महाराष्ट्र की राजनीति में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे को एक साथ लाने की बात केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कही है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर राज ठाकरे एक दिन के लिए फडणवीस और उद्धव को एक मंच पर ला सकते हैं, तो वह दोनों नेताओं को हमेशा के लिए साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, आठवले ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह इस पहल की शुरुआत कब करेंगे। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल ही में एक कार्यक्रम में देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे एक ही मंच पर दिखाई दिए थे। तीनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी को लेकर राजनीतिक चर्चा हुई थी। इसी घटना का जिक्र करते हुए आठवले ने दोनों नेताओं के बीच संभावित नजदीकी की बात कही।
राज ठाकरे ने एक दिन के लिए साथ लाया, अब आठवले की बारी?
रामदास आठवले ने कहा कि एक समय ऐसा था, जब देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे का एक मंच पर आना भी मुश्किल माना जाता था। लेकिन राज ठाकरे ने एक कार्यक्रम में दोनों को साथ ला दिया। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक नेता शादी-विवाह और दूसरे सामाजिक आयोजनों में अक्सर एक मंच पर दिखाई देते हैं। आठवले ने इसी संदर्भ में कहा कि वह भी कोशिश कर सकते हैं कि फडणवीस और उद्धव ठाकरे भविष्य में हमेशा के लिए साथ आ जाएं। उन्होंने दोनों नेताओं के बीच मध्यस्थता करने की इच्छा जताई है। हालांकि, यह उनका व्यक्तिगत बयान है। दोनों नेताओं के बीच किसी राजनीतिक समझौते या गठबंधन की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। जब उनसे पूछा गया कि वह फडणवीस और उद्धव को साथ लाने की कोशिश कब करेंगे, तो उन्होंने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया।
MLC चुनाव के बाद महायुति में बढ़ी बयानबाजी
आठवले का यह बयान महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के हालिया चुनाव परिणामों के बाद आया है। इन चुनावों में सत्तारूढ़ महायुति को तीन सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, जबकि विपक्षी महाविकास अघाड़ी ने तीन सीटें जीत लीं। महायुति के खाते में दो सीटें आईं।नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हराया। वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने पुणे और छत्रपति संभाजीनगर की स्नातक सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा ने पुणे शिक्षक सीट और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अमरावती शिक्षक सीट जीती। चुनाव नतीजों के बाद महायुति के भीतर सहयोगी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए। भाजपा ने शिवसेना के कुछ नेताओं पर गठबंधन के उम्मीदवारों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से कार्रवाई की मांग की। भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने पुणे में रवींद्र धंगेकर और छत्रपति संभाजीनगर में अब्दुल सत्तार की भूमिका पर सवाल उठाए। ये आरोप भाजपा की ओर से लगाए गए हैं।
28 MLC सीटों के नतीजों पर क्या बोले आठवले?
महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत चार राज्यों में हुए विधान परिषद चुनावों का जिक्र करते हुए रामदास आठवले ने कहा कि कुल 28 सीटों में एनडीए को सबसे ज्यादा सीटें मिली हैं। चुनाव परिणामों में एनडीए ने कुल 16 सीटें हासिल कीं। महाराष्ट्र में गठबंधन को पांच में से दो सीटें मिलीं, जबकि विपक्षी महाविकास अघाड़ी ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की। आठवले ने महाराष्ट्र में गठबंधन के प्रदर्शन को उम्मीद के मुताबिक नहीं माना। उन्होंने कहा कि महायुति की कोशिश सभी पांच सीटें जीतने की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने चुनाव में हुए नुकसान को स्वीकार करते हुए कहा कि नतीजे अपेक्षा के अनुसार नहीं रहे। कर्नाटक के चुनाव परिणामों पर भी उन्होंने टिप्पणी की। उनका कहना था कि वहां कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी को नुकसान हुआ। कर्नाटक की चारों MLC सीटें एनडीए के खाते में गईं। इनमें भाजपा ने तीन और जनता दल (सेक्युलर) ने एक सीट जीती।
भाजपा और शिवसेना के मतभेद बातचीत से सुलझने की उम्मीद
महाराष्ट्र में MLC चुनाव के बाद भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के नेताओं के बीच सामने आई बयानबाजी पर भी आठवले ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप होना सामान्य बात है। महायुति और महाविकास अघाड़ी, दोनों गठबंधनों के नेता एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं। आठवले ने माना कि चुनाव में कुछ सीटें गंवाने के बाद भाजपा और शिवसेना के बीच मतभेद सामने आए हैं। हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि बातचीत के जरिए इन मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने इस स्थिति को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं बताई। फिलहाल रामदास आठवले ने फडणवीस और उद्धव ठाकरे को साथ लाने की इच्छा तो जाहिर की है, लेकिन इस दिशा में किसी औपचारिक पहल या दोनों नेताओं की ओर से सहमति की जानकारी सामने नहीं आई है।














