
लोकसभा के बजट सत्र में 2 फरवरी 2026 को हंगामे का दृश्य देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सदन में एक बिना प्रकाशित पुस्तक का हवाला देते हुए बयान दिया, जिससे केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू तुरंत खड़े हो गए और राहुल को रोकने का प्रयास किया। यह घटना संसद के नियमों और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई।
राहुल के डोकलाम और नरवणे बयान पर विवाद
सदन में राहुल गांधी ने कहा कि पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा में कुछ तथ्य ऐसे हैं, जो देशभक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अहम हैं। उन्होंने नरवणे के कथित उद्धरण पेश करते हुए बताया कि चीन के टैंक भारतीय क्षेत्र में कैलाश रेंज के पास तक पहुँच गए थे। राहुल का यह बयान जैसे ही शुरू हुआ, तीनों केंद्रीय मंत्री खड़े होकर उसे रोकने लगे।
राजनाथ सिंह: रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में ऐसी किसी बात का उल्लेख नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस किताब का राहुल हवाला दे रहे हैं, वह अभी प्रकाशित नहीं हुई है और उसका संदर्भ गलत है।
अमित शाह: केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि राहुल को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिस पुस्तक की बातें वह पेश कर रहे हैं, वह प्रकाशित है या नहीं। उन्होंने कहा कि कोई भी सदस्य बिना प्रकाशित स्रोत के किसी का कथन नहीं पढ़ सकता।
किरेन रिजिजू: संसदीय कार्य मंत्री ने राहुल को रोकते हुए कहा कि आप सदन के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। संसद में नियमों का पालन अनिवार्य है और बिना प्रकाशित पुस्तक का हवाला देना स्वीकार्य नहीं है।
सरकार की मुख्य आपत्ति
सरकार की सबसे बड़ी आपत्ति यही थी कि राहुल गांधी ने एक बिना प्रकाशित किताब को आधार मानकर संसद में तथ्य प्रस्तुत किए। राजनाथ सिंह ने कहा कि नरवणे की पुस्तक में कई कथित तर्क गलत पाए गए थे, जिसके कारण उसे प्रकाशन से रोका गया था। अब राहुल उसी बिना प्रकाशित पुस्तक के अंश पढ़ रहे हैं, जो सरकार के अनुसार सही नहीं है।













