पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की कई संपत्तियां अब जांच के घेरे में आ गई हैं। खबरों के मुताबिक कोलकाता नगर निगम यानी KMC ने उनकी और उनसे जुड़े लोगों की एक दर्जन से अधिक संपत्तियों को लेकर नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिसों में कथित अवैध निर्माण से जुड़े दस्तावेज और निर्माण संबंधी जानकारी मांगी गई है। हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं, क्योंकि हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी सरकारी अधिकारियों को तृणमूल नेताओं की संपत्तियों की जानकारी जुटाने के निर्देश देने की बात कही थी। ऐसे में अभिषेक बनर्जी से जुड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई की अटकलों ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, KMC ने अभिषेक बनर्जी से जुड़ी कुल 17 संपत्तियों को लेकर नोटिस भेजे हैं। बताया जा रहा है कि इन संपत्तियों में निर्माण नियमों के उल्लंघन और बिना मंजूरी के बनाए गए हिस्सों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। नगर निगम ने इमारतों के नक्शे, निर्माण स्वीकृति से जुड़े कागजात और लिफ्ट या एस्केलेटर जैसी सुविधाओं का पूरा ब्यौरा मांगा है। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित पक्षों के पास इन नोटिसों को कानूनी रूप से चुनौती देने का अधिकार भी मौजूद है।
सूत्रों के मुताबिक नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोलकाता नगर निगम अधिनियम 1980 की धारा 400(1) के तहत जिन हिस्सों का निर्माण बिना अनुमति या नियमों के विपरीत हुआ है, उन्हें सात दिनों के भीतर हटाया जाए। यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो निगम आगे की कार्रवाई कर सकता है। बताया जा रहा है कि इसी प्रकार के नोटिस सभी 17 संपत्तियों के लिए जारी किए गए हैं।
हालांकि KMC के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी ढांचे के तहत की जाती है और मकान मालिकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है। यदि किसी निर्माण को अवैध माना जाता है, तो संबंधित व्यक्ति निगम के समक्ष पेश होकर अपने दस्तावेज और तर्क प्रस्तुत कर सकता है। इन मामलों की सुनवाई कोलकाता नगर निगम मुख्यालय में विशेष अधिकारी के सामने होती है, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाती हैं।
नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि सुनवाई के बाद स्पेशल ऑफिसर के पास दो विकल्प होते हैं। पहला, बिना अनुमति के बने हिस्सों को गिराने का आदेश देना और दूसरा, यदि मामला तकनीकी तौर पर नियमित किया जा सकता हो तो भारी जुर्माना लगाकर उसे वैध घोषित करना। यानी अंतिम फैसला सुनवाई और दस्तावेजों की जांच के बाद ही लिया जाएगा।
जिन संपत्तियों को लेकर नोटिस जारी हुए हैं, उनमें ज्यादातर आवासीय भवन बताए जा रहे हैं। ये संपत्तियां कालीघाट, गरियाहाट, पंडिटिया और आसपास के कुछ प्रमुख इलाकों में स्थित हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ प्रॉपर्टीज सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी के नाम पर हैं, जबकि कुछ उनके करीबी सहयोगियों या उनसे जुड़ी कंपनियों के स्वामित्व में बताई जा रही हैं। इसके अलावा कुछ बड़े अपार्टमेंट्स के फ्लैट्स का संबंध भी अभिषेक या उनके नजदीकी लोगों से जोड़ा जा रहा है।
फिलहाल इस पूरे मामले ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष इसे भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन से जोड़कर देख रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नोटिसों पर क्या जवाब दिया जाता है और क्या मामला केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित रहता है या फिर राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन जाता है।














