
अलवर। प्रदेश के टाइगर रिजर्व में फीमेल टाइगर की कमी जल्द पूरी हो सकेगी. इसके लिए वन विभाग की ओर से अन्य राज्यों की बाघ परियोजनाओं से 9 बाघिनें लाई जाएंगी। एनटीसीए की ओर से 9 बाघिनों के पुनर्वास की मंजूरी मिल चुकी है। इन फीमेल टाइगर को सरिस्का, रामगढ़ विषधारी, मुकुंदरा सहित अन्य टाइगर रिजर्व में छोड़े जाने की उम्मीद है।
सरिस्का टाइगर रिजर्व समेत प्रदेश के कई अन्य टाइगर रिजर्व इन दिनों फीमेल टाइगर की कमी से जूझ रहे हैं। कारण है कि एक बाघ के साथ दो-तीन बाघिनें विचरण कर सकती हैं। लंबे समय से टाइगर रिजर्व में बाघिनों की जरूरत महसूस की जा रही थी। वन विभाग की ओर से लंबे समय से अन्य राज्यों के टाइगर रिजर्व से बाघिनों का पुनर्वास कराने की योजना पर कार्य किया जा रहा था। पिछले दिनों एनटीसीए ने भी अन्य राज्यों से बाघिनों को लाने की योजना को मंजूरी दे दी. इसके बाद वन विभाग ने मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों के टाइगर रिजर्व से बाघिनों को लाने की तैयारी तेज कर दी है।
9 फीमेल टाइगर लाने की मिली मंजूरी
राज्य के वन मंत्री संजय शर्मा का कहना है कि अभी एनटीसीए ने अन्य राज्यों से 9 फीमेल टाइगर लाने की मंजूरी दी है। ये फीमेल टाइगर मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड सहित देश के अन्य राज्यों के टाइगर रिजर्व से लाई जाएंगी। प्रदेश के वन विभाग के उच्च अधिकारी बाघिनों के पुनर्वास की योजना को धरातल पर लाने की तैयारी में जुटे हैं। इन फीमेल टाइगरों को किन टाइगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा, यह अभी तय नहीं किया गया है, लेकिन संभावना है कि बाहरी राज्यों से आने वाली बाघिनों को मुकुंदरा, रामगढ़ विषधारी एवं सरिस्का आदि टाइगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा। इन टाइगर रिजर्व में अभी फीमेल टाइगर की कमी है।
पूर्व में रणथंभौर से लानी पड़ती थी बाघिनें
प्रदेश में बाघों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू होने के बाद वन विभाग बाघ एवं बाघिनों के पुनर्वास के लिए रणथंभौर टाइगर रिजर्व पर निर्भर था। प्रदेश में सरिस्का सहित अन्य टाइगर रिजर्व में लाए गए बाघ एवं बाघिनें रणथंभौर से लाई गई थी। लेकिन अब बाहरी राज्यों के टाइगर रिजर्व से बाघिनों को लाने का सिलसिला शुरू होने की तैयारी है।
हो सकेगा बाघों की नस्ल में सुधार
अभी तक राजस्थान के सभी
टाइगर रिजर्व में रणथंभौर के बाघ-बाघिनें हैं। ये सभी टाइगर एक ही परिवार
की संतानें रही हैं। इस कारण इन टाइगरों की ब्रीड भी एक ही है। लंबे समय से
बाघों की ब्रीड में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी, इसके लिए प्रदेश
के टाइगर रिजर्व में अन्य प्रदेशों से बाघिनें लाने की जरूरत थी। एनटीसीए
की मंजूरी के बाद यह राह आसान हुई है और अब मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र,
उत्तराखंड आदि राज्यों के टाइगर रिजर्व की बाघिनों के यहां आने से प्रदेश
के टाइगर रिजर्व में बाघों की ब्रीड में बदलाव आ सकेगा और उनकी नस्ल बेहतर
हो सकेगी।














