
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर के एक उग्र बयान ने नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। बाबरी मस्जिद को फिर से बनाने की उनकी घोषणा के बाद, उन्होंने जिस तरह की चेतावनी दी, उससे प्रदेश की राजनीति में तनाव और बढ़ गया है।
भाजपा द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए एक वीडियो में दावा किया गया है कि भरतपुर क्षेत्र से विधायक कबीर ने खुलेआम कहा कि बाबरी मस्जिद के निर्माण को रोकने की कोशिश करने वालों को कड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक जोरदार प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
6 दिसंबर को नींव रखने की घोषणा
कुछ दिनों पहले ही कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने की घोषणा की थी। इंटरनेट पर वायरल वीडियो में वे यह कहते भी नजर आते हैं कि प्रदेश में मुस्लिम जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है—“अभी हम 37 प्रतिशत हैं, मस्जिद बनने तक 40 प्रतिशत हो जाएंगे।”
उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि उन्हें रोकने की कोशिश करने वालों को सोचना चाहिए कि वे पीछे नहीं हटेंगे। कबीर ने कहा—“अगर हममें से 100 लोग शहीद होंगे, तो सामने वाले के 500 लोगों को शहीद करना पड़ेगा।” बांग्लादेश की सीमा से लगे मुर्शिदाबाद जिले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां मुस्लिम आबादी 70 प्रतिशत है, इसलिए विरोध करने वालों को परिणामों का सामना करना पड़ेगा।
“यह अयोध्या नहीं, मुर्शिदाबाद है”
हुमायूं कबीर ने अपने भाषण में मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के उस बयान का भी संदर्भ लिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि बाबरी मस्जिद के निर्माण पर वे एक-एक ईंट उखाड़ देंगी। इस पर कटाक्ष करते हुए कबीर ने कहा—“यह अयोध्या नहीं है, यह मुर्शिदाबाद है।”
भाजपा का पलटवार — “रगों में बह रहा है बाबर का खून”
कबीर की धमकी भरी टिप्पणी के बाद भाजपा ने उन पर तीखा हमला बोला। बंगाल भाजपा ने वीडियो साझा करते हुए कहा कि TMC का असली चेहरा इसी तरह के बयानों से उजागर होता है।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने आरोप लगाया—“लगता है कबीर की रगों में बाबर का खून बह रहा है, इसलिए वह बाबरी मस्जिद को पुनर्निर्माण की बात करते हैं।”
भाजपा नेता रूपा गांगुली ने भी उनका कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि कबीर की टिप्पणी किसी साधारण राजनीतिक बयान से कहीं अधिक है—यह बंगाल की बढ़ती तुष्टीकरण राजनीति की खतरनाक मिसाल है।
यह पहली बार नहीं है जब हुमायूं कबीर किसी भड़काऊ टिप्पणी को लेकर सुर्खियों में आए हों। उनके पिछले बयानों ने भी कई बार विवाद खड़ा किया है, लेकिन इस बार मामला और ज्यादा संवेदनशील और राजनीतिक रूप से गंभीर होता दिख रहा है।














