांग्रेस के भी 3 कार्यकर्ताओं की मौत

हिंसा की इस श्रृंखला में तृणमूल कांग्रेस को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। पार्टी के तीन सक्रिय कार्यकर्ताओं की हत्या की खबर सामने आई है।

बीरभूम जिले के नानूर क्षेत्र में हुई झड़प में टीएमसी कार्यकर्ता अबीर शेख की मौत हो गई। आरोप है कि उन पर धारदार हथियार से हमला किया गया। इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

कोलकाता के बेलघाटा इलाके में तृणमूल समर्थक बिस्वजीत पटनायक की हत्या भी राजनीतिक रंजिश से जोड़कर देखी जा रही है। वहीं दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग क्षेत्र से शेख मुजीबुर का शव बरामद होने के बाद हालात और संवेदनशील हो गए।

तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व का आरोप है कि चुनाव में भाजपा की जीत के बाद उनके कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक बदले की भावना से हिंसा को अंजाम दिया जा रहा है।

पुलिस ने शुरू की कार्रवाई, 45 संदिग्ध हिरासत में

राज्य पुलिस के मुताबिक, अब तक सामने आए सभी छह मामलों में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने जांच तेज करते हुए विभिन्न इलाकों से करीब 45 संदिग्धों को हिरासत में लिया है।

अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई है ताकि हालात को नियंत्रण में रखा जा सके। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और स्थानीय इनपुट के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी हुई है।

हिंसा के प्रमुख केंद्र बने कई जिले

चुनाव परिणामों के बाद सबसे ज्यादा तनाव उत्तर 24 परगना जिले में देखने को मिला है। अब तक सामने आई कई बड़ी घटनाएं इसी जिले से जुड़ी हुई हैं। राजनीतिक टकराव, फायरिंग और हमलों की वजह से यहां हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं।

वहीं बीरभूम जिला भी हिंसा का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। यह इलाका पहले से ही राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील माना जाता है और यहां भाजपा व तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के बीच लगातार संघर्ष की खबरें सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुई हैं, जिससे इलाके में तनाव का माहौल कायम है।

हावड़ा और दक्षिण 24 परगना के कैनिंग इलाके से भी हिंसा, आगजनी और देसी बम फेंके जाने जैसी घटनाओं की सूचनाएं मिली हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई जगहों पर रात के समय माहौल अधिक तनावपूर्ण हो जाता है, जिसके चलते पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है।

प्रशासन अलर्ट मोड पर, कई गिरफ्तारियां

बढ़ती हिंसा को देखते हुए राज्य प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। पुलिस ने अब तक अलग-अलग जिलों से लगभग 45 लोगों को गिरफ्तार किया है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और लगातार गश्त की जा रही है ताकि हालात को नियंत्रण में रखा जा सके।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने भी पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। आयोग ने स्पष्ट कहा है कि नई सरकार के शपथ ग्रहण और आदर्श आचार संहिता समाप्त होने तक राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासन की ही होगी। निर्वाचन आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।

भाजपा और टीएमसी के बीच आरोपों की जंग तेज


राजनीतिक स्तर पर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार बढ़ते जा रहे हैं। भाजपा का कहना है कि उनके कार्यकर्ता केवल चुनावी जीत का जश्न मना रहे थे, लेकिन हार से नाराज टीएमसी समर्थक हिंसा पर उतर आए हैं।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा समर्थक ‘विजिलेंटे जस्टिस’ के नाम पर उनके कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर निशाना बना रहे हैं। टीएमसी नेताओं का दावा है कि सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक बदले की भावना से घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है।

बंगाल में फिर दोहराया जा रहा पुराना पैटर्न

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा कोई नई बात नहीं मानी जाती। पिछले कई चुनावों के बाद भी राज्य में राजनीतिक संघर्ष और खून-खराबे की घटनाएं सामने आती रही हैं। हालांकि इस बार सत्ता परिवर्तन होने के कारण हालात और अधिक संवेदनशील बताए जा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता बदल गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच पुरानी दुश्मनी और टकराव अब भी बरकरार है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती हिंसा की इस श्रृंखला को रोकना और बदले की राजनीति पर लगाम लगाना है।

अगले 48 घंटे राज्य के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि कई जिलों में अभी भी विजय जुलूस और राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां किसी भी नई हिंसक घटना को रोकने के लिए लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।

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