
उदयपुर के राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय में आज छात्राओं ने जमकर हंगामा किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के नेतृत्व में छात्राएं परीक्षा परिणामों में गड़बड़ियों और मेधावी छात्राओं को मिलने वाली स्कूटियों के वर्षों से लंबित वितरण को लेकर आक्रोशित दिखाई दीं। विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्राएं प्रिंसिपल के कमरे के बाहर पहुंचीं और कमरे में ताला लगा दिया, जबकि प्रिंसिपल अंदर ही मौजूद थे। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश के बाद ताला खुलवाया गया। इसके बाद छात्राएं कॉलेज कॉरिडोर में बैठकर नारेबाजी करती रहीं और अपनी मांगों पर अड़ी रहीं।
परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी का आरोप
मीरा गर्ल्स कॉलेज में सुबह से ही माहौल तनावपूर्ण रहा। छात्राओं का आरोप है कि B.A. और B.Sc. द्वितीय और चतुर्थ सेमेस्टर के हाल ही में जारी परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी हुई है। कई छात्राओं को फेल घोषित किया गया, जबकि उनका कहना है कि उनकी परीक्षाओं में प्रदर्शन संतोषजनक रहा।
“संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा”
छात्र संघ अध्यक्ष किरण वैष्णव ने बताया कि B.Sc. सेकंड और फोर्थ सेमेस्टर के कुछ विषयों में कई छात्राओं को अनुचित रूप से फेल दिखाया गया है, जिससे छात्राओं में असंतोष और संदेह पैदा हुआ है। छात्राओं का कहना है कि कॉलेज प्रशासन और विश्वविद्यालय दोनों ही जिम्मेदारी टाल रहे हैं, जिससे उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा।
ABVP की छात्रा सुमन कुंवर ने आरोप लगाया कि कई B.A. छात्राओं को परीक्षा देने के बावजूद अनुपस्थिति दिखा दिया गया है। साथ ही उन्होंने हर साल फीस बढ़ाने, रिवैल्यूएशन के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूली और लंबित स्कूटी वितरण पर भी सवाल उठाए।
प्रिंसिपल ने आरोपों को किया खारिज
कॉलेज प्राचार्य दीपक माहेश्वरी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि परीक्षा संबंधी सभी कामकाज मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के अधीन हैं। कॉलेज स्तर पर रिजल्ट में किसी भी तरह की भूमिका नहीं होती। प्राचार्य ने कहा कि शिकायत मिलने पर वे छात्राओं से आवेदन लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से बात करेंगे और समाधान निकालने का प्रयास करेंगे।
छात्राओं की मांगें
छात्राएं रिजल्ट की उत्तर पुस्तिकाओं की पुनः जांच, पारदर्शी मूल्यांकन प्रणाली और वर्षों से लंबित स्कूटी वितरण की मांग पर अड़ी हुई हैं। ABVP की छात्रा नेता ने बताया कि विश्वविद्यालय कहता है कि कॉलेज प्रशासन से संपर्क करें, वहीं कॉलेज प्रशासन कहता है कि यह मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय का मामला है। इस वजह से छात्रों की नाराजगी और बढ़ गई है।














