
आज का दिन श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास है। सावन के दूसरे सोमवार और कामिका एकादशी का दुर्लभ संयोग आज बना है, जिसके चलते पूरे देशभर के शिवालयों में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही मंदिरों में लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं, जहां भक्त जल, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत चढ़ाकर भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं।
राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड और उत्तराखंड सहित कई राज्यों के प्रमुख शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु गंगा जल, नर्मदा जल, गोमती और अन्य पवित्र नदियों का जल लेकर भगवान भोलेनाथ को अर्पित कर रहे हैं। महिलाएं और पुरुष दोनों ही व्रत रखकर दिनभर शिव की पूजा में लीन हैं।
सावन सोमवार पर शिवभक्ति का चरम उत्साह
सावन मास में प्रत्येक सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस विशेष दिन पर शिवभक्त विशेष पूजा, अभिषेक और व्रत का पालन करते हैं। सावन का यह दूसरा सोमवार इसलिए भी खास बन गया क्योंकि इसी दिन कामिका एकादशी भी पड़ी है। इस दुर्लभ संयोग ने भक्तों की श्रद्धा और भी गहरी कर दी है। मंदिरों में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया है।
विभिन्न स्थानों पर शिव बारात, रुद्राभिषेक, शिव पुराण पाठ और भजन कीर्तन जैसे आयोजन भी हो रहे हैं। कई जगहों पर शिव भक्तों ने कांवड़ यात्रा भी शुरू की है, जिसमें वे दूर-दराज के तीर्थस्थलों से जल लाकर शिवलिंग पर चढ़ाते हैं।
भोर होते ही शुरू हुआ शिवभक्तों का तांता
सुबह होते ही श्रद्धालु परिवार सहित शिव मंदिरों में पहुंचने लगे। कई मंदिरों के बाहर भक्तों की लंबी-लंबी कतारें नजर आईं। पुरुष, महिलाएं और बच्चे बेलपत्र, दूध, गंगाजल, शहद और जल से भगवान शिव का अभिषेक करने पहुंचे। खासकर युवाओं और महिला श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मंदिर प्रशासन और स्वयंसेवकों ने व्यवस्था संभाली हुई थी। कतारबद्ध दर्शन की व्यवस्था की गई थी, ताकि हर श्रद्धालु को शांतिपूर्वक शिवलिंग पर जल अर्पण करने का अवसर मिल सके। सुरक्षा, पानी और चिकित्सा की भी समुचित व्यवस्था की गई।
आस्था और अध्यात्म का मेल
सावन के इस पावन सोमवार को भक्तों ने व्रत रखकर शिव की उपासना की। पंडितों और पुरोहितों के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने विशेष पूजन कराया। कुछ शिवालयों में दिनभर भजन-कीर्तन और शाम को आरती का आयोजन भी किया गया। सावन में हर सोमवार को भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन शिव जी का अभिषेक करने से जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
वहीं, धौलपुर के सभी प्रमुख शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह 4 बजे मंगला आरती के साथ ही मंदिरों के पट खुले और इसके बाद श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। जगह-जगह भगवान शिव की पूजा-अर्चना के जयघोष से शिवालय गूंजते रहे। इस मौके पर सबसे अधिक भीड़ धौलपुर के सैपऊ स्थित ऐतिहासिक महादेव मंदिर में उमड़ी। मंगला आरती के तुरंत बाद मंदिर परिसर भक्तों से भर गया। हरिद्वार, कर्णवास और सोरों से आए कांवड़िये भगवान शिव का दुग्ध, शर्करा, पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक करते नजर आए। बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर भोलेनाथ की पूजा विधिवत संपन्न की गई।
धौलपुर शहर के चोपड़ा मंदिर, अचलेश्वर महादेव मंदिर और बसेड़ी स्थित भूतेश्वर महादेव मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिला, पुरुष, बच्चे और युवा सभी शिव भक्ति में डूबे नजर आए। भक्तों द्वारा मंदिर परिसरों के बाहर जगह-जगह लंगर की व्यवस्था भी की गई थी, जिसमें सुबह से ही प्रसादी वितरित की जा रही थी। महंत लोकेश शास्त्री ने बताया कि इस बार सावन मास विशेष संयोग लेकर आया है। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।














