पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही उठापटक लगातार गहराती नजर आ रही है। पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने संगठन को एकजुट बनाए रखने की चुनौती पहले से कहीं अधिक कठिन होती दिख रही है। हाल के दिनों में कई सांसदों की नाराजगी खुलकर सामने आई है, जिससे पार्टी के भीतर विभाजन की अटकलें तेज हो गई हैं। पहले रिताब्रता बनर्जी ने कथित तौर पर 58 सांसदों के समर्थन का दावा करते हुए विपक्ष के नेता पद को लेकर अपनी दावेदारी पेश की थी, वहीं अब बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार के रुख ने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
सूत्रों के अनुसार, काकोली घोष अपने समर्थक सांसदों के साथ अलग राजनीतिक राह अपनाने की संभावना तलाश रही हैं। इसी बीच यह भी चर्चा है कि TMC के कुछ अन्य नेता और सांसद पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं। राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि राज्यसभा सांसद नदीमुल हक भाजपा के संपर्क में हैं, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
काकोली घोष का बड़ा दावा, NDA समर्थन की बात
पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने वाली काकोली घोष दस्तीदार ने संकेत दिए हैं कि बागी सांसदों का समूह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ लगभग 19 सांसदों का समर्थन मौजूद है। उन्होंने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा, “सिर कट जाएगा, लेकिन झुकेगा नहीं।”
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कोई समूह दल-बदल विरोधी कानून से बचना चाहता है, तो उसे लोकसभा में पार्टी के कुल सांसदों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। TMC के 28 लोकसभा सांसदों के आधार पर यह संख्या लगभग 19 सांसदों की बनती है। ऐसे में काकोली घोष का यह दावा राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
दिल्ली में बैठकों ने बढ़ाई अटकलें
सोमवार को दिल्ली में कम से कम 14 सांसदों की बैठक ने TMC की अंदरूनी राजनीति को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया। बताया जा रहा है कि इस बैठक में पार्टी से अलग होने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। चर्चा में पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ भाजपा नेता और राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी की भी बात कही जा रही है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी को निराशाजनक प्रदर्शन का सामना करना पड़ा था। ऐसे में सांसदों की नाराजगी और संभावित बगावत को TMC के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
दिलचस्प बात यह रही कि जिस समय ममता बनर्जी विपक्षी गठबंधन INDIA की बैठक में हिस्सा ले रही थीं, उसी दौरान दिल्ली में बागी सांसदों की अलग राजनीतिक गतिविधियां जारी थीं। बताया जाता है कि काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में कुछ सांसदों ने केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल मामलों में भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल भूपेंद्र यादव के आवास पर करीब दो घंटे तक बैठक की। बाद में शाम के समय यह समूह बीरभूम से कई बार सांसद रह चुकीं शताब्दी रॉय के निवास पर भी एकत्र हुआ, जहां आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।
कीर्ति आजाद का पलटवार
इन घटनाक्रमों के बीच TMC सांसद कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को तोड़ने की कोशिशें सफल नहीं होंगी। उन्होंने दावा किया कि जो सूची सार्वजनिक की गई है, वह पूरी तरह से मनगढ़ंत और भ्रामक है।
कीर्ति आजाद ने अपने बयान में कहा कि सूची में शामिल छह लोगों ने किसी भी दस्तावेज या प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने भाजपा के कथित “ऑपरेशन लोटस” को विफल बताते हुए कहा कि पार्टी को अस्थिर करने की कोशिश सफल नहीं हुई है।
बागी सांसदों की बैठकों को लेकर क्या कहा गया?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुभेंदु अधिकारी दोनों बैठकों में मौजूद थे और सांसदों से बातचीत कर रहे थे। एक सांसद के हवाले से कहा गया कि बैठक के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने तंज भरे अंदाज में कहा कि आप सभी अनुभवी और वरिष्ठ सांसद हैं, लेकिन पार्टी के शीर्ष नेताओं ने आपके साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया।
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम ने उस समय और ज्यादा तूल पकड़ लिया जब TMC के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे पार्टी में कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अव्यवस्था को वजह बताया। उनके आरोपों ने पहले से चल रही राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है।
फिलहाल TMC के भीतर बढ़ती असहमति और लगातार सामने आ रहे बगावती सुर ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह नाराजगी केवल दबाव बनाने की रणनीति है या फिर पार्टी के भीतर किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत।













