कोलकाता के लेक टाउन इलाके में स्थापित अर्जेंटीना के फुटबॉल स्टार लियोनेल मेस्सी की 70 फुट ऊंची भव्य प्रतिमा को सोमवार को हटा दिया गया। यह कदम सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया, क्योंकि हाल ही में आए तेज तूफानों के चलते इस विशाल संरचना की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे। अधिकारियों के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीम ने प्रतिमा को बेहद सावधानी से उसके आधार से अलग किया और हाइड्रोलिक क्रेन की मदद से सुरक्षित रूप से ट्रक पर लोड किया।
फिलहाल यह प्रतिमा पीडब्ल्यूडी की निगरानी में रखी गई है। इसे दोबारा स्थापित करने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक स्थान तय नहीं किया गया है, हालांकि चर्चा है कि राज्य प्रशासन इसे रवींद्र सरोवर या इको पार्क जैसे किसी प्रमुख स्थान पर फिर से स्थापित करने पर विचार कर सकता है। इस पर अंतिम निर्णय सरकार द्वारा लिया जाना बाकी है।
तूफानों के बाद बढ़ी अस्थिरता की आशंका
स्थानीय स्तर पर इस प्रतिमा को लेकर चिंता कुछ दिन पहले ही शुरू हो गई थी, जब तेज हवाओं और बारिश के दौरान लेक टाउन क्षेत्र के लोगों ने देखा कि विशाल संरचना में हल्की हलचल हो रही है। इसके बाद स्थानीय निवासियों ने लेक टाउन पुलिस स्टेशन को इसकी सूचना दी।
पुलिस और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच के दौरान ठेकेदार की टीम ने भी माना कि प्रतिमा के बेस स्ट्रक्चर में तकनीकी खामी हो सकती है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती, तो यह भारी-भरकम ढांचा किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था।
#WATCH | Kolkata, West Bengal | Lionel Messi statue at VIP road in Lake Town removed after locals complained that the statue was swaying due to the wind. pic.twitter.com/Jyhj0Qya4u
— ANI (@ANI) June 1, 2026
दिसंबर में हुआ था भव्य अनावरण, अब उठे सवाल
इस प्रतिमा का अनावरण पिछले वर्ष दिसंबर में किया गया था, जब लियोनेल मेस्सी अपनी कोलकाता यात्रा पर आए थे। उस समय इसे शहर के लिए एक प्रतिष्ठित आकर्षण और खेल प्रेम के प्रतीक के रूप में पेश किया गया था।
इस परियोजना की देखरेख उस समय राज्य के पूर्व मंत्री सुजीत बोस ने की थी। हालांकि, बाद में उनका नाम नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़े मामलों में सामने आया और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
अब मात्र छह महीने के भीतर ही इस विशाल प्रतिमा को हटाए जाने के बाद इसकी गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।













