
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंचता जा रहा है। बीते लगभग सात दिनों से दून की हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी हुई है, जिससे आमजन के साथ-साथ स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता भी बढ़ गई है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार 300 के आसपास दर्ज किया जा रहा है, जो स्वास्थ्य मानकों के लिहाज से गंभीर खतरे की श्रेणी में आता है। खासतौर पर दमा, अस्थमा और अन्य श्वसन रोगों से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक मानी जा रही है, जबकि स्वस्थ व्यक्तियों पर भी लंबे समय तक इसके दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि देहरादून की हवा अब दिल्ली से भी अधिक प्रदूषित हो चुकी है।
शुक्रवार को पूरे दिन देहरादून का एक्यूआइ 280 के आसपास बना रहा। हालांकि, 24 घंटे का औसत एक्यूआइ 255 दर्ज किया गया, जबकि इसी अवधि में दिल्ली का औसत एक्यूआइ 236 रहा। आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं कि दून की आबोहवा राष्ट्रीय राजधानी से भी बदतर स्थिति में पहुंच गई है। पिछले एक सप्ताह के दौरान दून का औसत एक्यूआइ कई बार 300 के पार गया है, जो बेहद खराब वायु गुणवत्ता का संकेत देता है।
इस दौरान प्रदूषण फैलाने वाले कणों का स्तर भी चिंताजनक रहा है। पीएम 10 और पीएम 2.5 की मात्रा सामान्य मानकों से कई गुना अधिक पाई गई है। विशेष रूप से पीएम 2.5 का स्तर 120 से 150 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के बीच बना हुआ है, जो फेफड़ों और हृदय पर गहरा असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पीएम 2.5 के सूक्ष्म कण सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सीधे रक्त प्रवाह तक पहुंच सकते हैं, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती वाहन संख्या, लगातार हो रहे निर्माण कार्य, ठंड के मौसम में तापमान में गिरावट और हवा की गति कम होने जैसे कारणों से प्रदूषक तत्व वातावरण में फंस रहे हैं। यही वजह है कि अब देहरादून भी दिल्ली और अन्य बड़े महानगरों की तरह प्रदूषण की चपेट में आता जा रहा है। डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। सुबह-शाम घर से बाहर निकलने से बचने, मास्क का प्रयोग करने और घरों में वायु शुद्धिकरण के उपाय अपनाने पर जोर दिया गया है।
प्रशासन और विशेषज्ञों की ओर से आम नागरिकों से भी अपील की जा रही है कि वे अनावश्यक रूप से निजी वाहनों का उपयोग न करें और प्रदूषण कम करने में सहयोग करें। उल्लेखनीय है कि देहरादून में दर्ज किए गए एक्यूआइ के ये आंकड़े दून विश्वविद्यालय क्षेत्र के हैं, जो शहर का बाहरी इलाका माना जाता है। ऐसे में घंटाघर, प्रिंस चौक और अन्य व्यस्त इलाकों में वायु गुणवत्ता की स्थिति और भी खराब होने की आशंका जताई जा रही है।
देहरादून में औसत एक्यूआइ की स्थिति
2 जनवरी – 255
1 जनवरी – 306
31 दिसंबर – 328
30 दिसंबर – 318
29 दिसंबर – 295
28 दिसंबर – 301













