तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी अंदरूनी उथल-पुथल के बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कांग्रेस की ओर से भी कड़े राजनीतिक हमलों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर जहां हाल ही में वह कांग्रेस नेतृत्व के साथ विपक्षी गठबंधन INDIA की रणनीति को लेकर चर्चा करती नजर आईं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद उदित राज ने उनके खिलाफ तीखी टिप्पणी करते हुए कई पुराने राजनीतिक फैसलों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उदित राज ने दावा किया कि देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने के पीछे विपक्ष की कुछ रणनीतिक गलतियां जिम्मेदार रहीं। उन्होंने विशेष रूप से ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल का नाम लेते हुए कहा कि इन दोनों नेताओं के रुख ने विपक्षी एकजुटता को कमजोर किया और इसका सीधा फायदा भाजपा को मिला।
नीतीश कुमार को लेकर उठाया पुराना मुद्दा
कांग्रेस नेता ने कहा कि जब INDIA गठबंधन अपने शुरुआती दौर में था, तब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके मुताबिक, नीतीश कुमार ने देशभर में घूमकर विपक्षी एकता का माहौल तैयार किया और विभिन्न दलों के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश की।
हालांकि उदित राज का आरोप है कि गठबंधन के भीतर कुछ नेताओं ने उन्हें अपेक्षित महत्व नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यदि नीतीश कुमार को INDIA गठबंधन का संयोजक बनाए जाने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता, तो राजनीतिक तस्वीर काफी अलग हो सकती थी। उनके अनुसार ऐसा नहीं होने के कारण नीतीश कुमार ने अंततः अलग रास्ता चुना और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ चले गए।
“मोदी की वापसी में विपक्ष की गलतियों का भी योगदान”
उदित राज ने कहा कि यदि विपक्ष उस समय एकजुट रहता और नेतृत्व को लेकर अनावश्यक विवाद नहीं होते, तो भारतीय जनता पार्टी को चुनाव में कहीं अधिक कठिन चुनौती का सामना करना पड़ता। उन्होंने दावा किया कि कुछ नेताओं की प्राथमिकता भाजपा को हराने से ज्यादा विपक्ष के भीतर शक्ति संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित थी।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को राष्ट्रीय स्तर पर उभरने से रोकने की कोशिशों ने विपक्षी खेमे को नुकसान पहुंचाया। उनके अनुसार यदि सभी दल साझा लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते, तो चुनावी नतीजे अलग हो सकते थे। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि राजनीतिक फैसलों के परिणाम समय के साथ सामने आते हैं और आज जो परिस्थितियां दिखाई दे रही हैं, वे उन्हीं निर्णयों का असर हैं।
TMC और AAP की स्थिति का किया जिक्र
उदित राज ने अपने बयान में आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस दोनों का उल्लेख करते हुए कहा कि हाल के घटनाक्रम राजनीतिक संदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार राजनीति में लिए गए फैसलों का प्रभाव तत्काल दिखाई नहीं देता, लेकिन समय बीतने के साथ उनका असर स्पष्ट हो जाता है।
उन्होंने कहा कि आज जो चुनौतियां कुछ दलों के सामने दिखाई दे रही हैं, वे बीते वर्षों की राजनीतिक रणनीतियों और फैसलों से भी जुड़ी हुई हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने यह टिप्पणी की कि राजनीति में पुरानी कहावत “जैसा बोओगे, वैसा काटोगे” कई बार सच साबित होती दिखाई देती है।
INDIA गठबंधन को लेकर भी दी सलाह
TMC में चल रही हलचल और विपक्षी गठबंधन की भविष्य की रणनीति पर बोलते हुए उदित राज ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में विपक्षी दलों को अधिक ईमानदारी और स्पष्टता के साथ साथ काम करना चाहिए। उनके अनुसार यदि INDIA गठबंधन को मजबूत बनाना है तो सभी सहयोगी दलों को व्यक्तिगत राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर साझा लक्ष्य पर ध्यान देना होगा।
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को भी गठबंधन के प्रति पूरी प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए और विपक्षी एकता को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। कांग्रेस नेता का मानना है कि विपक्ष की मजबूती तभी संभव है जब सभी दल परस्पर विश्वास के साथ आगे बढ़ें।
पार्टी विलय को लेकर भी की टिप्पणी
अपने बयान के दौरान उदित राज ने तृणमूल कांग्रेस के भविष्य को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि ममता बनर्जी चाहें तो राजनीतिक रूप से कई विकल्प उनके सामने खुले हैं। इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के विलय जैसे फैसले पूरी तरह संबंधित नेतृत्व पर निर्भर करते हैं और इस बारे में अंतिम निर्णय वही ले सकते हैं।
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दल का भविष्य उसके नेतृत्व और कार्यकर्ताओं की सामूहिक सोच पर आधारित होता है। फिलहाल TMC के भीतर जारी असंतोष और राजनीतिक हलचल के बीच उदित राज के इस बयान ने विपक्षी राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। खासकर ऐसे समय में, जब विपक्षी दल आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं, कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।













