पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में राजनीतिक असंतोष की खबरें लगातार तेज होती जा रही हैं। विधानसभा चुनाव में अपेक्षित नतीजे न मिलने के बाद से ही पार्टी के भीतर असहमति और असंतोष की आवाजें लगातार उभर रही हैं। जानकारी के अनुसार, एक दर्जन से अधिक विधायक पार्टी की कार्यशैली और नीतियों पर खुलकर सवाल उठा चुके हैं। वहीं, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि लगभग 15 सांसद पार्टी से दूरी बनाने की तैयारी में हैं। हालांकि, इस बारे में अब तक किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसी बीच नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर भी पार्टी के सामने उम्मीदवार चयन की चुनौती खड़ी होती दिख रही है।
पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी
एक रिपोर्ट के अनुसार, टीएमसी के भीतर कम से कम 18 प्रमुख नेता ऐसे हैं जो असंतोष जाहिर कर चुके हैं। इनमें कई सांसद और विधायक शामिल बताए जा रहे हैं, जिनमें सुखेंदु शेखर रॉय, काकोली घोष दस्तीदार, देव अधिकारी, कल्याण बनर्जी, रचना बनर्जी, कुणाल घोष, रिताब्रता बनर्जी, अरुणव सेन, संदीपन साहा, नियामत शेख, पूर्व मंत्री कृष्णेंदु नारायण चौधरी, मनोज तिवारी, रविंद्रनाथ घोष, पूर्व विधायक अतीन घोष, खगेश्वर रॉय, सौरव चक्रवर्ती, रत्ना चटर्जी और तपन चटर्जी जैसे नाम चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि इन नेताओं के बीच पार्टी नेतृत्व को लेकर कई मुद्दों पर असहमति गहराती जा रही है।
20 सांसदों के पार्टी छोड़ने की अटकलें
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि टीएमसी के भीतर बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। कहा जा रहा है कि करीब 12 सांसदों ने भाजपा में जाने या उसे समर्थन देने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके अलावा 5 से 6 अन्य सांसदों के नाम भी संभावित दलबदल की सूची में शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन नामों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है और न ही यह स्पष्ट है कि यह बदलाव कब तक संभव है। सूत्रों के अनुसार, कुल मिलाकर यह संख्या 20 तक भी पहुंच सकती है, जिससे पार्टी के लिए स्थिति और जटिल हो सकती है।
100 से अधिक पार्षदों के इस्तीफे का दावा
पार्टी संगठन को लेकर जमीनी स्तर पर भी असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में 100 से अधिक पार्षदों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब निकाय चुनाव नजदीक हैं, जिससे पार्टी की रणनीति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि कई पार्षद अब खुले तौर पर टीएमसी नेतृत्व और डायमंड हार्बर मॉडल को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जिसे सांसद अभिषेक बनर्जी से जोड़ा जाता है। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से एकजुट रहने की अपील की है ताकि संगठनात्मक मजबूती बनी रहे।
नंदीग्राम उपचुनाव बना बड़ी चुनौती
टीएमसी के सामने एक और बड़ी राजनीतिक चुनौती नंदीग्राम सीट को लेकर सामने आ रही है। खबरों के मुताबिक, पार्टी को इस महत्वपूर्ण सीट पर होने वाले संभावित उपचुनाव के लिए उपयुक्त उम्मीदवार तलाशने में कठिनाई हो रही है। कई वरिष्ठ नेता इस सीट से चुनाव लड़ने में अनिच्छा जता रहे हैं। यह वही सीट है जहां वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को शुभेंदु अधिकारी से हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2026 के चुनाव में भी यह सीट राजनीतिक रूप से काफी चर्चा में रही, जहां शुभेंदु अधिकारी ने जीत दर्ज की थी, जबकि ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से विधायक बनी रहीं और नंदीग्राम को छोड़ने का फैसला लिया था।














