अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने राम मंदिर चढ़ावा मामले में पूर्व महासचिव चंपत राय का पक्ष रखते हुए कहा कि उनके साथ विश्वासघात हुआ है। सोमवार (7 जुलाई) को ट्रस्ट की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर चंपत राय ने भरोसा जताया, वही बाद में ट्रस्ट के साथ कथित धोखाधड़ी में शामिल निकले।
सोमवार को आयोजित ट्रस्ट की अहम बैठक में चढ़ावे के कथित गबन विवाद के बीच चंपत राय का महासचिव पद से इस्तीफा और अनिल मिश्रा का ट्रस्टी पद से इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। इसके साथ ही ट्रस्टी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।
'विश्वास किया, लेकिन वही लोग निकले गद्दार'
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए गोविंद देव गिरि ने कहा कि ट्रस्ट के किसी सदस्य ने विश्वासघात नहीं किया, बल्कि चंपत राय स्वयं उन लोगों के धोखे का शिकार हुए, जिन पर उन्होंने वर्षों तक भरोसा बनाए रखा।
उन्होंने कहा, "हम चंपत राय को अत्यंत ईमानदार और सज्जन व्यक्ति मानते हैं। उन्होंने जिन लोगों पर भरोसा किया, वही आगे चलकर ट्रस्ट के साथ विश्वासघात कर बैठे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन पर जिम्मेदारी थी, वही भरोसे पर खरे नहीं उतर सके।"
निगरानी में लापरवाही स्वीकार की
हालांकि, गोविंद देव गिरि ने यह भी माना कि चढ़ावे के प्रबंधन और उसकी निगरानी में चंपत राय तथा अनिल मिश्रा की ओर से गंभीर चूक हुई। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक प्रभावी निगरानी नहीं होना एक बड़ी प्रशासनिक कमी थी और ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए थी।
उनके मुताबिक, ट्रस्ट इस पूरे घटनाक्रम से सबक लेते हुए भविष्य में व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी तथा सुदृढ़ बनाने की दिशा में काम करेगा।
'चंपत राय की छवि आज भी बेदाग'
गोविंद देव गिरि ने स्पष्ट कहा कि उनके व्यक्तिगत आकलन में चंपत राय की छवि अब भी निष्कलंक है। उन्होंने कहा कि चंपत राय ने अपना पूरा जीवन राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण के उद्देश्य के लिए समर्पित किया है। यदि उनसे कोई भूल हुई भी, तो वह केवल गलत लोगों पर विश्वास करने की थी।
उन्होंने बताया कि चंपत राय ने स्वयं यह महसूस किया कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो जाती, तब तक महासचिव के पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। इसी सोच के साथ उन्होंने अपना इस्तीफा सौंपा।
मूल्यवान चढ़ावे सुरक्षित होने का दावा
गोविंद देव गिरि ने बताया कि ट्रस्ट ने मीडिया के सामने उन कई बहुमूल्य वस्तुओं को भी प्रदर्शित किया, जिनके बारे में पहले चोरी होने के आरोप लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि मंदिर में प्राप्त करीब 2,800 मूल्यवान वस्तुओं का विस्तृत रजिस्टर तैयार किया गया है।
उन्होंने बताया कि जिन पांच वस्तुओं को लेकर सबसे अधिक चर्चा हो रही थी, जिनमें रामचरितमानस की एक दुर्लभ पांडुलिपि और भगवान को अर्पित किया गया एक विशेष हार भी शामिल है, वे पूरी तरह सुरक्षित हैं और मीडिया के सामने प्रस्तुत की गई थीं। उनका रिकॉर्ड सुरक्षित है और अधिकृत व्यक्ति आवश्यकता पड़ने पर उनका निरीक्षण भी कर सकते हैं।
चढ़ावा प्रबंधन में होंगे बड़े बदलाव
कोषाध्यक्ष ने यह भी स्वीकार किया कि चढ़ावे से जुड़े मामले में चोरी की घटना हुई है, लेकिन इसकी वास्तविक राशि कितनी है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसका अंतिम फैसला जांच एजेंसियां करेंगी।
उन्होंने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) अपनी जांच कर रहा है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि ट्रस्ट चढ़ावे के संग्रह, गणना और सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव करेगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
वीआईपी दर्शन को लेकर भी दिया बयान
मंदिर में कथित तौर पर वीआईपी दर्शन कराने के बदले धन लेने के आरोपों पर पूछे गए सवाल के जवाब में गोविंद देव गिरि ने कहा कि उन्होंने ऐसे आरोप जरूर सुने हैं, लेकिन किसी विशेष मामले की पुष्टि उनके पास नहीं है।
उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं कह सकता कि ऐसा कभी हुआ ही नहीं। मेरे सामने किसी व्यक्ति का नाम नहीं आया है, लेकिन इस तरह की शिकायतें सुनने में आई हैं और प्रथम दृष्टया वे पूरी तरह निराधार भी नहीं लगतीं।"
उन्होंने दोहराया कि एसआईटी अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप चुकी है और अब अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
ऐसे शुरू हुआ था पूरा विवाद
राम मंदिर चढ़ावा विवाद की शुरुआत 7 जून को हुई थी, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन का आरोप लगाया था। उस समय तत्कालीन महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि आंतरिक ऑडिट में किसी भी प्रकार की बड़ी अनियमितता सामने नहीं आई है।
बाद में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर चढ़ावे में प्राप्त नकदी और बहुमूल्य वस्तुओं की गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद बढ़ते विवाद के बीच चंपत राय ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे सोमवार को ट्रस्ट की बैठक में औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया।













