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बिहार चुनाव से पहले नीतीश कुमार का बड़ा दांव, आशा और ममता वर्कर्स की सैलरी में जबरदस्त इज़ाफ़ा

बिहार चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आशा और ममता कार्यकर्ताओं की सैलरी में तीन गुना तक बढ़ोतरी कर बड़ा ऐलान किया है। साथ ही पत्रकारों और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए भी अहम घोषणाएं की गई हैं, जो सामाजिक समावेशन की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही हैं।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Wed, 30 July 2025 09:58:08

  बिहार चुनाव से पहले नीतीश कुमार का बड़ा दांव, आशा और ममता वर्कर्स की सैलरी में जबरदस्त इज़ाफ़ा

बिहार में जैसे-जैसे चुनाव की सरगर्मी तेज़ हो रही है, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक और बड़ा कदम उठाया है जो सीधे तौर पर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी महिला कर्मियों को राहत देने वाला है। मुख्यमंत्री ने बुधवार को आशा और ममता कार्यकर्ताओं के लिए उनके मानदेय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है। यह घोषणा राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में उनके योगदान को सम्मान देने के रूप में देखी जा रही है।

अब तीन गुना प्रोत्साहन: आशा कार्यकर्ताओं को मिलेगा 3000 रुपए

सीएम नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपने आधिकारिक हैंडल के माध्यम से यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं को अब पहले के 1000 रुपए की जगह हर महीने 3000 रुपए प्रोत्साहन राशि के रूप में दिए जाएंगे। इसी प्रकार, ममता कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव 600 रुपए की राशि मिलेगी, जो पहले केवल 300 रुपए थी।

मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारी सरकार ने 2005 से ही राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने की दिशा में गंभीर प्रयास किए हैं। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में आशा और ममता कार्यकर्ताओं ने सेवा के स्तर को ऊपर उठाने में अहम भूमिका निभाई है। उनके इस योगदान को मान्यता देते हुए ही हमने उनके मानदेय में वृद्धि का निर्णय लिया है।"

आशा और ममता कार्यकर्ता: गांव की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़

बिहार में आशा कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों की स्थानीय महिलाएं होती हैं जो राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) के अंतर्गत नियुक्त की जाती हैं। इनका कार्य गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बच्चों की स्वास्थ्य देखभाल, टीकाकरण, पोषण व परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता फैलाना, तथा संबंधित स्वास्थ्य डाटा का संकलन करना होता है।

दूसरी ओर, ममता कार्यकर्ता सरकारी अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत महिलाएं होती हैं, जो खास तौर से प्रसव पूर्व और प्रसव के बाद की मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती हैं।

इन कार्यकर्ताओं के माध्यम से राज्य सरकार ने ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को स्थिर और मजबूत किया है।

सीएम ने पत्रकारों और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए भी खोला पिटारा

राज्य के मुख्यमंत्री इन दिनों लगातार नीतिगत फैसलों की झड़ी लगाते नजर आ रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र के अलावा उन्होंने हाल ही में पत्रकारों के लिए भी पेंशन में उल्लेखनीय वृद्धि की थी। बिहार पत्रकार सम्मान पेंशन योजना के तहत अब पात्र पत्रकारों को ₹15,000 मासिक पेंशन मिलेगी, जो पहले ₹6,000 थी। पत्रकार की मृत्यु के उपरांत उनके जीवनसाथी को मिलने वाली पेंशन राशि भी ₹3,000 से बढ़ाकर ₹10,000 कर दी गई है।

सफाई कर्मचारियों और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए नई पहल

इसके अलावा सफाई कर्मचारियों के हितों की रक्षा को लेकर भी एक ठोस कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री ने बिहार राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के गठन की घोषणा की, जिसका उद्देश्य सफाई कर्मियों के अधिकारों, कल्याण, पुनर्वास और शिकायत निवारण के लिए एक संस्थागत ढांचा प्रदान करना है।

इस आयोग में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और पांच सदस्य होंगे, जिसमें से कम से कम एक सदस्य महिला या ट्रांसजेंडर होगा। यह कदम ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में राज्य सरकार का एक प्रगतिशील प्रयास माना जा रहा है।

चुनावी मोड में नीतीश, हर वर्ग को साधने की रणनीति

नीतीश कुमार का यह सक्रिय रुख दर्शाता है कि चुनावी मैदान में उतरने से पहले वे राज्य के हर वर्ग को साधने की तैयारी में हैं। स्वास्थ्य कर्मियों से लेकर पत्रकारों और ट्रांसजेंडर समुदाय तक—मुख्यमंत्री हर क्षेत्र में घोषणाओं के जरिए मजबूत जनाधार बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

अब देखना यह होगा कि इन घोषणाओं का आगामी चुनावों पर कितना प्रभाव पड़ता है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि ये कदम सामाजिक कल्याण और समावेशन की दिशा में अहम माने जाएंगे।

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