पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक अहम घोषणा की है। राज्य की भाजपा सरकार ने आपातकाल यानी इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए आंदोलन करने और विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों को आर्थिक सम्मान देने का फैसला किया है। सरकार के इस निर्णय के तहत ऐसे 325 लोगों को हर महीने 10,000 रुपये की पेंशन दी जाएगी।
सरकार की ओर से यह आर्थिक सहायता ‘वेस्ट बंगाल लोकतंत्र सेनानी ऑनर’ योजना के तहत प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को नबान्न में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस फैसले की जानकारी दी। सरकार का कहना है कि इमरजेंसी के दौर में लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों के योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
इमरजेंसी के दौरान आंदोलन करने वालों को मिलेगा सम्मान
राज्य सरकार के फैसले के मुताबिक, आपातकाल के दौरान लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों को अब हर महीने पेंशन दी जाएगी। इसके लिए सरकार ने ऐसे लोगों की पहचान की प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिन्होंने इमरजेंसी के दौरान आंदोलन में हिस्सा लिया था और इस वजह से जेल भी गए थे।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए उस कठिन दौर में संघर्ष करने वाले लोगों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। सरकार का उद्देश्य ऐसे लोगों को सम्मान देना है, जिन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और अधिकारों के लिए अपनी स्वतंत्रता तक दांव पर लगाई।
सरकार की ओर से दी जाने वाली 10,000 रुपये की मासिक पेंशन को इसी सम्मान का हिस्सा माना जा रहा है। इसके जरिए उन लोगों को आर्थिक सहायता देने की कोशिश की जाएगी, जिन्होंने आपातकाल के दौरान विरोध के चलते जेल में समय बिताया था।
सरकार ने 325 लोगों की पहचान की
सामने आई जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ने अब तक 325 ऐसे लोगों की पहचान की है, जो इमरजेंसी के दौरान विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए थे और जेल गए थे। इन लोगों को ‘वेस्ट बंगाल लोकतंत्र सेनानी ऑनर’ योजना के दायरे में लाने का फैसला किया गया है।
इन सभी पात्र लोगों को हर महीने 10 हजार रुपये की पेंशन दिए जाने की व्यवस्था की जाएगी। सरकार के मुताबिक, यह सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष की सार्वजनिक मान्यता भी है।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा कि नई सरकार देश और समाज के लिए योगदान देने वाले लोगों के आदर्शों को ध्यान में रखते हुए काम करेगी। उनका कहना है कि लोकतंत्र और देश के लिए कठिन परिस्थितियों में संघर्ष करने वाले लोगों के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है।
बजट सत्र में भी दी गई थी योजना की जानकारी
पश्चिम बंगाल सरकार ने इस पेंशन योजना का जिक्र विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भी किया था। उस समय सरकार की ओर से पहली बार इस तरह की आर्थिक सहायता देने की योजना के बारे में जानकारी सामने आई थी।
अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से इसकी औपचारिक घोषणा किए जाने के बाद योजना को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो गई है। सरकार की ओर से पात्र लोगों की पहचान की जा चुकी है और उन्हें योजना के तहत मासिक पेंशन देने का फैसला किया गया है।
इस घोषणा के बाद इमरजेंसी के दौरान आंदोलन करने वाले लोगों के योगदान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है। सरकार इसे लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष का सम्मान बता रही है।
लोकतांत्रिक संघर्ष से जुड़े लोगों को सम्मान देने की पहल
सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को सम्मानित करना है, जिन्होंने देश में इमरजेंसी लागू रहने के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए आवाज उठाई थी। उस समय विरोध प्रदर्शन करने वाले कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें जेल में भी रहना पड़ा था।
अब पश्चिम बंगाल सरकार ने ऐसे लोगों के लिए मासिक पेंशन की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। सरकार के अनुसार, इससे लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने वालों के योगदान को आधिकारिक तौर पर सम्मान देने का संदेश जाएगा।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस मौके पर कहा कि सरकार उन लोगों के आदर्शों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेगी, जिन्होंने देश और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए त्याग किया। 325 लोगों की पहचान के बाद अब इन लोगों को योजना का लाभ देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
फिलहाल पश्चिम बंगाल सरकार की यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसका सीधा संबंध देश के इतिहास के उस दौर से है, जब इमरजेंसी के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक गतिविधियों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए थे। अब राज्य सरकार ने उस दौर में आंदोलन करने वाले लोगों को हर महीने 10 हजार रुपये की पेंशन देकर सम्मानित करने का फैसला किया है।













