
दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास सोमवार शाम एक खड़ी कार में हुए जोरदार धमाके ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। धमाके की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि लाल किले के समीप स्थित लाल मंदिर में कार का एक हिस्सा गिर गया। मंदिर की शीशियां टूट गईं और आसपास की कई दुकानों के दरवाजे व खिड़कियां भी क्षतिग्रस्त हो गईं। इस हादसे में कई लोगों के घायल होने और कुछ की मौत की खबर है।
धमाके के तुरंत बाद आसपास के दुकानों में आग लगने की भी सूचना मिली। चांदनी चौक के भागीरथ पैलेस इलाके तक इस धमाके का असर महसूस किया गया। दुकानदार और स्थानीय लोग फोन के जरिए हालात की जानकारी लेते नजर आए। साथ ही, आसपास खड़ी बसों और अन्य वाहनों में भी आग लगने की खबर आई। यह पहला मौका नहीं है जब दिल्ली में इस तरह की हिंसक घटनाएं हुई हैं।
दिल्ली में धमाकों की प्रमुख घटनाओं की क्रोनोलॉजी
25 मई 1996: लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट में बम विस्फोट — कम से कम 16 मौतें।
1 अक्टूबर 1997: सदर बाजार के पास दो बम विस्फोट — लगभग 30 घायल।
10 अक्टूबर 1997: शांतिवन, कौड़िया पुल और किंग्सवे कैंप इलाकों में तीन विस्फोट — 1 की मौत, लगभग 16 घायल।
18 अक्टूबर 1997: रानी बाग मार्केट में जुड़वां विस्फोट — 1 की मौत, लगभग 23 घायल।
26 अक्टूबर 1997: करोल बाग मार्केट में दो विस्फोट — 1 मृत, लगभग 34 घायल।
30 नवंबर 1997: रेड फोर्ट क्षेत्र में जुड़वां विस्फोट — 3 की मौत, 70 घायल।
30 दिसंबर 1997: पंजाबी बाग के पास बस में विस्फोट — 4 मृत, लगभग 30 घायल।
18 जून 2000: रेड फोर्ट के निकट दो शक्तिशाली विस्फोट — 2 की मौत, दर्जनभर घायल।
16 मार्च 2000: सदर बाजार में विस्फोट — 7 घायल।
27 फरवरी 2000: पहाड़गंज में विस्फोट — 8 घायल।
14 अप्रैल 2006: जामा मस्जिद प्रांगण में दो विस्फोट — कम से कम 14 घायल।
22 मई 2005: लिबर्टी और सत्यं सिनेमा हॉल में दो विस्फोट — 1 मौत, लगभग 60 घायल।
29 अक्टूबर 2005: सारोजिनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी में तीन विस्फोट — लगभग 59-62 मौतें, 100+ घायल।
13 सितंबर 2008: करोल बाग (गफ्फार मार्केट), कनॉट प्लेस और ग्रेटर कैलाश-I में पांच समन्वित विस्फोट — कम से कम 20-30 मौतें, 90+ घायल।
27 सितंबर 2008: मेहरौली के फ्लावर मार्केट (सराय) में विस्फोट — 3 मौतें, 23 घायल।
25 मई 2011: दिल्ली हाई कोर्ट पार्किंग में विस्फोट — कोई मौत नहीं।














