पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तनाव और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ नेताओं और सांसदों के साथ कथित मारपीट की घटनाओं के बाद पार्टी ने विरोध का मोर्चा खोल दिया है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज कोलकाता में एक बड़े धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व करने जा रही हैं। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के विरोध में आयोजित किया जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने और विरोध दर्ज कराने के लिए लगातार कार्यक्रम आयोजित कर रही है। सोमवार को राज्य के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए थे, जबकि आज मुख्यमंत्री स्वयं आंदोलन की कमान संभालेंगी।
अभिषेक और कल्याण बनर्जी पर हमलों को लेकर आक्रामक हुई TMC
पार्टी सूत्रों के अनुसार, सांसद अभिषेक बनर्जी और वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी के साथ हुई कथित घटनाओं के बाद ममता बनर्जी काफी नाराज हैं। पहले पार्टी कार्यकर्ताओं को विरोध प्रदर्शन के लिए मैदान में उतारा गया और अब मुख्यमंत्री खुद सड़क पर उतरकर राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में हैं।
तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर पेश कर रही है। पार्टी का दावा है कि विपक्षी ताकतें उसके नेताओं को डराने और दबाव बनाने की कोशिश कर रही हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रानी रश्मोनी एवेन्यू की जगह धर्मतला में होगा धरना
शुरुआत में पार्टी ने कोलकाता के रानी रश्मोनी एवेन्यू में धरना आयोजित करने की योजना बनाई थी। हालांकि प्रशासन की ओर से वहां कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलने के बाद स्थान में बदलाव करना पड़ा। अब यह विरोध प्रदर्शन धर्मतला स्थित वाई चैनल (Y Channel) क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा।
राजनीतिक दृष्टि से धर्मतला लंबे समय से आंदोलनों और जनसभाओं का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में ममता बनर्जी का यहां धरने पर बैठना राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
सोमवार के प्रदर्शनों में अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिला
सोमवार को तृणमूल कांग्रेस ने कोलकाता, आसनसोल, राजरहाट, हुगली सहित कई जिलों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे। हालांकि इन कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी रही कि अपेक्षित संख्या में आम लोग इन प्रदर्शनों से नहीं जुड़े।
कई स्थानों पर पार्टी कार्यकर्ता तो दिखाई दिए, लेकिन आम जनता की भागीदारी सीमित बताई गई। विपक्षी दलों ने इसे टीएमसी के प्रति घटते जनसमर्थन का संकेत बताया, जबकि पार्टी नेताओं ने इन दावों को खारिज किया है।
तैयारी बैठक में विधायकों की कम मौजूदगी बनी चर्चा का विषय
आज होने वाले बड़े प्रदर्शन से पहले तृणमूल कांग्रेस ने रणनीति तैयार करने के लिए एक बैठक आयोजित की थी। लेकिन इस बैठक में विधायकों की कम उपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया।
बताया जा रहा है कि पार्टी के कुल 80 विधायकों में से केवल लगभग 20 विधायक ही बैठक में शामिल हुए, जबकि बड़ी संख्या में विधायक अनुपस्थित रहे। इस घटनाक्रम को लेकर विपक्ष टीएमसी के भीतर असंतोष और आंतरिक मतभेदों की ओर इशारा कर रहा है।
बीजेपी पर लगाए दबाव बनाने के आरोप
बैठक में कम उपस्थिति को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। उनका आरोप है कि विपक्षी दल उनके विधायकों पर विभिन्न माध्यमों से दबाव बना रहा है और उन्हें डराने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि बीजेपी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि टीएमसी अपने आंतरिक संकट और संगठनात्मक चुनौतियों को छिपाने के लिए इस तरह के आरोप लगा रही है।
दो विधायकों पर हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई
इसी बीच तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को संगठन से निष्कासित कर दिया है। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं ने हाल के दिनों में अभिषेक बनर्जी की भूमिका और कुछ पार्टी निर्णयों पर सवाल उठाए थे।
इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में हलचल और बढ़ गई है। अब सभी की नजर धर्मतला में होने वाले ममता बनर्जी के धरने पर टिकी है, जहां से पार्टी अपने राजनीतिक विरोध को और तेज करने की रणनीति पर आगे बढ़ सकती है।













