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सायोनी घोष की एक पोस्ट से TMC में हलचल, लिखा- ‘बता काफिला क्यों लुटा’

सायोनी घोष की एक एक्स पोस्ट TMC के अंदरूनी विवाद के बीच चर्चा में है। उन्होंने बिना नाम लिए लिखा, ‘काफिला क्यों लुटा’, जिससे राजनीतिक कयास तेज हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Fri, 18 Sep 2026 1:19:58

सायोनी घोष की एक पोस्ट से TMC में हलचल, लिखा- ‘बता काफिला क्यों लुटा’

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद के बीच पार्टी सांसद सायोनी घोष की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गई है। गुरुवार को सायोनी घोष ने एक्स पर लिखा, “तू इधर-उधर की न बात कर, ये बता कि काफिला क्यों लुटा...” उन्होंने अपनी पोस्ट में किसी नेता या राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम के बीच इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। खास तौर पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या उनकी पोस्ट का इशारा पार्टी के भीतर चल रही खींचतान की ओर है।

सायोनी घोष को ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है और उन्होंने पार्टी के भीतर चल रहे विवाद के बावजूद सार्वजनिक तौर पर ममता बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ कोई सीधा बयान नहीं दिया है। ऐसे में उनकी यह पोस्ट टाइमिंग को लेकर चर्चा में आ गई है। हालांकि, उन्होंने खुद यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनका इशारा किस घटना, नेता या गुट की ओर था।

TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद

यह पूरा घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के भीतर दो गुटों के बीच चल रहे विवाद के बीच सामने आया है। चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी करते हुए दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनाव में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के आरक्षित ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया। आयोग के मुताबिक दोनों गुट खुद को वास्तविक TMC बताते हुए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं।

आयोग का यह अंतरिम इंतजाम नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प देने को कहा गया है। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक आयोग विवाद पर अंतिम फैसला नहीं करता।

विवाद के बीच सायोनी घोष की पोस्ट क्यों चर्चा में है

सायोनी घोष की पोस्ट में किसी गुट का नाम नहीं है। इसके बावजूद TMC के भीतर चल रही मौजूदा राजनीतिक खींचतान के बीच इसे जोड़कर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि उन्होंने सीधे तौर पर ममता बनर्जी, पार्टी नेतृत्व या चुनाव आयोग के आदेश का उल्लेख नहीं किया है।

यही वजह है कि उनकी पोस्ट को लेकर फिलहाल केवल कयास लगाए जा रहे हैं। पोस्ट का वास्तविक संदर्भ क्या है, इसका कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण सायोनी घोष की ओर से सामने नहीं आया है। इसलिए इसे किसी खास गुट के खिलाफ बयान के तौर पर निश्चित रूप से पेश करना उचित नहीं होगा।

ममता गुट ने चुनाव आयोग के आदेश पर जताई आपत्ति

चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश पर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने आपत्ति जताई है। TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि उनका गुट आयोग के आदेश को स्वीकार नहीं करता, क्योंकि उनके मुताबिक इसमें कई कानूनी कमियां हैं और आदेश में तथ्यों को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया है।

कल्याण बनर्जी ने कहा कि उनका गुट अपना जवाब देगा और निर्धारित समय तक आयोग के सामने अपनी स्थिति रखेगा। उनका कहना था कि अस्थायी अवधि के लिए कुछ व्यवस्थाओं को स्वीकार करना पड़ सकता है, लेकिन इससे आदेश पर उनकी आपत्ति खत्म नहीं होती।

बागी गुट ने अंतरिम आदेश को स्वीकार किया

दूसरी ओर, बागी गुट के विधायक अखरुज्जमां अंसारी ने चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को स्वीकार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि उनका गुट फिलहाल आयोग के निर्देश का पालन करेगा। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतिम फैसला आने पर उन्हें पार्टी का आधिकारिक नाम और मूल चुनाव चिह्न मिल जाएगा।

अंसारी ने यह भी कहा कि उनका गुट ‘जोड़ाफूल’ यानी फूल और घास वाले मूल चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करना चाहता था, लेकिन आयोग ने फिलहाल अंतरिम व्यवस्था लागू की है।

नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनाव से पहले बढ़ा विवाद

TMC के दोनों गुटों के बीच यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। चुनाव आयोग ने इन दोनों सीटों के लिए 6 अक्टूबर को उपचुनाव निर्धारित किए हैं। दोनों गुटों ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश किया था, जिसके बाद आयोग के सामने विवाद पहुंचा।

चुनाव आयोग ने कहा है कि पार्टी के नाम और चिह्न पर अंतिम निर्णय के लिए विस्तृत प्रक्रिया की जरूरत है। फिलहाल उपचुनाव की समयसीमा को देखते हुए दोनों पक्षों को अलग पहचान के साथ चुनाव लड़ने की अंतरिम व्यवस्था की गई है।

सांसदों के BJP में जाने की चर्चा भी रही

इस पूरे विवाद के बीच TMC के कुछ सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में जाने की अटकलों का भी जिक्र सामने आया था। हालांकि, बागी गुट ने ऐसे दावों को खारिज किया था और भाजपा की ओर से भी तत्काल किसी को पार्टी में शामिल करने की योजना नहीं होने की बात कही गई थी।

फिलहाल सायोनी घोष की पोस्ट ने इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है, लेकिन पोस्ट में किसी व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं होने के कारण इसके वास्तविक राजनीतिक संदर्भ को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

यह भी पढ़ें - ममता से मिलीं कनिमोझी, कांग्रेस से अलग क्षेत्रीय दलों को साथ लाने की अटकलों ने पकड़ा जोर

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