
बिहार की राजधानी पटना एक बार फिर छात्र आंदोलन का साक्षी बना, जब STET परीक्षा की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे अभ्यर्थियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। शिक्षक भर्ती प्रक्रिया TRE-4 से पहले STET के आयोजन की मांग को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन को काबू में करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए। इस दौरान महिला उम्मीदवारों के साथ भी पुलिस की सख्ती सामने आई।
TRE-4 से पहले STET की मांग को लेकर सड़कों पर छात्र
राज्य सरकार द्वारा शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के चौथे चरण (TRE-4) की घोषणा के बाद अभ्यर्थी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जिन छात्रों ने अब तक STET या TET की परीक्षा पास नहीं की है, उन्हें इस अवसर से बाहर कर दिया जाएगा। ऐसे में छात्रों की मांग है कि TRE-4 से पहले STET परीक्षा कराई जाए, ताकि वे भी भर्ती प्रक्रिया में भाग ले सकें।
इसी मांग को लेकर प्रदेश भर के अभ्यर्थी पटना पहुंचे और पटना कॉलेज से जुलूस की शक्ल में डाकबंगला चौराहा की ओर बढ़े। लेकिन जेपी गोलंबर के पास पुलिस ने उन्हें रोक दिया और आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे छात्रों को बलपूर्वक पीछे धकेल दिया गया।
जुलूस को रोकने के लिए बैरिकेडिंग, फिर लाठीचार्ज
प्रदर्शनकारी जब आगे बढ़ने लगे, तो मौके पर मौजूद पुलिस बल ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोका। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठियों का सहारा लिया। कई छात्र-छात्राएं इस लाठीचार्ज में घायल हो गए और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
#WATCH पटना: STET परीक्षा में देरी की मांग कर रहे TRE 4 अभ्यर्थियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। pic.twitter.com/0wesum4avF
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 7, 2025
महिला अभ्यर्थियों पर भी नहीं हुई रहमदिली
प्रदर्शन में शामिल महिला अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें भी निशाना बनाया। एक महिला ने बताया, "हमें धक्का दिया गया, गिरा दिया गया और फिर लाठी से पीटा गया। क्या हमारी आवाज़ उठाना गुनाह है?"
प्रशासन की सफाई: ‘सिर्फ हल्का बल प्रयोग’
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए मौके पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “प्रदर्शन के कारण सामान्य यातायात बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। बार-बार चेतावनी देने के बाद भी जब प्रदर्शनकारी नहीं माने, तो केवल आवश्यक मात्रा में बल का प्रयोग किया गया।” हालांकि छात्रों ने इस सफाई को नकारते हुए कहा कि उन पर बर्बरता की गई।
अभ्यर्थियों की चिंता: बिना STET के छूट जाएगा मौका
छात्रों का कहना है कि सरकार ने पहले वादा किया था कि साल में दो बार STET परीक्षा आयोजित की जाएगी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है। कई छात्र-छात्राएं ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक STET या TET पास नहीं किया है और TRE-4 के बिना ये छात्र भर्ती प्रक्रिया से बाहर रह जाएंगे।
“हमने बार-बार शिक्षा विभाग से अपील की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब कोई सुनवाई नहीं होती, तब हमें सड़क पर उतरना ही पड़ता है,” एक प्रदर्शनकारी ने कहा।
सवालों के घेरे में शिक्षा विभाग की चुप्पी
अभ्यर्थियों का आरोप है कि शिक्षा विभाग उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। एक छात्र ने कहा, "जब हर साल शिक्षक भर्ती हो रही है, तो STET को नियमित क्यों नहीं किया जाता? ये छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।"
आंदोलन और दबाव की राजनीति
TRE-4 और TRE-5 की घोषणाओं के बाद अभ्यर्थियों में उत्साह है, लेकिन बिना STET के ये उम्मीदें अधूरी हैं। ऐसे में यह प्रदर्शन राज्य सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना है कि प्रशासन इस आंदोलन को कैसे जवाब देता है – वार्ता से या और सख्ती से।














