कोलकाता: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी रविवार, 9 अगस्त 2026, को कथित पुलिस हिरासत में जान गंवाने वाले पार्टी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंचीं। इस मुलाकात के दौरान मृतक बिरजु केवट के भाई शम्भू केवट ने ममता बनर्जी के साथ बातचीत को लेकर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के घर पहुंचने के बावजूद उन्होंने उनसे कोई बातचीत नहीं की और न ही उनसे बात करने की इच्छा जताई।
शम्भू केवट ने साफ शब्दों में कहा कि अब ममता बनर्जी से बातचीत करने का कोई मतलब नहीं रह गया है। उनका कहना है कि इस समय उनका पूरा ध्यान अपने भाई को न्याय दिलाने पर है। उन्होंने मांग की कि बिरजु की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो।
मृतक TMC कार्यकर्ता के भाई ने ममता बनर्जी से बात करने से किया इनकार
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में शम्भू केवट ने कहा कि जब ममता बनर्जी उनके परिवार से मिलने पहुंचीं, तब उन्होंने उनसे बातचीत नहीं की। उन्होंने कहा, “मैंने उनसे बात ही नहीं की। मैं उनसे कोई बात करना नहीं चाहता हूं। अब उनसे बातचीत करके क्या करना है? अभी मैं सिर्फ अपने भाई के लिए न्याय चाहता हूं। मैं उसके लिए न्याय की मांग करता हूं।”
शम्भू केवट की बातों से साफ है कि वह अपने भाई की मौत को लेकर काफी नाराज हैं और इस मामले में किसी तरह की औपचारिक बातचीत के बजाय कार्रवाई चाहते हैं। उन्होंने कहा कि परिवार को अपने भाई की मौत से जुड़े सवालों के जवाब चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि आखिर बिरजु की हिरासत में मौत कैसे हुई।
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#WATCH | Barrackpore: On former WB CM Mamata Banerjee's visit to his house, Shambhu Keot, brother of the deceased TMC worker Birju Keot, says, "I didn't speak to her. I don't want to talk to her. What would be the point of talking? Right now, I just want justice for my brother...… pic.twitter.com/SkV8zvB0Zz
— ANI (@ANI) August 9, 2026
सिक्योरिटी गार्ड था बिरजु, पुलिस हिरासत के अगले दिन हुई मौत
घटना के बारे में जानकारी देते हुए शम्भू केवट ने बताया कि उनके भाई बिरजु केवट एक सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम करते थे। उनके मुताबिक, पुलिस उनके भाई को घर से लेकर गई थी और बाद में उसे हिरासत में रखा गया। शम्भू ने दावा किया कि पुलिस सुबह करीब 7 बजे बिरजु को थाने लेकर गई थी।
उन्होंने बताया कि इसके बाद करीब 10 बजे बिरजु को मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया। मेडिकल टेस्ट के बाद पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया। शम्भू के मुताबिक, अदालत से पुलिस को बिरजु की पांच दिन की रिमांड मिल गई थी। हालांकि, इसके अगले ही दिन बिरजु की मौत हो गई।
मृतक के भाई ने इस घटनाक्रम पर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद इतने कम समय में बिरजु की मौत कैसे हुई, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिवार इस पूरे मामले को लेकर स्पष्ट जानकारी और जवाब चाहता है।
‘बिरजु के शरीर पर मारपीट के कई निशान थे’
शम्भू केवट ने अपने भाई के शरीर पर चोट के निशान होने का भी दावा किया है। उन्होंने कहा कि जब परिवार के लोग अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने बिरजु के शरीर पर कई जगह मारपीट के निशान खुद देखे थे। उनके मुताबिक, इन निशानों को लेकर परिवार के मन में गंभीर सवाल हैं और मामले की पूरी जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा, “बिरजु के शरीर पर मारपीट के बहुत सारे निशान थे। जब हम अस्पताल पहुंचे थे, तो हमने खुद वो सारे निशान देखे थे।” शम्भू का आरोप है कि परिवार को अभी तक यह तक नहीं बताया गया है कि बिरजु को आखिर किस वजह से गिरफ्तार किया गया था।
उन्होंने कहा कि बिरजु की गिरफ्तारी के कारण और उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों के बारे में परिवार को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। शम्भू के मुताबिक, परिवार के पास इस पूरे मामले को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं है और कई सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं।
परिवार ने स्थानीय विधायक से लगाई न्याय की गुहार
मृतक के भाई शम्भू केवट ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के स्थानीय विधायक को मामले का संज्ञान लेना चाहिए और परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि बिरजु की मौत के लिए जो भी लोग जिम्मेदार हैं, चाहे वे पुलिस से जुड़े हों या कोई अन्य व्यक्ति, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। शम्भू ने कहा कि दोषियों की पहचान कर उन्हें सजा दिलाई जानी चाहिए, ताकि परिवार को न्याय मिल सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल परिवार की सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने भाई की मौत का सच सामने लाना और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित कराना है। ममता बनर्जी के परिवार से मिलने के बावजूद शम्भू ने उनसे बातचीत नहीं की और कहा कि अब उनके लिए केवल न्याय मायने रखता है।













