
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव एक बार फिर सियासी हलचल के केंद्र में हैं। इस बार वजह है उनका सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक वीडियो, जिसमें वे अपने परिवार के साथ विदेशी त्योहार हैलोवीन मनाते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उन पर निशाना साधते हुए कहा कि जो नेता महाकुंभ जैसे धार्मिक पर्व को “बेकार” बताते हैं, वे आज पश्चिमी संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं।
लालू यादव के हैलोवीन सेलिब्रेशन पर उठे सवाल
लालू यादव की बेटी और आरजेडी नेता रोहिणी आचार्य ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर कुछ तस्वीरें और वीडियो साझा किए। इनमें लालू यादव अपने पोते-पोतियों के साथ हैलोवीन का आनंद लेते दिखे। बच्चों ने पारंपरिक हैलोवीन कॉस्ट्यूम्स और मास्क पहने हुए थे। रोहिणी ने पोस्ट में लिखा — “हैप्पी हैलोवीन टू एवरीवन।”
जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, भाजपा ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। भाजपा किसान मोर्चा के आधिकारिक अकाउंट से पोस्ट करते हुए लिखा गया, “बिहार के लोगों को याद रखना चाहिए कि यही वही लालू यादव हैं जिन्होंने महाकुंभ जैसे भव्य धार्मिक आयोजन को ‘फालतू’ बताया था, और अब विदेशी त्योहार मना रहे हैं। जो व्यक्ति आस्था पर प्रहार करेगा, बिहार की जनता उसे कभी माफ नहीं करेगी।”
महाकुंभ पर लालू यादव का पुराना बयान बना विवाद की जड़
दरअसल, यह विवाद नया नहीं है। इसी साल फरवरी महीने में लालू यादव ने महाकुंभ मेले को लेकर एक विवादित बयान दिया था। जब उनसे बढ़ती भीड़ और श्रद्धालुओं के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा था — “अरे ये सब कुंभ का क्या मतलब है, फालतू है कुंभ।”
उस बयान के बाद भी भाजपा ने उन्हें हिंदू धार्मिक भावनाओं का अपमान करने वाला नेता बताते हुए कड़ी आलोचना की थी।
भाजपा प्रवक्ता मनोज शर्मा ने तब कहा था, “लालू यादव की सोच उनकी तुष्टिकरण की राजनीति को उजागर करती है। आरजेडी हमेशा हिंदू आस्था के खिलाफ बयानबाजी करती रही है।”
चुनावी मौसम में बढ़ा सियासी तापमान
लालू यादव का यह हैलोवीन वीडियो ऐसे वक्त में सामने आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव अपने निर्णायक दौर में हैं। राज्य में पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को और दूसरे चरण का 11 नवंबर को होना है। वहीं, 14 नवंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे।
भाजपा नेताओं का कहना है कि यह घटना जनता को यह सोचने पर मजबूर करेगी कि “जो नेता अपनी संस्कृति की आलोचना करता है और विदेशी परंपराओं का गुणगान करता है, वह राज्य के भविष्य का नेतृत्व कैसे कर सकता है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को फिर से केंद्र में ला सकता है, जिससे चुनावी बहस का रुख बदल सकता है। एक तरफ लालू यादव परिवारिक माहौल में त्यौहार का आनंद ले रहे थे, वहीं दूसरी ओर, इस वीडियो ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर ध्रुवीकरण की लहर पैदा कर दी है।














