अयोध्या में शुक्रवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के विभाजन, संभल हिंसा और अयोध्या से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 1947 के दौरान देश और समाज के बंटने की कीमत लोगों को चुकानी पड़ी। सीएम योगी ने कहा कि आज भी समाज को भाषा और जाति के आधार पर बांटने की कोशिशों से सावधान रहने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने संभल हिंसा का जिक्र करते हुए दावा किया कि वहां हुई हिंसा में हिंदू और पुलिस निशाने पर थे। उन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत में होने वाली घटनाओं पर आवाज उठाने वाले लोगों को वहां हिंदुओं के साथ होने वाली घटनाओं पर भी बोलना चाहिए।
संभल और अयोध्या का किया जिक्र
सीएम योगी ने अपने संबोधन में संभल के हरिहर मंदिर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 1526 में वहां मंदिर को तोड़कर एक ढांचा खड़ा किया गया था। उनके मुताबिक, यदि उस समय इस घटना का संगठित रूप से विरोध किया गया होता तो 1528 में अयोध्या में राम मंदिर को नुकसान पहुंचाने का दुस्साहस नहीं होता।
उन्होंने कहा कि आज संभल और अयोध्या दोनों जगह धार्मिक और ऐतिहासिक वैभव लौट रहा है। संभल में विकास कार्यों और तीर्थ स्थलों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब वहां तीर्थ कुंड भी दिखाई देने लगे हैं।
संभल हिंसा को लेकर सरकार का पक्ष
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिहर मंदिर से जुड़े ढांचे के सर्वे का अदालत की ओर से आदेश दिए जाने के बाद वहां उपद्रव हुआ। उनके अनुसार, इस दौरान पुलिस और हिंदू निशाने पर थे। उन्होंने दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई के बाद स्थिति नियंत्रण में आई।
योगी आदित्यनाथ ने संभल के पुराने हालात का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय तक वहां दंगे होते रहे। उन्होंने 1976 और 1978 की घटनाओं का जिक्र करते हुए दावा किया कि इन वर्षों में बड़ी संख्या में हिंदुओं की हत्या हुई थी। मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि 1996 में तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार ने इन मामलों से जुड़े मुकदमे वापस ले लिए थे और किसी दोषी को सजा नहीं मिली।
उन्होंने कहा कि अब संभल में दंगे नहीं होते और वहां सौहार्द का माहौल है।
राम मंदिर को लेकर विपक्ष पर निशाना
अयोध्या की वर्तमान स्थिति और राम मंदिर आंदोलन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी राम जन्मभूमि आंदोलन के खिलाफ खड़े थे और रामभक्तों पर कार्रवाई का समर्थन करते थे, वही अब खुद को रामभक्त बताने की कोशिश कर रहे हैं।
चढ़ावे की कथित चोरी के मामले का उल्लेख करते हुए सीएम योगी ने कहा कि मामला सामने आने के बाद तीर्थ क्षेत्र के आग्रह पर एसआईटी गठित की गई और कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार और ट्रस्ट दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध हैं।
1947 के विभाजन को लेकर कही बड़ी बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के विभाजन को केवल हिंदू और सिखों के विस्थापन या हिंसा तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, 1947 में भारत भी विभाजित हुआ था। उन्होंने कहा कि जिस भारत को वह प्राचीन काल से एक इकाई मानते हैं, उसके विभाजन का प्रभाव समाज पर भी पड़ा।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश को भाषा और जाति के आधार पर बांटने की राजनीति से बचने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि आज भी ऐसी ताकतें सक्रिय हैं जो समाज में विभाजन पैदा करना चाहती हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और सरदार पटेल का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि आजादी के समय नरेंद्र मोदी या सरदार पटेल जैसा प्रधानमंत्री होता तो उनके अनुसार लाखों हिंदुओं का कत्लेआम नहीं होता।
उन्होंने आरोप लगाया कि विभाजन के समय जिम्मेदारी लेने के बजाय सत्ता हासिल करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिस्थितियां और चेहरे बदल सकते हैं, लेकिन उन्हें आज भी वैसी ही प्रवृत्तियां दिखाई देती हैं।
धारा 370 और नक्सलवाद का भी जिक्र
विपक्ष पर हमला करते हुए सीएम योगी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को इन बदलावों से परेशानी है और ऐसे लोग कभी भाषा तो कभी जाति के नाम पर समाज को बांटने का प्रयास करते हैं।
मुख्यमंत्री ने लोगों से ऐसी ताकतों को पहचानने और उनसे सावधान रहने की अपील की। उनके संबोधन में देश के विभाजन की घटनाओं से सीख लेने और सामाजिक एकता बनाए रखने पर जोर रहा।













