
चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के दूसरे चरण की औपचारिक घोषणा कर दी है। बिहार में प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का अभियान शुरू किया जा रहा है। इसमें अंडमान निकोबार द्वीपसमूह, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
जरूरी दस्तावेज न होने पर कट सकता है नाम
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि मतदाता सूची में नाम बने रहने या जोड़ने के लिए आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन अनिवार्य होगा। यदि कोई व्यक्ति आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाता, तो SIR प्रक्रिया के बाद प्रकाशित होने वाली मतदाता सूची से उसका नाम हटाया जा सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि मतदाता अपने दस्तावेज तैयार रखें और बीएलओ (BLO) को समय पर उपलब्ध कराएं।
इन दस्तावेजों की होगी जरूरत
SIR के लिए मतदाताओं को पहचान और पते के प्रमाण के रूप में निम्नलिखित दस्तावेजों में से किसी एक या अधिक को प्रस्तुत करना होगा —
- केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी पेंशन पेमेंट ऑर्डर
- सरकारी या स्थानीय निकाय, बैंक, पोस्ट ऑफिस या एलआईसी द्वारा जारी प्रमाणपत्र
- जन्म प्रमाणपत्र (Birth Certificate)
- पासपोर्ट
- शैक्षणिक प्रमाणपत्र (Educational Certificate)
- स्थायी निवास प्रमाणपत्र (Permanent Residence Certificate)
- फॉरेस्ट राइट सर्टिफिकेट
- जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate)
- एनआरसी दस्तावेज
- राज्य या स्थानीय निकाय द्वारा तैयार पारिवारिक रजिस्टर (Family Register)
- भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र (Land/House Allotment Certificate)
SIR का पूरा टाइमटेबल
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि SIR के दूसरे चरण की प्रक्रिया 28 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर फरवरी 2026 तक चलेगी।
मुख्य चरणों का शेड्यूल इस प्रकार है:
28 अक्टूबर से 3 नवंबर 2025: प्रिंटिंग और ट्रेनिंग कार्य
4 नवंबर से 4 दिसंबर 2025: घर-घर जाकर मतदाता जानकारी का संकलन
9 दिसंबर 2025: ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जाएगी
9 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026: आपत्तियां और दावे दर्ज करने की प्रक्रिया
9 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026: सुनवाई और दस्तावेज़ों का सत्यापन
7 फरवरी 2026: अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी
चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे समय रहते सभी दस्तावेजों की जांच करा लें ताकि मतदाता सूची में किसी प्रकार की त्रुटि या नाम हटने जैसी स्थिति से बचा जा सके। यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व मजबूत बनाने के उद्देश्य से की जा रही है।














