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TMC में सियासी घमासान तेज, ममता को हटाने की मांग; बड़े नेता का खुला विरोध

तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। वरिष्ठ नेता तारक सिंह ने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए बदलाव की मांग की, वहीं शांतनु सेन के इस्तीफे से पार्टी में हलचल तेज हो गई है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Fri, 29 May 2026 8:22:55

TMC में सियासी घमासान तेज, ममता को हटाने की मांग; बड़े नेता का खुला विरोध

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष अब खुलकर सतह पर दिखाई देने लगा है। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी लगातार दबाव में है और अब कई वरिष्ठ नेता सीधे नेतृत्व पर सवाल उठाने लगे हैं। स्थिति इतनी गंभीर होती दिख रही है कि पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को हटाने तक की मांग सामने आने लगी है। टीएमसी के भीतर बढ़ती नाराजगी ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

हाल के दिनों में पार्टी के कई बड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर असहमति जाहिर की है। सांसदों से लेकर पार्षदों तक कई चेहरे खुले तौर पर नेतृत्व से नाराज नजर आ रहे हैं। हाल ही में लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार सहित कई नेताओं ने संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देकर पार्टी के अंदर चल रहे तनाव के संकेत दिए थे।

ममता के पुराने सहयोगी ने खोला मोर्चा

अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और ममता बनर्जी के लंबे समय से करीबी माने जाने वाले पार्षद तारक सिंह ने खुलकर नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर दी है। करीब चार दशक से ममता बनर्जी के राजनीतिक सहयोगी रहे तारक सिंह ने एक टीवी इंटरव्यू में पार्टी के मौजूदा नेतृत्व को असफल बताते हुए बड़ा बयान दिया।

उन्होंने कहा कि अब पार्टी को नए नेतृत्व की जरूरत है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका इशारा सीधे ममता बनर्जी की ओर है, तो उन्होंने बिना किसी हिचक के इसका जवाब ‘हां’ में दिया।

“जो नेतृत्व फेल हो चुका है, उसे बदलना होगा”

एक समाचार चैनल से बातचीत में तारक सिंह ने कहा, “जो लोग अभी नेतृत्व कर रहे हैं, मैं उन्हें बदलना चाहता हूं।” जब उनसे दोबारा पूछा गया कि क्या वह ममता बनर्जी की बात कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा, “बिल्कुल, मैं ऑन रिकॉर्ड यह बात कह रहा हूं। मुझे डर नहीं लगता। जो नेतृत्व कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा नहीं रह सकता और जो जनता का भरोसा खो चुका है, वह आगे क्या करेगा?”

उन्होंने आगे कहा कि अगर पार्टी नेतृत्व चाहे तो उन्हें संगठन से बाहर निकाल सकता है, लेकिन इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। सिंह ने कहा, “ज्यादा से ज्यादा क्या होगा, पार्टी से निकाल देंगे। अगर ऐसा करना है तो कर दें।”

उनके इस बयान को टीएमसी के भीतर अब तक का सबसे खुला विरोध माना जा रहा है।

अभिषेक बनर्जी पर भी जताई नाराजगी

तारक सिंह ने लोकसभा सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को लेकर भी अप्रत्यक्ष तौर पर नाराजगी जाहिर की। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर अभिषेक पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उनकी नाराजगी उस व्यक्ति से है जिसने उन्हें आगे बढ़ाया।

उन्होंने कहा, “मुझे अभिषेक के बारे में कुछ नहीं कहना। मैं उस व्यक्ति के खिलाफ हूं जिसने उन्हें इस स्थिति तक पहुंचाया है।” उनके इस बयान को पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी और नेतृत्व संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है।

शांतनु सेन ने भी छोड़ा राष्ट्रीय प्रवक्ता पद

टीएमसी के भीतर उठ रही नाराजगी की आवाज केवल तारक सिंह तक सीमित नहीं है। पूर्व राज्यसभा सांसद और पार्टी नेता शांतनु सेन ने भी हाल ही में राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देकर नेतृत्व को असहज कर दिया।

अपने इस्तीफे में शांतनु सेन ने कहा कि पार्टी से जुड़े विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों का लगातार सार्वजनिक बचाव करना अब उनके लिए नैतिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने लिखा कि कई बार उन्होंने पार्टी का पक्ष ऐसे मुद्दों पर भी रखा, जिनसे उनकी अंतरात्मा सहमत नहीं थी।

सेन ने कहा, “कई कठिन परिस्थितियों में मैंने टीवी डिबेट और सार्वजनिक मंचों पर पार्टी का बचाव किया। इसके कारण मुझे लोगों की आलोचना भी झेलनी पड़ी। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि मैं इन मुद्दों का समर्थन नहीं कर सकता।”

आरजी कर मामला और भ्रष्टाचार बना असंतोष की वजह

शांतनु सेन ने अपने इस्तीफे में आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले, नौकरी घोटाले और कथित भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन मामलों की वजह से जनता का भरोसा कमजोर हुआ है और पार्टी की छवि को बड़ा नुकसान पहुंचा है।

उनके मुताबिक, “आरजी कर घटना, भर्ती घोटाले और अन्य अनैतिक गतिविधियों के कारण लोगों ने हमें नकार दिया है। मेरी अंतरात्मा अब मुझे इन बातों का समर्थन करने की अनुमति नहीं देती।”

आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े विवादों के दौरान भी शांतनु सेन ने सार्वजनिक रूप से कई सवाल उठाए थे, जिससे पार्टी नेतृत्व असहज हो गया था। उस समय उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित भी किया गया था, हालांकि बाद में उन्हें बहाल कर दिया गया।

चुनावी हार के बाद गहराया संकट

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालिया चुनावी नतीजों ने टीएमसी के भीतर दबाव और असंतोष को और बढ़ा दिया है। लंबे समय से पार्टी के भीतर दबे हुए मतभेद अब सार्वजनिक तौर पर सामने आने लगे हैं। कई नेता संगठन की निर्णय प्रक्रिया, नेतृत्व शैली और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर खुलकर सवाल उठा रहे हैं।

तारक सिंह और शांतनु सेन जैसे नेताओं के बयान इस बात के संकेत माने जा रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक और संगठनात्मक संकट का सामना कर सकती है। फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से इन बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंदरूनी हलचल ने बंगाल की राजनीति को गर्म जरूर कर दिया है।

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