
राजस्थान में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। लगातार निगरानी के बावजूद कुछ दवाएं दोबारा जांच में भी मानकों पर खरी नहीं उतर पा रही हैं। हाल ही में औषधि नियंत्रण विभाग ने ऐसी ही दो दवाओं को गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाए जाने के बाद उनके वितरण और बिक्री पर सख्त रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। इस कार्रवाई के बाद पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया गया है।
विभाग की ओर से जारी नोटिस में साफ कहा गया है कि संबंधित दवाएं निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं कर सकीं, इसलिए उन्हें ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ घोषित किया गया है। इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन दवाओं के संबंधित बैच को तुरंत बाजार से हटाया जाए और उनकी सप्लाई पर पूरी तरह निगरानी रखी जाए।
स्वास्थ्य अधिकारियों को सख्त निर्देश
औषधि नियंत्रण विभाग ने राज्य के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) और अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इन दवाओं की बिक्री और वितरण पर कड़ी नजर रखें। साथ ही, जिन बैचों को जांच में फेल पाया गया है, उन्हें तत्काल प्रभाव से सप्लाई चेन से हटाने के आदेश दिए गए हैं ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इन दो दवाओं पर लगा प्रतिबंध
जांच के दौरान Cefpodoxime Proxetil Tablets IP (200 mg) और Coral Calcium & Vitamin D3 Tablets को गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं पाया गया। जानकारी के अनुसार, ये दोनों दवाएं हिमाचल प्रदेश स्थित फार्मा कंपनियों द्वारा निर्मित हैं, जिसके बाद विभाग ने संबंधित कंपनियों को भी नोटिस जारी किया है।
किस बीमारी में होती हैं इस्तेमाल
Cefpodoxime Proxetil एक एंटीबैक्टीरियल दवा है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर श्वसन तंत्र से जुड़ी संक्रमणों के इलाज में किया जाता है। इस दवा का 6 अप्रैल 2026 का बैच जांच में असफल पाया गया। इसे मैसर्स वीएडीएसपी फार्मास्युटिकल लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया था।
वहीं, Coral Calcium & Vitamin D3 Tablets का उपयोग शरीर में कैल्शियम और विटामिन D की कमी को पूरा करने के लिए किया जाता है। इसका 7 अप्रैल 2026 का बैच भी जांच में फेल हो गया। यह दवा मैसर्स मास्कन लाइफ साइंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित बताई जा रही है।
अन्य सैंपलों की भी होगी जांच
विभाग ने इन दोनों दवाओं के फेल होने के बाद संबंधित कंपनियों के अन्य प्रोडक्ट्स के सैंपल भी जांच के लिए मंगवाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि दवाओं की गुणवत्ता के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।














