
जयपुर। राज्यभर में 1 अक्टूबर से 6 अक्टूबर तक लगातार बारिश का सिलसिला बने रहने की संभावना जताई गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के जयपुर केंद्र ने चेताया है कि उत्तर प्रदेश और राजस्थान पर सक्रिय वेदर सिस्टम के कारण अगले कुछ दिनों तक कई जिलों में मेघगर्जना और तेज बारिश देखने को मिल सकती है। खासतौर पर शेखावाटी क्षेत्र, जयपुर, भरतपुर, अजमेर, जोधपुर और बीकानेर संभाग के कुछ हिस्सों में कहीं-कहीं भारी बारिश की आशंका जताई गई है, जिससे आमजन के साथ-साथ किसानों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है।
इसी बीच मौसम विभाग ने यह भी जानकारी दी है कि इस सप्ताह के अंत में एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जो 5 से 8 अक्टूबर के बीच राजस्थान में प्रभावी रहेगा। इस विक्षोभ के चलते बारिश की गतिविधियों में फिर से तेजी आने के आसार हैं। साथ ही कच्छ क्षेत्र में एक वेल मार्क लो प्रेशर एरिया बना हुआ है और उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में ट्रफ लाइन भी सक्रिय है, जिसके चलते अगले तीन से चार दिन कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी रहेगी।
मानसून के खत्म होने के बाद भी राजस्थान में मौसम ने मंगलवार को अनपेक्षित करवट ली और जयपुर सहित कई जिलों में भारी बारिश हुई। मौसम विभाग और स्थानीय अधिकारियों ने अगले तीन-चार दिनों तक गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने का अलर्ट जारी किया है।
जयपुर में दोपहर के समय अचानक भारी बारिश हुई, जिससे शहर के कई हिस्सों में जलभराव हो गया और ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। गोपालपुरा, सांगानेर, जगतपुरा, टोंक रोड और जवाहरलाल नेहरू मार्ग जैसे प्रमुख इलाकों में बारिश की तीव्रता देखी गई। अजमेर रोड के कमला नेहरू नगर की सर्विस लेन पूरी तरह जलमग्न हो गई, जिससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानी हुई। बारिश से मौसम में उमस कम हुई और तापमान में गिरावट आई, जिससे राहत महसूस हुई।
जयपुर सहित राज्य के कई इलाकों में मंगलवार को जोरदार बारिश देखने को मिली, जिससे राजधानी की सड़कों पर पानी भर गया। खासतौर पर मुहाना मंडी के पास केसर चौराहे पर सड़क धंसने की घटना सामने आई, जिसमें कई वाहन गड्ढों में फंस गए। बारिश के चलते ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित रहा और दो से चार किलोमीटर की दूरी तय करने में लोगों को आधे से एक घंटे का समय लग गया।

राजस्थान के अलवर में भी तेज बारिश दर्ज की गई, जहां महज 20 मिनट की मूसलाधार बारिश ने कई सड़कों को जलमग्न कर दिया। दौसा, सिकराय और महुआ में भी भारी बारिश हुई। वहीं जैसलमेर के रामदेवरा और पोखरण जैसे इलाके भी अच्छी बारिश से भीगे।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम और अन्य इलाकों में तेज बारिश हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने आगामी दिनों में और बारिश की चेतावनी दी है। बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है, जो 5 से 8 अक्टूबर के बीच राजस्थान में एक पश्चिमी विक्षोभ को सक्रिय करेगा। यह विक्षोभ प्रदेश में व्यापक बारिश कर सकता है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
अधिकारियों ने लोगों से विशेष सतर्कता बरतने और प्रशासन द्वारा दी गई सलाहों का पालन करने का अनुरोध किया है, खासकर उन जिलों में जहां बाढ़ की संभावना अधिक है।
मौसम विभाग ने चेताया है कि बंगाल की खाड़ी में अगले 24 घंटों के भीतर एक नया कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है, जिससे राजस्थान में फिर से 5 से 8 अक्टूबर के दौरान तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है। इसका असर कोटा, उदयपुर, भरतपुर, जयपुर, अजमेर और जोधपुर-बीकानेर संभाग के जिलों में खास तौर पर देखने को मिलेगा। पूर्वी राजस्थान में 2 अक्टूबर को बारिश का अनुमान है, जबकि पश्चिमी हिस्सों में बूंदाबांदी संभव है।
मौसम विभाग ने 1 अक्टूबर को अजमेर, बारां, ब्यावर, भीलवाड़ा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, कोटा, राजसमंद, सलूंबर, सवाई माधोपुर, सिरोही, टोंक और उदयपुर में मेघगर्जन और वज्रपात के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, बालोतरा, बाड़मेर, जैसलमेर, जालौर, जोधपुर और पाली में भी तेज बारिश की चेतावनी दी गई है। 2 अक्टूबर को भी पूर्वी राजस्थान के अधिकांश जिलों में बारिश की संभावना बनी हुई है और इस दौरान करीब दो दर्जन जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
दशहरे की तैयारियों पर पानी फेरा
दशहरे की तैयारियों पर भी इस बारिश ने पानी फेर दिया। जयपुर में रावण के पुतलों की सड़क किनारे लगी मंडियों में रखे पुतले भीगकर खराब हो गए। कई गरीब कारीगरों की मेहनत पर पानी फिर गया, जिससे उनका आर्थिक नुकसान हुआ है। रावण दहन कार्यक्रमों के आयोजन पर भी संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं।
किसानों के लिए यह बारिश राहत के बजाय आफत बनकर आई है। धौलपुर जिले में खरीफ की फसलें पहले ही बर्बाद हो चुकी थीं और अब रबी की सरसों की फसल पर भी संकट मंडरा रहा है। किसानों ने शारदीय नवरात्र के साथ ही सरसों की बुवाई कर दी थी और फसलें खेतों में अंकुरित हो चुकी थीं, लेकिन अचानक हुई भारी बारिश से ये फसलें भी खराब हो गईं। एक बीघा सरसों की बुवाई पर लगभग चार से पांच हजार रुपये की लागत आती है, ऐसे में किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
किसानों ने यह भी शिकायत की है कि खरीफ फसलों के नुकसान का अब तक कोई प्रशासनिक सर्वे नहीं हुआ है। हालांकि, नायब तहसीलदार नाहर सिंह ने जानकारी दी है कि राजस्व विभाग की टीम द्वारा सर्वे जल्द शुरू किया जाएगा और किसानों को हरसंभव राहत दी जाएगी। इस बीच तिलहन, दलहन, और ग्वार जैसी फसलें जो खेतों में कटी पड़ी थीं, वे भी भीगकर खराब हो गईं।
मौसम विभाग ने किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सलाह दी है कि वे मौसम के ताजा अपडेट पर लगातार नजर बनाए रखें और बारिश के दौरान जरूरी सावधानियां बरतें। आने वाले दिनों में सक्रिय होने वाले नए सिस्टम के चलते मौसम में और बदलाव संभव है, जिसका सीधा असर खेती, ट्रैफिक और त्योहारों की तैयारियों पर पड़ सकता है।














