
संसद के भीतर जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पहलगाम हमले पर गंभीर बहस छिड़ी थी, तो विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार से तीखे सवाल किए। मुख्य मुद्दा यह था कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम की घोषणा आखिर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों की थी? इन आरोपों और सवालों का करारा जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान दिया और पाकिस्तान की खस्ताहाल स्थिति का खुलासा किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 9 और 10 मई को भारत की जवाबी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की हालत इतनी खराब हो गई थी कि वह युद्ध की स्थिति से पीछे हटने की विनती करने लगा। उन्होंने बताया, "हमने ऐसी जोरदार प्रतिक्रिया दी कि पाकिस्तान झुक गया। वह हमारे डीजीएमओ को लगातार संपर्क कर रहा था और बिनती कर रहा था — ‘बस करो, बहुत मारा। अब ज्यादा मार झेलने की ताकत नहीं है। प्लीज हमला रोक दो।’"
मोदी ने दोहराया कि भारत की कार्रवाई का मकसद केवल आतंकवाद के खिलाफ था, न कि पाकिस्तान की आम जनता के खिलाफ। उन्होंने कहा, "हमने सिर्फ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जब पाकिस्तान ने घुटनों पर आकर विनती की, तब हमने ऑपरेशन को स्थगित किया — लेकिन यह याद रखा जाए कि ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है, वह रुका है। यदि आवश्यकता पड़ी, तो दोबारा उसी तरह जवाब दिया जाएगा।”
अमेरिका से आई चेतावनी, मोदी का सख्त संदेश
प्रधानमंत्री ने उस महत्वपूर्ण फोन कॉल का भी जिक्र किया जो अमेरिका की ओर से आया था। उन्होंने कहा, "9 मई की रात अमेरिका के उपराष्ट्रपति का फोन आया। वह लंबे समय से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मैं उस समय सैन्य अधिकारियों के साथ अहम बैठक में था। बाद में मैंने कॉल बैक किया।"
उन्होंने बताया, "फोन पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने चेताया कि पाकिस्तान किसी बड़े हमले की योजना बना रहा है। मैंने स्पष्ट कहा — अगर पाकिस्तान ने ऐसी कोई हिमाकत की, तो इसकी कीमत उसे भारी चुकानी पड़ेगी। भारत गोली का जवाब गोले से देने को तैयार है।"
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने सिर्फ चेतावनी नहीं दी, बल्कि 10 मई की सुबह पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को करारा झटका दिया। "हमने उन्हें दिखा दिया कि भारत अब चुप नहीं बैठेगा। हमने साफ संदेश दिया — हम लड़ाई नहीं चाहते, लेकिन अगर ललकारा गया तो जवाब भी ज़बरदस्त होगा।"














