पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने के बाद नए मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari अब तेजी से प्रशासनिक फैसले लेते नजर आ रहे हैं। सोमवार को राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में हुई पहली कैबिनेट बैठक के बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा उस फैसले की हो रही है, जिसमें उन्होंने साफ कर दिया कि पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की सरकार की लोकप्रिय ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना को बंद नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य की नई भाजपा सरकार जनता के हित से जुड़ी योजनाओं को जारी रखेगी और महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता में किसी तरह की रुकावट नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य राजनीतिक बदलाव के बावजूद आम लोगों के कल्याण को प्राथमिकता देना है।
कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग का आभार जताया और हाल ही में संपन्न हुए चुनावों को शांतिपूर्ण और सफल बताया। इसके साथ ही उन्होंने चुनावी हिंसा में जान गंवाने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि भी दी।
क्या है ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना?
‘लक्ष्मी भंडार’ योजना को Mamata Banerjee सरकार की सबसे अहम सामाजिक योजनाओं में गिना जाता है। इस योजना की शुरुआत वर्ष 2021 में की गई थी और इसका मकसद आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना था।
योजना के तहत 25 से 60 वर्ष की महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद दी जाती है। अनुसूचित जाति और आदिवासी वर्ग की महिलाओं को 1200 रुपये प्रतिमाह, जबकि अन्य वर्ग की महिलाओं को 1000 रुपये हर महीने दिए जाते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में इस योजना ने ममता सरकार के लिए मजबूत सामाजिक समर्थन तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
नई सरकार ने दिया भरोसा
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जनता को भरोसा दिलाया कि राज्य में चल रही सभी प्रमुख सामाजिक योजनाएं आगे भी जारी रहेंगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी लाभार्थियों को रोकने के लिए कड़ा सत्यापन तंत्र लागू किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी योजना का गलत तरीके से फायदा न उठाया जाए। जो लोग नियमों का पालन करते हैं, उन्हें पूरी पारदर्शिता के साथ लाभ मिलता रहेगा। लेकिन बेईमानी और सिस्टम की खामियों का इस्तेमाल करने वालों पर सख्ती की जाएगी।”
सरकारी नौकरियों को लेकर भी बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री ने राज्य में बढ़ती बेरोजगारी को देखते हुए सरकारी नौकरियों के लिए आयु सीमा में राहत देने की घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि अब सरकारी भर्तियों में आवेदन करने के लिए अधिकतम आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट दी जाएगी।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार सुशासन, सुरक्षा और विकास के मॉडल पर काम करेगी। साथ ही राज्य को केंद्र सरकार की योजनाओं से और अधिक मजबूती से जोड़ा जाएगा, ताकि लोगों को सीधे लाभ मिल सके।
नबन्ना में हुई BJP सरकार की पहली कैबिनेट बैठक
पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद सोमवार को ‘नबन्ना’ में पहली कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रशासन, सुरक्षा और सामाजिक कल्याण से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जमीन हस्तांतरित करने का फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी गई है और अगले 45 दिनों के भीतर गृह मंत्रालय को जमीन सौंप दी जाएगी।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, सीमा पर बाड़बंदी पूरी होने के बाद अवैध घुसपैठ जैसी समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि राज्य की सुरक्षा को मजबूत करना उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ का मुद्दा भाजपा के प्रमुख चुनावी एजेंडों में शामिल था। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर मजबूत निगरानी और बीएसएफ को पर्याप्त जमीन उपलब्ध कराने का वादा किया था।
इस बैठक में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ भाजपा नेता और मंत्री Dilip Ghosh, Nisith Pramanik, Agnimitra Paul, अशोक कीर्तनिया और खुदीराम टुडू भी मौजूद रहे।














