बिहार के नालंदा जिले से एक बार फिर बुनियादी ढांचे को लकर चिंताजनक खबर सामने आई है। दरियापुर इलाके में सकरी नदी पर बना पुल अचानक क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके कई पिलर टूटकर गिर पड़े। स्थानीय लोगों के मुताबिक सोमवार को पुल के खंभों में दरारें आने के बाद कुछ हिस्से ढह गए। करीब एक दशक पहले तैयार किया गया यह पुल नालंदा जिले के पूर्वी हिस्से को शेखपुरा जिले के पश्चिमी क्षेत्र से जोड़ने वाला एक अहम संपर्क मार्ग माना जाता था। घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत एहतियात बरतते हुए पुल पर हर तरह की आवाजाही बंद कर दी है और पूरे मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है।
यह पुल आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए रोजमर्रा की आवाजाही का प्रमुख साधन था। अचानक पुल के क्षतिग्रस्त होने से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पुल के पिलर आखिर किस वजह से टूटे। जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, रखरखाव और संरचनात्मक मजबूती जैसे पहलुओं को भी शामिल किया गया है।
प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर पुल पर यातायात पूरी तरह रोक दिया है। बिहारशरीफ के उप-मंडल अधिकारी क्रिसलय श्रीवास्तव ने बताया कि निरीक्षण टीम की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद ही एहतियातन पुल को वाहनों के लिए बंद कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़ी दुर्घटना से बचने के लिए मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया है और पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है।
STORY | Pillars of 10-year-old bridge collapse in Bihar’s Nalanda district
— Press Trust of India (@PTI_News) May 22, 2026
Several pillars of a bridge over Sakri river at Dariyapur in Bihar’s Nalanda district collapsed on Friday, an official said.
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अधिकारियों का कहना है कि लोगों की परेशानी कम करने के लिए जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाएगी। प्रशासन अगले एक-दो दिनों के भीतर नदी के रास्ते अस्थायी मार्ग तैयार करने की योजना बना रहा है ताकि स्थानीय यातायात फिर से सुचारू किया जा सके। पुल बंद होने से दोनों जिलों के बीच आने-जाने वाले लोगों को फिलहाल लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।
बिहार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान पुलों के ढहने की घटनाओं ने सरकार और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। साल 2024 और 2025 में राज्य के कई जिलों में छोटे और बड़े पुलों के क्षतिग्रस्त होने या गिरने की घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं के बाद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
इससे पहले भागलपुर में गंगा नदी पर बने ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा भी अचानक टूटकर गिर गया था। हालांकि उस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई थी, लेकिन इस हादसे ने राज्य की आधारभूत संरचनाओं की स्थिति को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी थी। करीब 4.7 किलोमीटर लंबा यह पुल भागलपुर और नवगछिया को जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।
भागलपुर के जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने उस समय जानकारी दी थी कि रात लगभग 12:50 बजे विक्रमशिला सेतु के पिलर संख्या 133 के पास दो स्लैब के बीच दरार दिखाई दी थी। इसके कुछ ही समय बाद पुल का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में जा गिरा। घटना के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया था और तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए थे।
वहीं बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से का हवाई निरीक्षण किया था। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि पुल की मरम्मत युद्धस्तर पर की जाए और तीन महीने के भीतर इसे दोबारा सुरक्षित बनाया जाए। अब नालंदा में सामने आई नई घटना ने एक बार फिर बिहार में पुलों की मजबूती, रखरखाव और निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।














