रांची में टीम इंडिया ने वेस्टइंडीज के सामने 249 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया, लेकिन इतनी मजबूत बल्लेबाजी भी जीत की गारंटी नहीं बन सकी। कैरेबियाई टीम ने 250 रन का लक्ष्य हासिल कर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सबसे बड़े सफल रन चेज में से एक को अंजाम दिया। भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने 20 छक्के लगाए, जिससे मैच का रुख भारत के हाथों से निकल गया। अब सवाल यह है कि आखिर 249 रन बनाने के बाद भी भारतीय टीम जीत से दूर कैसे रह गई? इस मुकाबले में ओस, रोस्टन चेज की किफायती गेंदबाजी और मयंक यादव को दोबारा गेंदबाजी का मौका नहीं मिलना अहम चर्चा के विषय रहे।
ओस ने भारतीय गेंदबाजों की मुश्किल बढ़ाई
दूसरी पारी में ओस का असर भारतीय गेंदबाजों पर साफ दिखाई दिया। गेंद गीली होने के कारण उसे ठीक से पकड़ना मुश्किल हो रहा था। इसका असर स्पिन गेंदबाजों पर खास तौर पर पड़ा। अक्षर पटेल, कुलदीप यादव और नमन धीर को रन रोकने में काफी परेशानी हुई। इन तीनों ने मिलकर 9.3 ओवर में 141 रन खर्च कर दिए। तेज गेंदबाज भी ओस के बीच अपनी सही लेंथ बनाए रखने के लिए संघर्ष करते नजर आए। गीली गेंद के कारण गेंदबाजों के लिए बल्लेबाजों पर दबाव बनाना आसान नहीं रहा और वेस्टइंडीज ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए लक्ष्य की ओर तेजी से कदम बढ़ाए।
रोस्टन चेज ने बीच के ओवरों में रोकी भारत की रफ्तार
भारतीय टीम की बल्लेबाजी एक समय तेजी से बड़े स्कोर की ओर बढ़ रही थी। 10 ओवर पूरे होने तक भारत 127 रन बना चुका था। लगातार ओवरों में 10 से 15 या उससे भी ज्यादा रन आ रहे थे, जिससे लग रहा था कि टीम 270 से 275 रन तक पहुंच सकती है।
लेकिन इसी दौरान रोस्टन चेज ने अपनी गेंदबाजी से भारत की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। उन्होंने चार ओवर में केवल 24 रन दिए और तीन विकेट भी हासिल किए। जब दूसरे गेंदबाज रन रोकने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब चेज ने किफायती गेंदबाजी करते हुए भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। इस प्रदर्शन का असर भारत के अंतिम स्कोर पर भी पड़ा। जिस पिच पर बड़े स्कोर बन रहे थे, वहां 20 से 30 अतिरिक्त रन भारत के लिए उपयोगी साबित हो सकते थे। हालांकि, यह कहना मुश्किल है कि अधिक रन बनने पर नतीजा निश्चित रूप से भारत के पक्ष में जाता।
मयंक यादव को दोबारा गेंदबाजी का मौका क्यों नहीं मिला?
मयंक यादव भारत के लिए इस मैच में प्रभावी गेंदबाज साबित हुए। युवा तेज गेंदबाज ने तीन ओवर में तीन विकेट लेकर वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को शुरुआती झटके दिए। लेकिन पावरप्ले के बाद उन्हें दोबारा गेंदबाजी करते नहीं देखा गया। 13वें और 14वें ओवर के आसपास मुकाबले की स्थिति भारत के लिए चिंता बढ़ाने लगी थी। वेस्टइंडीज लक्ष्य के करीब पहुंचने की कोशिश कर रहा था और भारतीय टीम को विकेटों की जरूरत थी। ऐसे समय में मयंक यादव को गेंद सौंपना एक विकल्प हो सकता था, क्योंकि वह पहले ही तीन विकेट लेकर अपनी लय दिखा चुके थे। कप्तान श्रेयस अय्यर के गेंदबाजी विकल्पों को लेकर भी सवाल उठे। हालांकि, केवल मयंक को दोबारा गेंदबाजी नहीं देने को हार का एकमात्र कारण नहीं कहा जा सकता। ओस, वेस्टइंडीज की आक्रामक बल्लेबाजी और रोस्टन चेज के किफायती स्पेल ने भी मैच के नतीजे में अहम भूमिका निभाई।
बड़े स्कोर के बावजूद भारत को नहीं मिली जीत
रांची का यह मुकाबला भारतीय टीम के लिए याद दिलाने वाला रहा कि टी20 क्रिकेट में बड़ा स्कोर बनाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी दूसरी पारी में परिस्थितियों के हिसाब से गेंदबाजी करना भी है। भारत ने 249 रन बनाए, लेकिन ओस के बीच गेंद पर नियंत्रण बनाए रखना और बीच के ओवरों में विकेट निकालना चुनौती बन गया। वेस्टइंडीज ने इन मुश्किलों का फायदा उठाया और 250 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया। भारत की हार के पीछे किसी एक वजह के बजाय कई परिस्थितियां रहीं। ओस से गेंदबाजों को हुई परेशानी, रोस्टन चेज का असरदार स्पेल और मयंक यादव के गेंदबाजी विकल्प का इस्तेमाल न होना इस मैच के सबसे अहम पहलुओं में शामिल रहे।














