लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान उस समय जबरदस्त हंगामा खड़ा हो गया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश देने का आरोप लगाया। राहुल गांधी के बयान पर सत्ता पक्ष ने तीखी आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से तत्काल माफी की मांग करते हुए कहा कि यदि इस तरह बिना आधार के आरोप लगाए जाएंगे तो सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकती।
राहुल गांधी ने गृह मंत्री पर लगाए गंभीर आरोप
एंटी पेपर लीक विधेयक पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में मौजूद नहीं हैं क्योंकि वे डरे हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने गृह मंत्री का काफिला देखा, जिसमें लगभग 30 गाड़ियां थीं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों पर पेलेट गन चलवाई गई और उन्हें बिजली के झटके देने जैसे कदम उठाए गए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी कार्रवाई बिना शीर्ष स्तर की मंजूरी के संभव नहीं हो सकती।
राहुल गांधी के इन आरोपों के बाद सत्ता पक्ष के सांसद अपनी सीटों से खड़े हो गए और सदन में जोरदार विरोध शुरू हो गया। भाजपा सदस्यों ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए राहुल गांधी से बयान वापस लेने और माफी मांगने की मांग की।
किरेन रिजिजू ने कहा- सदन में बिना सबूत आरोप स्वीकार नहीं
राहुल गांधी के बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संसद में किसी भी व्यक्ति पर इस तरह के गंभीर आरोप लगाने से पहले ठोस प्रमाण होना चाहिए। रिजिजू ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी किस आधार पर यह दावा कर रहे हैं कि गृह मंत्री ने ऐसा कोई आदेश दिया था।
उन्होंने कहा कि यदि किसी घटना की जांच की मांग की जाती है तो सरकार उस पर विचार कर सकती है, लेकिन बिना किसी तथ्य या दस्तावेज के सीधे गृह मंत्री पर आरोप लगाना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। रिजिजू ने साफ शब्दों में कहा कि राहुल गांधी को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।
राहुल गांधी के समर्थन में बोले अखिलेश यादव
हंगामे के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव राहुल गांधी के समर्थन में खड़े नजर आए। उन्होंने कहा कि यदि नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर इतना गंभीर आरोप लगाया है तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई किसके आदेश पर हुई थी।
हालांकि, अखिलेश यादव की बात का जवाब देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि जांच की मांग और किसी व्यक्ति पर सीधे आरोप लगाने में बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि यदि जांच की मांग की जाती है तो वह अलग विषय है, लेकिन राहुल गांधी ने सीधे गृह मंत्री का नाम लिया है, इसलिए उन्हें अपने आरोपों के समर्थन में प्रमाण देना होगा या फिर सदन से माफी मांगनी होगी।
स्पीकर ओम बिरला ने दी संयम बरतने की सलाह
लगातार बढ़ते हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप किया और नेता प्रतिपक्ष से आग्रह किया कि वे केवल विधेयक से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखें। उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले की जांच की मांग करनी है तो की जा सकती है, लेकिन बिना प्रमाण किसी व्यक्ति विशेष का नाम लेकर आरोप लगाना उचित नहीं है।
इस दौरान किरेन रिजिजू ने भी दोहराया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही इस मुद्दे पर आपत्ति जता चुके हैं। उन्होंने कहा कि सदन में किसी भी मंत्री के खिलाफ इस तरह का आरोप बिना आधार के स्वीकार नहीं किया जा सकता और राहुल गांधी को या तो अपने दावे के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने चाहिए या फिर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
राहुल गांधी ने दोहराया अपना पक्ष, कार्यवाही हुई स्थगित
अपने बचाव में राहुल गांधी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग की अनुमति या तो प्रधानमंत्री दे सकते हैं या फिर गृह मंत्री। उन्होंने कहा कि इसी आधार पर उन्होंने अपनी बात रखी है। हालांकि, उनके इस जवाब से सत्ता पक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और सदन में फिर से हंगामा शुरू हो गया।
स्थिति बिगड़ती देख लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सदन नियमों और तथ्यों के आधार पर चलता है। उन्होंने सभी सदस्यों से संयम बरतने और चर्चा को विधेयक तक सीमित रखने की अपील की। स्पीकर ने कहा कि संसद का उपयोग जिम्मेदारी और नियमों के अनुरूप होना चाहिए। लगातार जारी गतिरोध और शोर-शराबे के बीच अंततः लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।













