उत्तर प्रदेश में वर्षा ऋतु के आगमन से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जनता को संबोधित करते हुए एक विशेष पाती जारी की है। इस संदेश के माध्यम से उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने, जैविक खेती को अपनाने, संक्रामक बीमारियों से बचाव और स्वच्छता बनाए रखने सहित पांच महत्वपूर्ण अपीलें की हैं। मुख्यमंत्री ने बरसात के मौसम में होने वाली प्राकृतिक घटनाओं को लेकर भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष आकाशीय बिजली गिरने और जलाशयों में डूबने जैसी घटनाओं में कई लोगों की जान चली जाती है, इसलिए बारिश के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए और नदियों, तालाबों तथा अन्य जल स्रोतों के पास विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में लिखा कि प्रकृति में आने वाला प्रत्येक बदलाव जीवन को नई दिशा और नया संदेश देता है। उनके अनुसार वर्षा ऋतु केवल मौसम परिवर्तन नहीं, बल्कि नवसृजन, विकास और समृद्धि का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है और यहां के अन्नदाता किसानों का परिश्रम प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश की खाद्य सुरक्षा की नींव है। वर्षा की पहली बूंद किसानों के जीवन में नई ऊर्जा, नई उम्मीद और नए उत्साह का संचार करती है।
उन्होंने आगे कहा कि वर्षा ऋतु के साथ चातुर्मास का पवित्र काल भी आरंभ होता है। भारतीय परंपरा में चातुर्मास को आत्मसंयम, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और संतुलित जीवनशैली का प्रतीक माना जाता है। यह समय मनुष्य को प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने और अपने कर्तव्यों को समझने की प्रेरणा देता है।
प्रदेशवासियों से किए पांच महत्वपूर्ण आग्रह
मुख्यमंत्री ने अपनी पाती में वैदिक वाक्य “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह धरती हमारी माता है और हम उसके पुत्र हैं। ऐसे में वर्षा ऋतु का स्वागत करने के साथ-साथ हमें धरती और पर्यावरण के प्रति अपने दायित्वों का भी ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रदेश के लोगों से पांच विशेष आग्रह किए हैं।
पहले आग्रह में मुख्यमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को जनआंदोलन बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल एवं संरक्षण का संकल्प भी ले। उनके अनुसार वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की गारंटी भी है।
दूसरे आग्रह में उन्होंने जल संरक्षण पर विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि “जल है तो कल है” की भावना के साथ समाज के प्रत्येक व्यक्ति को तालाबों, पोखरों, अमृत सरोवरों, कुओं और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण में योगदान देना चाहिए। उन्होंने घरों, विद्यालयों, ग्राम पंचायतों और विभिन्न संस्थानों में वर्षा जल संचयन को जनभागीदारी का अभियान बनाने का आह्वान किया।
तीसरे बिंदु में मुख्यमंत्री ने जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का सबसे प्रभावी तरीका पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाना है। जैविक खेती से न केवल भूमि की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि परिवार और समाज के स्वास्थ्य को भी लाभ मिलता है। इससे कृषि व्यवस्था अधिक टिकाऊ और समृद्ध बनती है।
चौथे आग्रह में उन्होंने लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बरसात के मौसम में स्वच्छता बनाए रखना बेहद जरूरी है। जलजनित और संक्रामक रोगों से बचाव के लिए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए तथा स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करना चाहिए।
पांचवें और अंतिम आग्रह में उन्होंने कहा कि आसपास कहीं भी जलभराव न होने दें और कूड़े-कचरे का ढेर जमा न होने दें। उन्होंने विशेष रूप से नालियों में प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट पदार्थ न फेंकने की अपील की, ताकि जल निकासी व्यवस्था बाधित न हो और बारिश के दौरान किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।
मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों,
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 22, 2026
वर्षा ऋतु नवसृजन, संवर्धन और समृद्धि का आगमन है। वर्षा ऋतु के साथ चातुर्मास का यह पावन काल हमें प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व, संयम, संवेदनशीलता और संतुलित जीवन का संदेश देता है।
वर्षा के समय आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं भी होती हैं, अतः उस समय… pic.twitter.com/rivWcMpPWV
आकाशीय बिजली और जलाशयों से सतर्क रहने की सलाह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। ऐसे समय में लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और विशेषकर पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई बार अत्यधिक वर्षा के कारण नदियों, झीलों और अन्य जलाशयों का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में लोगों को स्नान करते समय या जल स्रोतों के आसपास जाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं, लेकिन किसी भी आपदा से बचाव में जनता की जागरूकता और सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सरकार के प्रयास तभी सफल होंगे जब जनता भी पूरी जिम्मेदारी और जागरूकता के साथ भागीदारी निभाए। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश के लोग प्रकृति संरक्षण, स्वच्छता और सुरक्षा से जुड़े इन संदेशों को अपनाकर उत्तर प्रदेश को और अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और समृद्ध बनाने में योगदान देंगे।














