न्यूज़
CJP Yogi Adityanath Jyotish Narendra Modi Rahul Gandhi

बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक बढ़त के पीछे 5 बड़े कारण, ममता के गढ़ में कैसे टूटा टीएमसी का किला

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी बढ़त ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। 190 से अधिक सीटों पर आगे चल रही भाजपा ने ममता बनर्जी के गढ़ में गहरी सेंध लगाई है, जबकि टीएमसी 100 सीटों से नीचे सिमटती दिख रही है। हिंदू वोटों का एकजुट होना, एंटी-इंकम्बेंसी, मोदी-शाह फैक्टर, विपक्ष का बिखराव और बदलाव की जनता की चाह इस ऐतिहासिक बढ़त के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 04 May 2026 2:03:46

बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक बढ़त के पीछे 5 बड़े कारण, ममता के गढ़ में कैसे टूटा टीएमसी का किला

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता की ओर मजबूती से बढ़ती नजर आ रही है। दोपहर तक के चुनावी रुझानों में पार्टी 190 से अधिक सीटों पर आगे चल रही है, जबकि 15 साल से सत्ता संभाल रही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का प्रदर्शन 100 सीटों से नीचे सिमटता दिखाई दे रहा है। हालांकि अंतिम नतीजों के लिए शाम या रात तक इंतजार करना होगा, लेकिन मौजूदा संकेत साफ बताते हैं कि बंगाल की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर हुआ है। 2021 में जहां भाजपा 77 सीटों तक पहुंच पाई थी, वहीं इस बार उसने सीधे ममता बनर्जी के मजबूत गढ़ में गहरी सेंध लगा दी है। इस अप्रत्याशित बढ़त के पीछे कई अहम वजहें मानी जा रही हैं।

1. हिंदू वोटों का एकजुट होना बना सबसे बड़ा फैक्टर

पश्चिम बंगाल में लगभग 27 से 32 प्रतिशत मुस्लिम आबादी मानी जाती है, जिसके कारण लंबे समय से राजनीतिक समीकरण टीएमसी के पक्ष में झुके रहते थे। पिछले डेढ़ दशक में मुस्लिम वोट बैंक, महिलाओं और युवाओं के एक हिस्से के समर्थन ने ममता बनर्जी की स्थिति मजबूत बनाए रखी।

लेकिन इस बार तस्वीर बदलती दिखी। भाजपा ने हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने में बड़ी सफलता हासिल की। घुसपैठ, सीमाई सुरक्षा, बांग्लादेशी प्रवासन और SIR जैसे मुद्दों को उठाकर पार्टी ने एक मजबूत नैरेटिव तैयार किया, जिसका असर वोटिंग पैटर्न पर साफ दिखा।

2. लंबी सत्ता के बाद एंटी-इंकम्बेंसी की लहर

2011 से लगातार सत्ता में रहने के कारण टीएमसी को इस बार स्वाभाविक रूप से एंटी-इंकम्बेंसी का सामना करना पड़ा। 2016 और 2021 की जीत के बाद भी जमीनी स्तर पर असंतोष धीरे-धीरे बढ़ता गया था।

स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप, “कट मनी” संस्कृति, प्रशासनिक असंतुलन और नेताओं पर लगे गंभीर आरोपों ने जनता के बीच नाराजगी को और गहरा किया। लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद उत्पन्न होने वाली यही थकान इस चुनाव में टीएमसी के खिलाफ बड़ी चुनौती बन गई।

3. मोदी-शाह फैक्टर और मजबूत चुनावी रणनीति

भाजपा की इस जीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति ने निर्णायक भूमिका निभाई। पिछले एक दशक में मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने कई राज्यों में सत्ता हासिल की है, जिससे पार्टी का राष्ट्रीय प्रभाव लगातार बढ़ा है।

वहीं, अमित शाह ने बंगाल में लंबा प्रवास करते हुए जमीनी स्तर पर चुनावी रणनीति तैयार की। बूथ मैनेजमेंट से लेकर संगठनात्मक मजबूती तक, उनकी रणनीति का असर परिणामों में साफ दिखाई दिया। यह संयोजन भाजपा के लिए गेमचेंजर साबित हुआ।

4. विपक्ष की बिखरी हुई एकता

इस चुनाव में विपक्षी दलों के बीच तालमेल की कमी भी भाजपा के पक्ष में गई। कांग्रेस ने मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में उल्लेखनीय वोट हासिल किए, जिससे कई सीटों पर टीएमसी के वोटों का बंटवारा हो गया।

टीएमसी और कांग्रेस के बीच गठबंधन न होना भी बड़ा नुकसान साबित हुआ। राहुल गांधी द्वारा चुनावी रैलियों में टीएमसी पर किए गए हमलों ने विपक्षी वोट बैंक को और विभाजित किया। कई सीटों पर सीधा लाभ भाजपा को मिला क्योंकि विरोधी वोट एकजुट नहीं रह सके।

5. बदलाव की उम्मीद और नई राजनीतिक आकांक्षा

पश्चिम बंगाल में पिछले 70 वर्षों में सत्ता कांग्रेस, वामपंथ और टीएमसी के बीच घूमती रही है, लेकिन भाजपा कभी मुख्य सत्ता में नहीं रही। इसी वजह से इस बार जनता के एक बड़े हिस्से ने “नए विकल्प” के रूप में भाजपा को मौका दिया।

पार्टी ने महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए कई बड़े वादे किए—महिलाओं के लिए मासिक आर्थिक सहायता, युवाओं के लिए रोजगार और किसानों के लिए बढ़ी हुई आय जैसी घोषणाओं ने भी मतदाताओं को आकर्षित किया। इन वादों ने बदलाव की चाह रखने वाले वोटरों के बीच भाजपा के प्रति विश्वास को मजबूत किया, जिसका सीधा असर नतीजों में दिखा।

राज्य
View More

Shorts see more

क्या लव बाइट जानलेवा हो सकता है? जानें कब बनता है यह गंभीर खतरा और किन उपायों से पा सकते हैं राहत

क्या लव बाइट जानलेवा हो सकता है? जानें कब बनता है यह गंभीर खतरा और किन उपायों से पा सकते हैं राहत

  • लव बाइट प्यार की निशानी है, लेकिन कभी-कभी खतरे की वजह भी बन सकती है।
  • एक छोटा सा निशान स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या से जुड़ा हो सकता है।
  • जानिए कब हिक्की सामान्य है और कब सतर्क होने की जरूरत है।
read more

ताजा खबरें
View More

PM मोदी ने एकतानगर में ₹400 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं का किया उद्घाटन, IRCTC होटल समेत कई सुविधाएं शुरू
PM मोदी ने एकतानगर में ₹400 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं का किया उद्घाटन, IRCTC होटल समेत कई सुविधाएं शुरू
विपक्ष की एकजुटता में कहां पड़ रही दरार? 1 नवंबर की रैली में शामिल नहीं होंगी ये पार्टियां
विपक्ष की एकजुटता में कहां पड़ रही दरार? 1 नवंबर की रैली में शामिल नहीं होंगी ये पार्टियां
कॉकरोच जनता पार्टी की दिवाली पार्टी में जुटेंगे विपक्षी नेता, दीपके और रांका की मौजूदगी पर भी नजर
कॉकरोच जनता पार्टी की दिवाली पार्टी में जुटेंगे विपक्षी नेता, दीपके और रांका की मौजूदगी पर भी नजर
‘कल मिलते हैं, साथ चलते हैं’, राहुल गांधी ने साझा किया रैली का रूट मैप
‘कल मिलते हैं, साथ चलते हैं’, राहुल गांधी ने साझा किया रैली का रूट मैप
‘CEC को जाना ही होगा, SIR पर रोक लगानी होगी’, नेहा बोरा ने रामलीला मैदान रैली से पहले किया बड़ा ऐलान
‘CEC को जाना ही होगा, SIR पर रोक लगानी होगी’, नेहा बोरा ने रामलीला मैदान रैली से पहले किया बड़ा ऐलान
दिल्ली : मंगोलपुरी में जूता फैक्ट्री में भीषण आग, 4 मजदूरों की मौत, 2 गंभीर
दिल्ली : मंगोलपुरी में जूता फैक्ट्री में भीषण आग, 4 मजदूरों की मौत, 2 गंभीर
सोना ₹12,300 और चांदी ₹48,000 सस्ती, अक्टूबर में Gold-Silver की कीमतों में बड़ी गिरावट
सोना ₹12,300 और चांदी ₹48,000 सस्ती, अक्टूबर में Gold-Silver की कीमतों में बड़ी गिरावट
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी घूमने का बना रहे हैं प्लान? जान लें टिकट का चार्ज, समय और पहुंचने का आसान रास्ता
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी घूमने का बना रहे हैं प्लान? जान लें टिकट का चार्ज, समय और पहुंचने का आसान रास्ता
शरीर में विटामिन D की कमी होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण, समय रहते ऐसे करें पहचान
शरीर में विटामिन D की कमी होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण, समय रहते ऐसे करें पहचान
इतिहास, समुद्र और एडवेंचर का संगम है इजरायल, घूमने के लिए ये 7 जगहें हैं खास
इतिहास, समुद्र और एडवेंचर का संगम है इजरायल, घूमने के लिए ये 7 जगहें हैं खास
हफ्ते में दो बार मछली खाने की सलाह क्यों देते हैं विशेषज्ञ? जानें कौन-सी मछली है बेहतर
हफ्ते में दो बार मछली खाने की सलाह क्यों देते हैं विशेषज्ञ? जानें कौन-सी मछली है बेहतर
अकेले सफर का है शौक तो इन बातों को न करें नजरअंदाज, सुरक्षित रहेगी आपकी यात्रा
अकेले सफर का है शौक तो इन बातों को न करें नजरअंदाज, सुरक्षित रहेगी आपकी यात्रा
खाते वक्त बार-बार दांतों के बीच आ रही है जीभ? शरीर में इन कमियों का हो सकता है संकेत
खाते वक्त बार-बार दांतों के बीच आ रही है जीभ? शरीर में इन कमियों का हो सकता है संकेत
कभी नीली तो कभी फिरोजी नजर आती है पैंगोंग झील, जानें इस खूबसूरत जगह की खासियत
कभी नीली तो कभी फिरोजी नजर आती है पैंगोंग झील, जानें इस खूबसूरत जगह की खासियत