ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया। महिला मुक्केबाज जैस्मिन लांबोरिया ने बीमारी से उबरने के बाद अविश्वसनीय वापसी करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनके साथ प्रीति पवार ने भी स्वर्ण पदक जीतकर भारत को दोहरी खुशी दी, जबकि जादूमणि सिंह ने पुरुष वर्ग में रजत पदक हासिल किया। इन तीन पदकों के साथ भारतीय मुक्केबाजी दल ने प्रतियोगिता में अपनी ताकत का एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया।
बीमारी को हराकर रचा इतिहास
करीब चालीस दिन पहले तक जैस्मिन लांबोरिया लगातार तेज बुखार और पेट से जुड़ी गंभीर समस्या के कारण अस्पताल में भर्ती थीं। उस समय उनके राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेने की संभावना भी बेहद कम दिखाई दे रही थी। बीमारी से ठीक होने के बाद उन्हें तैयारी के लिए केवल लगभग तीन सप्ताह का समय मिला, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सीमित अभ्यास के बावजूद उन्होंने अपनी फिटनेस और आत्मविश्वास को वापस हासिल किया और आखिरकार स्वर्ण पदक जीतकर सबसे प्रेरणादायक वापसी की कहानी लिख दी।
मौजूदा चैंपियन को हराकर जीता स्वर्ण
स्वर्ण पदक मुकाबले में जैस्मिन का सामना उत्तरी आयरलैंड की मौजूदा राष्ट्रमंडल चैंपियन मिकाएला वॉल्श से हुआ। मुकाबले का पहला दौर बेहद कांटे का रहा, लेकिन भारतीय मुक्केबाज ने शुरुआती बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद उन्होंने लगातार सटीक और प्रभावशाली पंच लगाए, जिससे प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बढ़ता गया। निर्णायकों ने शेष सभी दौरों में भी जैस्मिन के प्रदर्शन को बेहतर माना और उन्हें 5-0 के एकमत फैसले से विजेता घोषित किया।
संघर्ष और मेहनत का मिला बड़ा पुरस्कार
जैस्मिन की यह सफलता केवल एक स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी इच्छाशक्ति, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों से लड़ने की क्षमता का प्रमाण भी है। बीमारी से उबरने के बाद भारतीय मुक्केबाजी महासंघ, प्रशिक्षकों और खेल विज्ञान विशेषज्ञों ने उनकी तैयारी पर विशेष ध्यान दिया। इसी सुनियोजित तैयारी का परिणाम रहा कि वह कम समय में पूरी तरह प्रतियोगिता के लिए तैयार हो सकीं और सबसे बड़े मंच पर स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहीं।
प्रीति पवार ने दिखाया शानदार दबदबा
महिला 54 किलोग्राम वर्ग में विश्व वरीयता सूची की शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल प्रीति पवार ने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो के खिलाफ एकतरफा मुकाबला खेला। उन्होंने पहले ही दौर से मुकाबले पर पूरा नियंत्रण बनाए रखा और लगातार प्रभावी पंचों से प्रतिद्वंद्वी को बैकफुट पर धकेल दिया। दूसरे दौर में उनके तेज आक्रमण के कारण प्रतिद्वंद्वी को गिनती तक का सामना करना पड़ा। अंत में निर्णायकों ने 5-0 के एकमत फैसले से प्रीति को विजेता घोषित किया। इस जीत के साथ उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में अपना अजेय अभियान भी बरकरार रखा।
जादूमणि सिंह ने जीता रजत
पुरुष 55 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में भारत के जादूमणि सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के जाई डिक्सन के खिलाफ साहसिक प्रदर्शन किया। उन्होंने पहले दौर में शानदार मुक्केबाजी करते हुए बढ़त भी बनाई, लेकिन बाद के दौरों में ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज ने अपनी लंबाई और पहुंच का बेहतर उपयोग करते हुए मुकाबले पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। अंततः जादूमणि को रजत पदक से संतोष करना पड़ा, हालांकि पूरे टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा।
भारतीय मुक्केबाजी का बढ़ता दबदबा
राष्ट्रमंडल खेल 2026 में
भारतीय मुक्केबाजों का प्रदर्शन यह साबित करता है कि देश में मुक्केबाजी
लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। अनुभवी खिलाड़ियों के साथ-साथ युवा
मुक्केबाज भी बड़े मंच पर लगातार सफलता हासिल कर रहे हैं। जैस्मिन
लांबोरिया और प्रीति पवार के स्वर्ण तथा जादूमणि सिंह के रजत पदक ने भारत
के पदक अभियान को नई मजबूती दी है। इन सफलताओं ने आने वाली अंतरराष्ट्रीय
प्रतियोगिताओं के लिए भी भारतीय मुक्केबाजी दल का आत्मविश्वास बढ़ाया है और
यह संकेत दिया है कि भविष्य में भी भारत इस खेल में मजबूत चुनौती पेश करता
रहेगा।













