
लोकसभा में 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर चल रही चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। कांग्रेस द्वारा पीओके पर सवाल उठाने को लेकर उन्होंने कहा कि यह वही लोग हैं जिनकी नीतियों के कारण पाकिस्तान के कब्जे में पीओके गया। मोदी ने कहा कि जैसे ही मैं नेहरू सरकार की चर्चा करता हूं, कांग्रेस और उसका पूरा इकोसिस्टम असहज हो उठता है।
पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए कहा, “आज पूछा जा रहा है कि पीओके क्यों नहीं लिया गया... और यह सवाल मुझसे पूछा जा रहा है। यहां मौजूद हर व्यक्ति जानता है कि POK किसके शासनकाल में पाकिस्तान के कब्जे में गया। इतिहास की एक छोटी सी चूक ने देश को लंबे समय तक भुगतने पर मजबूर कर दिया है। आज़ादी के समय लिए गए गलत फैसलों की कीमत आज भी भारत चुका रहा है।”
उन्होंने आगे अक्साई चिन का मुद्दा उठाते हुए कहा, “अक्साई चिन, जो कि भारत का अभिन्न हिस्सा था, उसे उस समय की सरकार ने 'बंजर ज़मीन' कहकर छोड़ दिया। इसके परिणामस्वरूप हमें अपने 38,000 वर्ग किलोमीटर भूभाग को खोना पड़ा। यह निर्णय पूरी तरह से राजनीतिक था और इसकी भारी कीमत हमें चुकानी पड़ी।”
मोदी ने यह भी कहा कि उन्हें पता है कि उनके कुछ बयान विपक्ष को अप्रिय लग सकते हैं। “1962-63 के दौरान कांग्रेस के नेताओं ने पुंछ, उरी, नीलम घाटी और किशनगंगा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को छोड़ने की बात कही थी। भारत की भूमि को 'लाइन ऑफ पीस' के नाम पर त्यागा जा रहा था। 1966 में कच्छ के रण को लेकर भी कांग्रेस सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता को मान लिया और करीब 800 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पाकिस्तान को सौंप दिया।”
प्रधानमंत्री ने 1965 की लड़ाई को याद करते हुए कहा, “हाजी पीर पास को भारतीय सेना ने अपनी वीरता से जीता था, लेकिन कांग्रेस की सरकार ने उसे वापस कर दिया। यह देश की सैन्य ताकत का अपमान था।”
अपने संबोधन में मोदी ने 1971 के युद्ध का भी उल्लेख किया। “जब पाकिस्तान के 93 हजार सैनिक भारत की गिरफ्त में थे और उनके कई हजार वर्ग किलोमीटर इलाके पर हमारी सेना का कब्जा था, तब थोड़ी सी भी राजनीतिक इच्छाशक्ति होती तो हम पीओके को भारत में मिला सकते थे। अगर इतना भी नहीं कर सकते थे, तो कम से कम करतारपुर साहिब को तो भारत में शामिल कर ही लेते... लेकिन कांग्रेस सरकार वह भी नहीं कर सकी।”
प्रधानमंत्री मोदी का यह भाषण कांग्रेस पर एक निर्णायक हमला था, जिसमें उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर पार्टी की विदेश और सुरक्षा नीतियों को कठघरे में खड़ा किया।














