
जयपुर। कभी भारतीय महिला वॉलीबॉल टीम की कप्तान रह चुकी और देश का 10 देशों में प्रतिनिधित्व करने वाली संगीता कड़वासरा आज सलाखों के पीछे है। दक्षिण एशियाई फेडरेशन (सैफ) गेम्स में दो बार स्वर्ण और एक बार रजत पदक जीत चुकी, रेलवे में खेल कोटे से नौकरी पाने वाली और हरियाणा सरकार के ‘भीम पुरस्कार’ से सम्मानित संगीता का करियर अब फर्जी डिग्रियों के घोटाले में फंस गया है।
फर्जी डिग्रियों का बड़ा नेटवर्क
एसओजी ने खुलासा किया कि संगीता कड़वासरा ओपीजेएस यूनिवर्सिटी से जुड़े फर्जी डिग्री नेटवर्क का अहम हिस्सा थी। वह यूनिवर्सिटी में ऑब्जर्वर के तौर पर काम कर रही थी और आरोप है कि उसने संचालक जोगेंद्र सिंह के साथ मिलकर मोटी रकम लेकर बैक डेट में फर्जी डिग्रियां बांटी। एटीएस ने उसे दिल्ली से हिरासत में लिया और एसओजी को सौंपा। कोर्ट में पेशी के बाद उसे जेल भेज दिया गया है।
शानदार करियर से विवादों तक
संगीत कड़वासरा का खेल करियर बेहद शानदार रहा। उसने भारतीय वॉलीबॉल टीम की कप्तानी की और कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश को मेडल दिलाए। रेलवे ने उसे खेल कोटे से नौकरी दी थी। लेकिन निजी जीवन में उतार-चढ़ाव के बाद उसका करियर भटक गया। पति से अलगाव के बाद उसने रेलवे की नौकरी छोड़ दी और कुछ समय पत्रकारिता में भी हाथ आजमाया। इसके बाद वह ओपीजेएस यूनिवर्सिटी से जुड़ गई, जहां से उसका नाम फर्जी डिग्री घोटाले में सामने आया।
एटीएस का ‘ऑपरेशन कटुरागिनी’
आईजी विकास कुमार के अनुसार, संगीता की गिरफ्तारी के लिए एटीएस ने ‘ऑपरेशन कटुरागिनी’ चलाया। करीब 20 दिन तक निगरानी के बाद उसे गुड़गांव के एक फ्लैट से पकड़ा गया। टीम ने फ्लैट की बिजली सप्लाई काटी और जब इसका संकेत मिला कि वह भीतर छिपी है, तब दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। संगीता पर एसओजी ने पहले से ही 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
गड़बड़ी पर बड़ा एक्शन
जानकारी के अनुसार, संगीता और जोगेंद्र सिंह लंबे समय से मिलकर अभ्यर्थियों को फर्जी डिग्रियां उपलब्ध करा रहे थे। कई अभ्यर्थियों ने मोटी रकम देकर इन डिग्रियों का फायदा उठाया। अब एसओजी उससे पूछताछ कर इस नेटवर्क से जुड़े और चेहरों को बेनकाब करने की तैयारी में है।














