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राम मंदिर प्रबंधन में बदलाव के संकेत, आलोक कुमार बोले- इस्कॉन और अक्षरधाम जैसी व्यवस्था पर हो सकता है विचार

राम मंदिर में कथित दान विवाद के बीच VHP अध्यक्ष आलोक कुमार ने पारदर्शी और पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था की वकालत की। उन्होंने इस्कॉन, अक्षरधाम जैसे मॉडल का उदाहरण देते हुए मजबूत प्रबंधन और निष्पक्ष जांच पर जोर दिया।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 27 Jun 2026 9:01:59

राम मंदिर प्रबंधन में बदलाव के संकेत, आलोक कुमार बोले- इस्कॉन और अक्षरधाम जैसी व्यवस्था पर हो सकता है विचार

अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे के कथित गबन को लेकर उठे विवाद के बीच विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि केवल जांच ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मंदिर प्रशासन में ऐसी मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की संभावना समाप्त हो सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि श्रद्धालुओं द्वारा भगवान के चरणों में अर्पित किए गए दान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

NDTV से बातचीत के दौरान आलोक कुमार ने कहा कि इस समय सबसे जरूरी बात यह है कि दर्ज की गई एफआईआर की निष्पक्ष, पारदर्शी और शीघ्र जांच पूरी हो। यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोषियों को सजा मिलने से ही श्रद्धालुओं का विश्वास पूरी तरह बहाल हो सकेगा।

मंदिर प्रबंधन में सुधार की जरूरत, सरकारी नियंत्रण समाधान नहीं

राम मंदिर के संचालन को लेकर आलोक कुमार ने कहा कि मंदिरों के सरकारी प्रबंधन के अनुभव उत्साहजनक नहीं रहे हैं। उनके अनुसार समाधान प्रबंधन को बदलने में नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और पारदर्शी बनाने में है। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रणाली तैयार की जानी चाहिए जिसमें किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या वित्तीय अनियमितता की गुंजाइश न रहे।

उन्होंने निजी धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित प्रमुख मंदिरों का उदाहरण देते हुए कहा कि बीएपीएस (BAPS), इस्कॉन और दिल्ली के झंडेवालान मंदिर जैसी संस्थाओं ने आधुनिक और सुव्यवस्थित प्रशासन का सफल मॉडल प्रस्तुत किया है। उनके मुताबिक इन संस्थानों से प्रेरणा लेकर राम मंदिर के संचालन को भी और अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है।

पेशेवर प्रशासनिक ढांचे पर दिया जोर

वीएचपी अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मंदिर के संचालन के लिए एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने पर विचार करना चाहिए। इसके साथ ही जिम्मेदारियों का उचित विकेंद्रीकरण किया जाए और दैनिक प्रशासन के लिए एक पेशेवर प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाए। उनका मानना है कि इससे कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ेगी।

जब उनसे ट्रस्ट में खाली पदों को भरने के संबंध में सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। ट्रस्ट डीड के अनुसार रिक्त पदों पर नियुक्ति का अधिकार केवल ट्रस्टियों के पास है और इस संबंध में अंतिम फैसला वही करेंगे।

दान की राशि का हो पारदर्शी हिसाब-किताब

आलोक कुमार ने कहा कि मंदिर प्रशासन में आधुनिक तकनीक, स्पष्ट कार्यप्रणाली और मजबूत निगरानी व्यवस्था को शामिल किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई प्रत्येक राशि का पूरी पारदर्शिता के साथ लेखा-जोखा रखा जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की शंका या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन, आधुनिक उपकरणों का उपयोग और प्रभावी निगरानी प्रणाली मंदिर प्रशासन को और अधिक विश्वसनीय बना सकती है। इससे न केवल दान की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

दोषियों पर कार्रवाई से ही लौटेगा श्रद्धालुओं का भरोसा

वीएचपी अध्यक्ष ने कहा कि भगवान राम और उनके भक्तों के बीच आस्था का रिश्ता बेहद मजबूत और अटूट है। किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता इस संबंध को प्रभावित नहीं कर सकती। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार हुआ है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सभी जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए और दोषियों को जेल भेजा जाना चाहिए। उनका मानना है कि यही कदम श्रद्धालुओं का भरोसा दोबारा मजबूत करेगा।

उन्होंने समाजवादी पार्टी की उस टिप्पणी को भी खारिज कर दिया, जिसमें प्रभावशाली लोगों को बचाने के आरोप लगाए गए थे। आलोक कुमार ने कहा कि इस तरह के आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है और पुलिस निष्पक्ष तरीके से सभी पहलुओं की जांच करेगी। उनके अनुसार कानून के सामने सभी समान हैं और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

राजनीतिक बयानबाजी पर भी दी प्रतिक्रिया

आलोक कुमार ने कहा कि मंदिर से जुड़े इस विवाद के आधार पर भगवान राम के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि संभव है कि कुछ लोग अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन करने में विफल रहे हों, लेकिन इससे भगवान राम और उनके भक्तों के बीच का आध्यात्मिक संबंध कमजोर नहीं हो सकता।

उन्होंने इस पूरे विवाद को लेकर हो रही राजनीतिक बयानबाजी पर भी प्रतिक्रिया दी। समाजवादी पार्टी के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे बयान आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर दिए जा रहे हैं। उनके अनुसार कुछ राजनीतिक दल लगातार राम मंदिर के मुद्दे पर राजनीति करते रहे हैं, इसलिए वह ऐसे बयानों को अधिक महत्व नहीं देते। उन्होंने दोहराया कि फिलहाल सबसे अहम बात निष्पक्ष जांच, पारदर्शी प्रशासन और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

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