अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों को फिलहाल जेल से राहत नहीं मिली है। सोमवार को एंटी करप्शन कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उनकी पेशी कराते हुए सभी की न्यायिक हिरासत 10 अगस्त तक बढ़ाने का आदेश दिया। इससे पहले पुलिस सभी आरोपियों को अलग-अलग चरणों में कस्टडी रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ कर चुकी है।
रिमांड के दौरान पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर तीन कारें, एक मोटरसाइकिल, नकदी और आभूषण बरामद किए। जांच टीम उन्हें विभिन्न स्थानों पर भी लेकर गई, जहां उनसे गहन पूछताछ की गई। जांच के क्रम में पुलिस ने कथित चोरी की पूरी घटना को दोबारा घटनास्थल पर रिक्रिएट भी कराया, ताकि मामले से जुड़े हर पहलू की पुष्टि की जा सके।
एसआईटी रिपोर्ट के बाद हुई थी आठों आरोपियों की गिरफ्तारी
मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी पहली रिपोर्ट शासन को सौंपने के बाद एफआईआर दर्ज की थी। इसके आधार पर अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, रमाशंकर मिश्रा, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और मनीष यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
अदालत की अनुमति के बाद शुरुआत में जेल के भीतर ही आरोपियों से पूछताछ की गई। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में उन्हें पुलिस रिमांड पर लेकर कई दौर की पूछताछ हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण जानकारियां जांच एजेंसियों के हाथ लगीं।
चोरी गई पूरी रकम का पता लगाना अब भी सबसे बड़ी चुनौती
जांच अब काफी आगे बढ़ चुकी है, लेकिन पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब भी चढ़ावे से चोरी हुई कुल राशि का सही आकलन करना है। इसी उद्देश्य से जांच टीम आरोपियों के मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का बारीकी से विश्लेषण कर रही है।
इन तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों से पूछताछ भी की है। जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि आरोपियों ने कथित रूप से शेयर बाजार में निवेश किया और कुछ लोगों को ब्याज पर धन भी दिया था। फिलहाल पुलिस इन सभी तथ्यों और वित्तीय लेनदेन का सत्यापन कर रही है ताकि पूरे मामले की आर्थिक परतें स्पष्ट हो सकें।
सुभाष श्रीवास्तव को पेंशन निकालने की मिली अंतरिम राहत
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के आरोपी सुभाष श्रीवास्तव को अदालत से आंशिक राहत मिली है। एंटी करप्शन कोर्ट के न्यायाधीश रजत वर्मा ने उनके आवेदन पर सुनवाई के बाद आदेश दिया कि वह 26 जून के बाद उनके खाते में जमा हुई पेंशन की राशि निकाल सकते हैं।
हालांकि, इससे पहले खाते में मौजूद धनराशि को लेकर अदालत ने फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। इस संबंध में बचाव पक्ष की आपत्तियों पर सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तारीख तय की गई है।
इस आदेश के बाद सुभाष अपने खाते में जुलाई के दौरान जमा हुई जून माह की पेंशन निकाल सकेंगे। इससे पहले उन्होंने अपने अधिवक्ता कुलशेखर सिंह के माध्यम से बैंक खाता संचालित करने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। जांच अधिकारी ने भी अपनी रिपोर्ट में 25 जून के बाद खाते में जमा हुई राशि को अनफ्रीज करने पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की थी।
30 जुलाई को होगी 30 हजार रुपये के लेनदेन पर सुनवाई
सुभाष श्रीवास्तव के अधिवक्ता कुलशेखर सिंह ने बताया कि अदालत ने फिलहाल अंतरिम राहत प्रदान की है। उन्होंने कहा कि 26 जून के बाद खाते में आई पेंशन की राशि निकाली जा सकती है, जबकि उससे पहले की रकम को लेकर 30 जुलाई को विस्तृत सुनवाई होगी।
उन्होंने बताया कि अगली सुनवाई में 30 हजार रुपये के एक संदिग्ध लेनदेन का पूरा विवरण अदालत के समक्ष रखा जाएगा। बचाव पक्ष के अनुसार, यह राशि हाईकोर्ट में लंबित एक मुकदमे की फीस देने के उद्देश्य से निकाली गई थी, लेकिन संबंधित वकील से मुलाकात नहीं हो पाने के कारण वही रकम दोबारा बैंक खाते में जमा कर दी गई। करीब एक महीने बाद अगली पेशी के समय उसी राशि को फिर से निकाला गया। जांच एजेंसी ने इसी लेनदेन को संदिग्ध माना है, जिसका स्पष्टीकरण अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा।
बचाव पक्ष मांगेगा चोरी गई कुल रकम का पूरा ब्योरा
डिफेंस काउंसिल कुलशेखर सिंह ने बताया कि अगली सुनवाई के दौरान विवेचक से यह जानकारी भी मांगी जाएगी कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब तक कुल कितनी राशि गायब मानी गई है। उन्होंने कहा कि लिखित आवेदन के माध्यम से यह भी पूछा जाएगा कि किस आधार पर विभिन्न बैंक खातों को सीज किया गया और कितनी रकम की बरामदगी दिखाई गई है।
बचाव पक्ष का कहना है कि जांच एजेंसी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि चोरी की कुल राशि कितनी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बरामदगी तथा खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया किस आधार पर अपनाई गई। इस संबंध में अदालत के समक्ष विस्तृत प्रार्थना पत्र दाखिल किया जाएगा।













