जैसलमेर। जिले में नगर परिषद प्रशासन ने सरकारी भूमि पर वर्षों से चले आ रहे बड़े पैमाने के अवैध कब्जे के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए विशाल अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इस कार्रवाई के तहत करीब 400 बीघा सरकारी जमीन को खाली कराया गया और लगभग 300 अवैध रूप से बने निर्माणों को बुलडोजर की मदद से ध्वस्त कर दिया गया। इस अभियान के चलते करीब 1000 लोगों पर असर पड़ा है, जिनमें कई परिवारों के आशियाने उजड़ गए और वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए।
म्याजलार से एयरपोर्ट रोड तक चला अभियान, पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात
यह कार्रवाई म्याजलार रोड, बाड़मेर रोड, एयरपोर्ट रोड, तोताराम की ढाणी और सुदासर जैसे इलाकों में एक साथ की गई, जहां लंबे समय से लोग कच्चे-पक्के मकान बनाकर रह रहे थे। प्रशासन की टीम जब मौके पर पहुंची तो जेसीबी मशीनों की मदद से झोपड़ियों और मकानों को तेजी से गिराया जाने लगा। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए नगर परिषद, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया, जिससे पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया।
कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों में गुस्सा, समय न देने का आरोप
अतिक्रमण हटाने की इस कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। लोगों का कहना है कि उन्हें पहले से कोई स्पष्ट सूचना नहीं दी गई और न ही अपना सामान सुरक्षित निकालने के लिए पर्याप्त समय दिया गया। प्रभावित महिला आमू देवी ने आरोप लगाया कि उन्होंने प्रशासन से थोड़े समय की गुहार लगाई थी, लेकिन उनकी अपील पर ध्यान नहीं दिया गया और मकान तोड़ने की कार्रवाई तुरंत शुरू कर दी गई।
कई परिवारों ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे अपना सामान बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे, उसी दौरान उनके घरों को ढहा दिया गया, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ।
दीवार गिरने से बच्चा घायल, रोज़गार और जीवन यापन पर संकट
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान एक मकान की दीवार गिरने से सुरेश नाम का युवक घायल हो गया, जिसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे दिहाड़ी मजदूरी करके किसी तरह अपना गुजारा करते हैं, लेकिन अचानक हुई इस कार्रवाई ने उनके सामने रहने-खाने और रोजमर्रा की जरूरतों का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। कई परिवार अब खुले में या अस्थायी ठिकानों की तलाश में भटक रहे हैं।
नगर परिषद का सख्त रुख—सरकारी जमीन पर कब्जा बर्दाश्त नहीं
नगर परिषद आयुक्त लजपाल सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत लगभग 400 बीघा जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है और करीब 300 अवैध निर्माणों को हटाया गया है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी और ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाए जाएंगे।
राजस्व अधिकारी पवन कुमार ने जानकारी दी कि अतिक्रमण हटाने से पहले एक समाचार पत्र के माध्यम से नोटिस जारी कर लोगों को सूचित किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास भूमि से संबंधित वैध दस्तावेज हैं, तो वे प्रस्तुत कर सकते हैं, हालांकि अधिकांश भूमि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, इसलिए वैध स्वामित्व के दावे की संभावना बहुत कम है।














