पश्चिम बंगाल की राजनीति में मंगलवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की जनता, खासकर महिलाओं और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए कई बड़ी घोषणाएं कर दीं। सरकार ने महिलाओं को आर्थिक सहायता देने से लेकर बेहद कम कीमत पर भोजन उपलब्ध कराने और शराब की दुकानों पर सख्ती जैसे फैसलों का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री के इन फैसलों को आगामी समय में राज्य की सामाजिक और राजनीतिक दिशा से जोड़कर देखा जा रहा है।
नादिया जिले के कल्याणी में आयोजित एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार 27 मई से ‘अन्नपूर्णा योजना’ के आवेदन फॉर्म जारी करेगी। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता भेजी जाएगी। सरकार का दावा है कि योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया शुरू होते ही लाभार्थियों का पंजीकरण किया जाएगा और जरूरी जांच पूरी होने के बाद राशि सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार योजना को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों का इस्तेमाल करेगी ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
शुभेंदु अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में स्कूलों, कॉलेजों और धार्मिक स्थलों के आसपास शराब की दुकानों को लेकर नई सख्ती लागू की जाएगी। सरकार ने फैसला लिया है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान या मंदिर-मस्जिद जैसे पूजा स्थलों के एक किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकान खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य युवाओं और समाज पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम करना है।
सरकार की ओर से आम लोगों के लिए सस्ती भोजन व्यवस्था को लेकर भी बड़ा ऐलान किया गया। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्यभर में लगभग 400 विशेष कैंटीन शुरू की जाएंगी, जहां लोगों को केवल 5 रुपये में मछली और चावल का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह सुविधा सप्ताह में दो दिन दी जाएगी ताकि गरीब और जरूरतमंद लोगों को कम कीमत में पौष्टिक भोजन मिल सके।
राज्य सरकार का मानना है कि बढ़ती महंगाई के बीच यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए काफी राहत लेकर आएगी। बंगाल में मछली-चावल आम लोगों के प्रमुख भोजन का हिस्सा माना जाता है, इसलिए सरकार ने इसी पारंपरिक भोजन को सस्ती दर पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के मतदाताओं को साधने की रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं।














