कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को फेसबुक लाइव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य में उनकी पार्टी के सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने छात्र आंदोलनों, जनगणना प्रक्रिया और नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े विवाद को लेकर भी केंद्र और भाजपा को आड़े हाथों लिया।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों को डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके अनुसार कुछ नेताओं पर कथित तौर पर यह दबाव बनाया जा रहा है कि या तो वे भाजपा का दामन थाम लें या फिर कानूनी कार्रवाई और जेल का सामना करने के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं को भी विभिन्न मामलों में जेल भेजा गया है और इसी कारण उन्हें लगता है कि पश्चिम बंगाल को एक तरह से "जेल" में बदल दिया गया है।
TMC नेताओं को धमकाए जाने का लगाया आरोप
फेसबुक लाइव के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी के सांसदों और विधायकों के खिलाफ लगातार दबाव की राजनीति की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों और पुलिस का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन विरोधी दलों के निर्वाचित प्रतिनिधियों पर इस तरह का दबाव लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि हजारों तृणमूल कार्यकर्ताओं को विभिन्न मामलों में जेल भेजा गया है।
छात्र आंदोलनों को लेकर भी सरकार पर सवाल
ममता बनर्जी ने हाल के छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवाओं के साथ कठोर व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन करने वाले छात्रों को राष्ट्रविरोधी बताने की कोशिश की गई और उनके परिवारों पर भी दबाव बनाया गया।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं को अपनी बात रखने का अधिकार है और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। विरोध प्रदर्शन को अपराध की तरह पेश करना उचित नहीं है।
जनगणना प्रक्रिया पर जताई आपत्ति
टीएमसी प्रमुख ने जनगणना प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों को विश्वास में लिए बिना जिस तरह से जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, उससे निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उनका कहना था कि इतनी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के संदेह की स्थिति पैदा न हो।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सम्मान का मुद्दा उठाया
ममता बनर्जी ने भाजपा पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विरासत का सम्मान नहीं करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि हाल के कुछ राजनीतिक बयानों से नेताजी के योगदान को लेकर अनुचित टिप्पणियां सामने आई हैं, जो केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि पूरे देश की भावनाओं को आहत करती हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नेताजी के सम्मान और उनकी विरासत की रक्षा के लिए एकजुट रहें। ममता ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी का योगदान देश के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है और उनका सम्मान हर परिस्थिति में बना रहना चाहिए।
समिक भट्टाचार्य के बयान पर बढ़ा विवाद
दरअसल, यह विवाद भाजपा के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के हालिया बयान के बाद सामने आया। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्थापित फॉरवर्ड ब्लॉक का उल्लेख करते हुए, श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ उनके वैचारिक मतभेदों के संदर्भ में पार्टी के कुछ सदस्यों को लेकर टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद विपक्षी दलों और नेताजी के परिवार के कुछ सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे अपमानजनक बताया।
हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी का उद्देश्य नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अनादर करना नहीं था। भाजपा का कहना है कि यह केवल ऐतिहासिक और राजनीतिक मतभेदों के संदर्भ में की गई टिप्पणी थी, जिसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि नेताजी के प्रति उसका सम्मान पहले की तरह कायम है और इस विवाद को उनकी विरासत पर हमला बताना उचित नहीं है।













