पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के बाद राज्य की राजनीति में घमासान मच गया है। घटना के बाद TMC लगातार भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साध रही है और इसे सुनियोजित हमला बता रही है। पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस मामले को लेकर केंद्र और राज्य प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था पहले ही कमजोर कर दी गई थी, जिसके कारण यह घटना संभव हो सकी। उन्होंने यह भी दावा किया कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी कुछ लोगों द्वारा अभिषेक की चोटों को कमतर दिखाने और उन्हें भर्ती न किए जाने का दबाव बनाया गया। उनके अनुसार पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में है।
कुणाल घोष का दावा- हमलावर BJP से जुड़े थे
इसी बीच तृणमूल कांग्रेस सांसद और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हमला करने वाले लोग भाजपा से जुड़े कार्यकर्ता थे। उन्होंने कहा कि पार्टी के पास इस आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं और जल्द ही उन्हें सार्वजनिक किया जाएगा।
मीडिया से बातचीत में कुणाल घोष ने कहा कि घटना के बाद से पुलिस और प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। उनका आरोप है कि डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था ताकि अभिषेक की चोटों को गंभीर न बताया जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक हमला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी हमला है।
घोष ने कहा, "सोनारपुर में हुए हमले में अभिषेक बनर्जी घायल हुए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां भी कई तरह की परेशानियां सामने आईं। हमें जानकारी मिली कि चोटों को हल्का दिखाने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। पूरे देश में इस घटना की आलोचना हो रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस स्थान पर यह हमला हुआ, वहां पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं थी? न पुलिस दिखाई दी और न ही केंद्रीय बल।"
उन्होंने आगे कहा कि शुरुआत में डॉक्टरों ने अभिषेक को निगरानी में रखते हुए ICU में ले जाया था, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदल गईं। कुणाल घोष का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन को बाहरी दबाव का सामना करना पड़ा, जिसके बाद भर्ती को लेकर अलग रुख अपनाया गया।
अस्पताल की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
जहां तृणमूल कांग्रेस इस हमले को गंभीर बताते हुए लगातार सवाल उठा रही है, वहीं अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल अपडेट में अपेक्षाकृत अलग तस्वीर सामने आई है। कोलकाता के बेलव्यू अस्पताल द्वारा जारी बयान में कहा गया कि मरीज की जांच के दौरान कोई गंभीर शारीरिक चोट नहीं पाई गई।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार अभिषेक बनर्जी की छाती पर कुछ मामूली चोटों के निशान जरूर मिले, लेकिन उनकी स्थिति स्थिर थी। बयान में कहा गया कि मरीज पूरी तरह होश में हैं, सामान्य रूप से बातचीत कर रहे हैं और किसी गंभीर चिकित्सकीय खतरे में नहीं हैं। इसी कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती रखने की आवश्यकता नहीं समझी गई।
सोनारपुर में क्या हुआ था?
शनिवार को अभिषेक बनर्जी दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर क्षेत्र में चुनाव बाद हिंसा में मारे गए एक तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने उनके काफिले का विरोध शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विरोध के दौरान अंडे, पत्थर और अन्य वस्तुएं भी फेंकी गईं।
स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब भीड़ और सुरक्षा कर्मियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इस अफरा-तफरी में अभिषेक बनर्जी की शर्ट फट गई और उनका चश्मा भी टूट गया। कुछ लोगों द्वारा उनके साथ हाथापाई की कोशिश किए जाने की भी खबरें सामने आईं।
हालांकि, विरोध और हमले के बावजूद अभिषेक बनर्जी अपने कार्यक्रम से पीछे नहीं हटे। वह निर्धारित कार्यक्रम के तहत मृतक कार्यकर्ता के घर पहुंचे और वहां परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य की मौजूदा कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जाहिर की।
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उन्हें चिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया। बाद में पूर्व मुख्यमंत्री और TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी भी अस्पताल पहुंचीं और अभिषेक का हालचाल जाना। इसके बाद से यह मामला राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है और दोनों प्रमुख दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार जारी है।














