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चुनावी रैलियों में अमित शाह को धमकी, अब अभिषेक बनर्जी पर बंगाल में FIR दर्ज

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा विवाद सामने आया है। TMC नेता अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनावी रैलियों में कथित भड़काऊ और धमकी भरे बयान देने को लेकर FIR दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप है कि उनके भाषणों से सामाजिक तनाव फैलाने और सार्वजनिक शांति भंग करने की कोशिश हुई, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ टिप्पणी भी शामिल है। पुलिस ने डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच शुरू कर दी है। इस मामले ने राज्य की सियासत को और गर्मा दिया है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 16 May 2026 8:21:31

चुनावी रैलियों में अमित शाह को धमकी, अब अभिषेक बनर्जी पर बंगाल में FIR दर्ज

पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ विधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला 2026 विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान दिए गए कथित भड़काऊ बयानों से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायत दर्ज होने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

एफआईआर के अनुसार, यह शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता राजीव सरकार द्वारा दर्ज कराई गई थी। उन्होंने आरोप लगाया है कि 27 अप्रैल से 3 मई के बीच अभिषेक बनर्जी ने अपने चुनावी भाषणों और रैलियों में ऐसे बयान दिए जो समाज में तनाव और वैमनस्य फैलाने वाले थे। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन बयानों का उद्देश्य राजनीतिक माहौल को प्रभावित करना और सार्वजनिक शांति को नुकसान पहुंचाना था। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि भाषणों के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक और धमकी भरी टिप्पणियां की गई थीं।

राजीव सरकार ने अपने आरोपों के समर्थन में पुलिस को कई वीडियो लिंक और डिजिटल सबूत भी सौंपे हैं, जिनमें अभिषेक बनर्जी के भाषण रिकॉर्ड किए गए हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए आगे की जांच शुरू कर दी है। बागुईआटी थाने में प्रारंभिक शिकायत मिलने के बाद 15 मई को दोपहर 2:45 बजे इसे औपचारिक रूप से विधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया।

पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें धारा 192, 196, 351(2) और 353(1)(c) के साथ-साथ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123(2) और 125 शामिल हैं। आरोप है कि उनके भाषणों में उकसाने वाली, धमकीपूर्ण और भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह भी आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक मंचों से विपक्षी दलों और उनके कार्यकर्ताओं के खिलाफ आक्रामक भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सब-इंस्पेक्टर सोमनाथ सिंघा रॉय को सौंपी गई है, जिन्होंने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है।

इधर राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई के बाद माहौल और गर्म हो गया है। विपक्ष का कहना है कि चुनावी मंचों से दिए गए बयानों की जांच जरूरी है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश करार दे रही है। पहले भी राज्य की राजनीति में इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिल चुके हैं, लेकिन इस बार मामला सीधे हाई-प्रोफाइल नेता से जुड़ा होने के कारण चर्चा और तेज हो गई है।

इस बीच पार्टी के भीतर भी असंतोष की खबरें सामने आई हैं। चुनावी नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने नेतृत्व पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में कोहिनूर मजूमदार, रिजु दत्ता और कार्तिक घोष जैसे कई प्रवक्ताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निलंबित कर दिया गया है।

वहीं, सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आने के बाद टीएमसी नेता रिजु दत्ता ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है। अपने बयान में उन्होंने नवनियुक्त मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और अन्य भाजपा नेताओं से अपने पुराने बयानों के लिए क्षमा याचना की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव के बाद हिंसा के दौरान कई कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाया गया था और कुछ फैसले राजनीतिक परिस्थितियों के कारण लिए गए थे।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह नया विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि एफआईआर और जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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