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बाल मजदूरी! IPL में वैभव सूर्यवंशी को लेकर राजस्थान रॉयल्स पर उठे सवाल, एक्टिविस्ट ने लगाए गंभीर आरोप

IPL 2026 में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को लेकर बड़ा विवाद, राजस्थान रॉयल्स पर चाइल्ड लेबर के आरोप लगे। जानें पूरा मामला, एक्टिविस्ट के दावे और भारत के बाल श्रम कानून क्या कहते हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 07 May 2026 7:58:37

बाल मजदूरी! IPL में वैभव सूर्यवंशी को लेकर राजस्थान रॉयल्स पर उठे सवाल, एक्टिविस्ट ने लगाए गंभीर आरोप

IPL 2026 में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने वाले 15 साल के वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी परफॉर्मेंस नहीं बल्कि विवाद है। राजस्थान रॉयल्स (RR) फ्रेंचाइज़ी पर ‘चाइल्ड लेबर’ यानी बाल श्रम में शामिल होने जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। कुछ सोशल एक्टिविस्ट्स का कहना है कि इतने कम उम्र के खिलाड़ी को प्रोफेशनल लीग में खेलाना कानून और नैतिकता दोनों के खिलाफ है। यहां तक कहा जा रहा है कि इस मामले में RR के खिलाफ FIR दर्ज कराने तक की चेतावनी दी गई है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या क्रिकेट खेलना वास्तव में बाल श्रम की श्रेणी में आता है? भारतीय कानून इस स्थिति को कैसे देखता है? और किन परिस्थितियों में बच्चों का काम करना गैरकानूनी माना जाता है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

पूरा मामला आखिर है क्या?

बिहार के 15 वर्षीय उभरते क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को राजस्थान रॉयल्स ने 1.10 करोड़ रुपये में अपनी टीम में शामिल किया है। इसी बात को लेकर विवाद की शुरुआत हुई है। सोशल एक्टिविस्ट सीएम शिवकुमार नायक ने इस चयन पर सवाल उठाते हुए इसे बाल श्रम के दायरे में बताया है। उनका कहना है कि 15 साल की उम्र में बच्चे का स्थान स्कूल और शिक्षा होना चाहिए, न कि पेशेवर खेल की चमक-दमक और दबाव भरी दुनिया। उनके अनुसार, इतनी कम उम्र में किसी बच्चे से प्रोफेशनल स्तर पर काम करवाना उसके बचपन और विकास का शोषण (Exploitation) माना जा सकता है।

भारत में चाइल्ड लेबर को लेकर कानून क्या कहता है?

भारत में बच्चों के अधिकारों और उनके संरक्षण के लिए The Child Labour (Prohibition and Regulation) Act, 1986 लागू है। इस कानून के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ‘बालक’ (Child) माना जाता है। ऐसे बच्चों से कुछ खास और खतरनाक कार्य करवाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। हालांकि हर प्रकार का काम बाल श्रम नहीं माना जाता, लेकिन कानून में स्पष्ट रूप से कुछ श्रेणियों के कामों पर सख्त रोक लगाई गई है।

चाइल्ड लेबर कानून के प्रमुख प्रावधान

1. बच्चे की परिभाषा क्या है?


कानून के अनुसार, जिस व्यक्ति ने 14 वर्ष की आयु पूरी नहीं की है, उसे ‘बच्चा’ माना जाता है। वहीं 14 से 18 वर्ष की उम्र के बीच के लोगों को ‘किशोर’ (Adolescent) की श्रेणी में रखा जाता है।

2. किन क्षेत्रों में काम करना पूरी तरह प्रतिबंधित है?

कानून के Schedule (Part A & B) में कई ऐसे कार्यों की सूची दी गई है, जहां 14 साल से कम उम्र के बच्चों को रखना अपराध है। इनमें रेलवे से जुड़े काम जैसे माल ढोना, चलती ट्रेन में सामान बेचना या रेलवे में सफाई कार्य शामिल हैं। इसके अलावा खतरनाक उद्योग जैसे पटाखा निर्माण, माचिस फैक्ट्री, बीड़ी उत्पादन और सीमेंट उद्योग में बच्चों का काम करना पूरी तरह गैरकानूनी है। इसी तरह खदानों, बूचड़खानों और ऑटोमोबाइल वर्कशॉप जैसे भारी और जोखिम भरे कार्यों में भी बाल श्रम की अनुमति नहीं है। साथ ही कालीन बुनाई, कपड़ों की रंगाई, साबुन निर्माण और ईंट भट्टों जैसे काम भी प्रतिबंधित श्रेणी में आते हैं।

3. खेल और मनोरंजन के क्षेत्र में क्या नियम हैं?

कानून में खेल और मनोरंजन से जुड़े कार्यों के लिए कुछ विशेष प्रावधान और छूट दी गई है। यदि कोई बच्चा अपने परिवार के साथ किसी कार्य में शामिल है या किसी स्कूल या सरकारी मान्यता प्राप्त संस्था के माध्यम से किसी गतिविधि में भाग ले रहा है, तो उस पर अलग नियम लागू होते हैं। इसी कारण क्रिकेट, फिल्म या अन्य परफॉर्मिंग आर्ट्स को आमतौर पर शोषण की श्रेणी में नहीं बल्कि प्रतिभा और कौशल विकास के रूप में देखा जाता है।

यदि काम पूरी तरह प्रतिबंधित न हो तो क्या नियम लागू होते हैं?

अगर कोई बच्चा ऐसे कार्य में शामिल है जो प्रतिबंधित श्रेणी में नहीं आता, तब भी कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है। बच्चे से एक दिन में कुल 6 घंटे से अधिक (आराम समय सहित) काम नहीं कराया जा सकता। लगातार काम के दौरान हर 3 घंटे के बाद कम से कम 1 घंटे का विश्राम देना जरूरी है। इसके अलावा शाम 7 बजे से सुबह 8 बजे तक बच्चों से किसी भी प्रकार का काम नहीं कराया जा सकता। सप्ताह में एक दिन पूरी छुट्टी देना भी अनिवार्य नियमों में शामिल है ताकि बच्चे को आराम और पढ़ाई का समय मिल सके।

नियम तोड़ने पर क्या सजा का प्रावधान है?

अगर कोई व्यक्ति या संस्था इन कानूनों का उल्लंघन करती है, तो उसे कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है। इसमें 3 महीने से 1 साल तक की जेल या 10,000 रुपये से 20,000 रुपये तक का जुर्माना या फिर दोनों सजा शामिल हो सकती हैं। यदि कोई व्यक्ति दोबारा ऐसा अपराध करता है तो सजा और भी सख्त हो सकती है, जो 2 साल तक की कैद तक बढ़ सकती है।

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