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TMC में सियासी उथल-पुथल के बीच ममता बनर्जी को मिली राहत? 20 बागी सांसदों के दावे पर उठे सवाल

टीएमसी में बगावत की अटकलों के बीच 20 सांसदों के एनडीए समर्थन वाले दावे पर सवाल उठने लगे हैं। सांसद प्रतिमा मंडल ने ऐसे किसी पत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया है, जबकि शत्रुघ्न सिन्हा ने भी ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 11 Jun 2026 4:08:43

TMC में सियासी उथल-पुथल के बीच ममता बनर्जी को मिली राहत? 20 बागी सांसदों के दावे पर उठे सवाल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को लेकर लगातार नई-नई राजनीतिक हलचलें देखने को मिल रही हैं। विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और टूट की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। पहले कई विधायकों के पार्टी से दूरी बनाने की खबरें सामने आईं और अब सांसदों को लेकर भी दलबदल की अटकलें तेज हैं। इसी बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व के लिए राहत की खबर माना जा रहा है।

दरअसल, टीएमसी से अलग होने का दावा करने वाले गुट की ओर से कहा गया था कि पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने की इच्छा जताई है। इस दावे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। हालांकि अब इस कथित सूची में शामिल एक सांसद ने सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी भी पत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है, जिससे पूरे दावे की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जयनगर लोकसभा सीट से टीएमसी सांसद प्रतिमा मंडल ने साफ शब्दों में कहा है कि उन्होंने एनडीए को समर्थन देने संबंधी किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने इस तरह की खबरों को पूरी तरह झूठा और भ्रामक बताया। कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रतिमा मंडल ने कहा कि जनता ने उन्हें विश्वास और समर्थन देकर संसद भेजा है और वे अपने मतदाताओं के जनादेश का सम्मान करती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 4 तारीख के बाद वह दिल्ली नहीं गई हैं और लगातार कोलकाता में ही मौजूद हैं।

प्रतिमा मंडल ने उन लोगों को भी खुली चुनौती दी जो 20 सांसदों के समर्थन का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में इतने सांसद उनके साथ हैं और पिछले कई दिनों से इस तरह की खबरें चलाई जा रही हैं, तो संबंधित पत्र को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर मीडिया के सामने वह दस्तावेज क्यों नहीं लाया जा रहा, जिसमें सभी सांसदों के हस्ताक्षर मौजूद हों। सांसद ने कहा कि उनके नाम का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए और वे वर्ष 2029 तक अपने क्षेत्र की जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाती रहेंगी।

इसी बीच टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने भी पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई है। बागी गुट में उनका नाम शामिल होने की अटकलों के बीच उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब वह कठिन दौर से गुजर रहे थे, तब ममता बनर्जी उनके साथ मजबूती से खड़ी थीं। ऐसे में अब उनका भी कर्तव्य बनता है कि वह पार्टी और ममता बनर्जी के साथ खड़े रहें। उनके इस बयान को भी टीएमसी के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी भी गुट को अलग पहचान बनाए रखने और अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। यही वजह है कि 20 सांसदों के समर्थन का दावा राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बागी गुट का नेतृत्व कर रहीं काकोली घोष दस्तीदार का कहना है कि उनके साथ 20 सांसद हैं, जिनमें से 18 ने व्यक्तिगत रूप से और 2 सांसदों ने ऑनलाइन माध्यम से कथित पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो गुट भविष्य में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर भी दावा कर सकता है।

दूसरी ओर, राज्यसभा में टीएमसी को लगातार झटके लगते दिखाई दे रहे हैं। गुरुवार को राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने संसद की सदस्यता के साथ-साथ पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने फैसले के पीछे पश्चिम बंगाल की जनता के जनादेश का हवाला दिया। बराइक ने कहा कि राज्य की जनता ने भाजपा के पक्ष में अपना समर्थन व्यक्त किया है और वह जनता की भावना का सम्मान करते हुए यह निर्णय ले रहे हैं।

प्रकाश चिक बराइक से पहले राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव भी पार्टी छोड़ चुके हैं। इस तरह एक ही सप्ताह में टीएमसी को राज्यसभा में लगातार तीन बड़े झटके लगे हैं। सुखेंदु शेखर राय ने अपने इस्तीफे के बाद पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों का जिक्र किया था, जबकि सुष्मिता देव के इस्तीफे के बाद उनकी असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और बढ़ा दिया।

इसी बीच कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि यादवपुर से सांसद सायोनी घोष और कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय भी कथित असंतुष्ट गुट के संपर्क में हैं। हालांकि इन दावों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में टीएमसी के भीतर जारी सियासी उठापटक और बागी सांसदों की संख्या को लेकर बना रहस्य फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति का सबसे चर्चित विषय बना हुआ है।

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