
चंपावत जिले के टनकपुर में रविवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया, जिसने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया। डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम इंजीनियरिंग कॉलेज में निर्माणाधीन गर्ल्स हॉस्टल के सेप्टिक टैंक में जहरीली गैस की चपेट में आकर एक साइट इंजीनियर और कारपेंटर की मौत हो गई। घटना से निर्माण स्थल पर हड़कंप मच गया और मृतकों के परिजनों में कोहराम मच गया।
हादसा कैसे हुआ
जानकारी के अनुसार, रामपुर की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी कॉलेज परिसर में गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण कार्य कर रही है। रविवार को कंपनी के साइट इंजीनियर शिवराज चौहान (28) और कारपेंटर हसन टैंक की शटरिंग तोड़ने के बाद दूसरे चेंबर में उतरे थे। वहां जहरीली गैस के कारण दोनों बेहोश हो गए और बाहर नहीं निकल पाए। जब काफी देर तक दोनों बाहर नहीं लौटे तो अन्य कर्मचारियों ने टैंक में झाँककर देखा, जहाँ दोनों मूर्छित अवस्था में पड़े थे।
पुलिस और SDRF का रेस्क्यू अभियान
साथी कर्मचारियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। कोतवाल चेतन रावत के नेतृत्व में पुलिस और SDRF की टीम मौके पर पहुँची और काफी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला। उन्हें टनकपुर के उप जिला चिकित्सालय पहुँचाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। पुलिस क्षेत्राधिकारी वंदना वर्मा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मृतकों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है।
पांच महीने बाद खोले गए टैंक
साइट पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने बताया कि गर्ल्स हॉस्टल के तीन सेप्टिक टैंक पिछले पाँच महीनों से बारिश की वजह से नहीं खोले गए थे। रविवार को टैंक की शटरिंग खोली गई और इसी दौरान यह हादसा हो गया।
मृतकों की पहचान और पारिवारिक स्थिति
मृतक इंजीनियर शिवराज चौहान अल्मोड़ा जिले के ग्राम चगेटी (तहसील भनोली) के रहने वाले थे और वर्तमान में टनकपुर के घसियारा मंडी में रह रहे थे। वे तीन बहनों के इकलौते भाई और अविवाहित थे। कारपेंटर हसन पीलीभीत (उत्तर प्रदेश) जिले के नौगंवा बिसलपुर के रहने वाले थे। वे भी अविवाहित थे और तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। दोनों की मौत की खबर से उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
प्रशासन और सुरक्षा सवालों के घेरे में
यह हादसा निर्माण स्थलों पर सुरक्षा प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। सेप्टिक टैंकों और सीवर जैसी जगहों में जहरीली गैस का खतरा हमेशा बना रहता है, ऐसे में बिना उचित सुरक्षा उपकरण और गाइडलाइन के किसी को भी ऐसे टैंकों में उतरना जानलेवा हो सकता है। हादसे के बाद स्थानीय लोगों और कर्मचारियों में निर्माण कंपनी की लापरवाही को लेकर नाराज़गी देखी जा रही है।
टनकपुर की यह घटना न केवल दो परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति लेकर आई है बल्कि यह चेतावनी भी देती है कि निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी किस तरह से बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।














