
बिहार में बिजली उपभोग को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है, जिसने आम उपभोक्ताओं का ध्यान खींच लिया है। अब राज्य में बिजली की दरें दिन और रात के समय के अनुसार अलग-अलग होंगी। यानी जहां दिन के समय बिजली अपेक्षाकृत सस्ती मिलेगी, वहीं शाम और रात के दौरान इसके लिए ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा। सरकार ने यह नई व्यवस्था खासतौर पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं के लिए लागू करने का फैसला किया है, जिससे बिजली उपयोग के पैटर्न में भी बदलाव आने की उम्मीद है।
इस नई व्यवस्था के लागू होने के पीछे बिहार विद्युत विनियामक आयोग की मंजूरी अहम रही है। आयोग ने ‘टाइम ऑफ डे टैरिफ’ (ToD) प्रणाली को हरी झंडी दे दी है, जिसके बाद अब यह नियम सिर्फ औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम घरों पर भी लागू होगा। बिजली कंपनियों की ओर से दी गई याचिका को स्वीकार करते हुए आयोग ने यह कदम उठाया है, जिससे पीक आवर्स में लोड को संतुलित किया जा सके।
नई दरों के अनुसार, शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक बिजली का इस्तेमाल महंगा पड़ेगा। इस दौरान उपभोक्ताओं को सामान्य दर से करीब 20 प्रतिशत अधिक शुल्क देना होगा। इसे पीक आवर माना गया है, जब बिजली की मांग सबसे अधिक होती है। ऐसे में सरकार का उद्देश्य लोगों को इस समय कम बिजली इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि ग्रिड पर दबाव कम किया जा सके।
वहीं दिन के समय उपभोक्ताओं को राहत दी गई है। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक का समय ‘ऑफ-पीक आवर’ माना गया है, जिसमें बिजली सबसे सस्ती रहेगी। इस अवधि में उपभोक्ताओं को सामान्य दर का लगभग 80 प्रतिशत ही भुगतान करना होगा, यानी करीब 20 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। इससे लोगों को दिन में ज्यादा से ज्यादा बिजली इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
सरकार ने पूरे दिन को अलग-अलग समय खंडों में बांटकर बिजली की दरों को संतुलित करने की कोशिश की है। इस नई नीति का मकसद न सिर्फ बिजली की खपत को नियंत्रित करना है, बल्कि उपभोक्ताओं को जागरूक बनाना भी है कि वे अपनी जरूरत के हिसाब से सही समय पर बिजली का उपयोग करें। आने वाले समय में यह व्यवस्था राज्य की बिजली प्रणाली को अधिक कुशल और संतुलित बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।














