प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 8 नवंबर 2026 को छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दीपावली मनाई। इस दौरान उन्होंने जवानों को संबोधित करते हुए नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में उनके साहस, शौर्य और बलिदान की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि नक्सलवाद पर जीत के बाद यह पहली दिवाली है। उन्होंने जवानों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश का हर जवान उनके परिवार का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आंतरिक सुरक्षा को देश की मजबूती से जोड़ते हुए कहा कि जब देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है, तब बाहरी दुश्मन भी कुछ नहीं कर पाते। इसके विपरीत, आंतरिक सुरक्षा कमजोर होने पर बाहरी दुश्मनों को हावी होने का मौका मिलता है। उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में जान गंवाने वाले जवानों के बलिदान को नमन किया और इस लड़ाई में सुरक्षा बलों की भूमिका को निर्णायक बताया।
पहले जवानों की शहादत पर जताई चिंतापीएम मोदी ने अपने भाषण में नक्सलवाद के पुराने दौर को याद करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था, जब नक्सलियों के मारे जाने की तुलना में सुरक्षा बलों के ज्यादा जवान शहीद हो रहे थे। नक्सली संगठनों के नेता इसे अपनी कामयाबी मानकर जश्न मनाते थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों ने नक्सलवाद को ऐसी बीमारी मान लिया था, जिसका कोई इलाज नहीं है। इस सोच के कारण हालात को लंबे समय तक जस का तस स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि कोई भी देश अपने दुश्मनों के सामने इस तरह का रवैया नहीं अपना सकता कि जो चल रहा है, उसे चलने दिया जाए। देश की सुरक्षा और विकास के लिए मजबूत इच्छाशक्ति के साथ चुनौतियों का मुकाबला करना जरूरी है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, साल 2014 के बाद नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में राजनीतिक इच्छाशक्ति और सरकार की नीति में बदलाव आया। उन्होंने कहा कि इसके बाद हालात और आंकड़े बदलने लगे।
47 साल में पहली बार CRPF ने दर्ज किया ऐसा रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की उपलब्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले 47 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है, जब लगातार 12 महीनों तक बल के किसी जवान की ऑपरेशन के दौरान जान नहीं गई। पीएम मोदी ने इसे सुरक्षा बलों के साहस, संयम और बेहतर रणनीति की जीत बताया। इस उपलब्धि की पुष्टि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से 3 नवंबर 2026 को साझा की गई जानकारी में भी की गई थी। इसमें बताया गया था कि CRPF ने 47 वर्षों में पहली बार लगातार 12 महीने बिना किसी ऑपरेशनल मौत के पूरे किए हैं। प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि पर बल की सराहना करते हुए कहा था कि यह शून्य अपने आप में बहुत कुछ कहता है।
मोदी ने जवानों से कहा कि किसी भी अभियान में सफलता हासिल करने के लिए सही नीयत के साथ प्रभावी नीतियां भी जरूरी हैं। उन्होंने सुरक्षा बलों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि यह उपलब्धि जवानों के शौर्य, साहस और संयम का परिणाम है।
सुरक्षा बलों को फैसले लेने की आजादी देने का दावा
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों ने सुरक्षा बलों के हाथ बांध रखे थे, जबकि उनकी सरकार ने जवानों और सुरक्षा एजेंसियों को फैसले लेने की अधिक स्वतंत्रता दी। उन्होंने दावा किया कि वामपंथी उग्रवाद को मिलने वाले समर्थन पर रोक लगाने के लिए भी कदम उठाए गए।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नक्सली गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं था, बल्कि उन परिस्थितियों को बदलना भी था जिनकी वजह से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा था। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का लक्ष्य था कि किसी मां की गोद सूनी न हो और किसी युवा का भविष्य बर्बाद न हो।
बिना प्रचार के माओवादी नेटवर्क पर कार्रवाई का जिक्र
पीएम मोदी ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को लगातार संकल्प के साथ आगे बढ़ाया गया। उनके मुताबिक, इस काम में प्रचार या दिखावे के बजाय संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार और सुरक्षा बलों ने मिलकर माओवादी आतंकवाद की कमर तोड़ने का काम किया। प्रधानमंत्री ने जवानों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में कई सुरक्षा कर्मियों ने अपनी जान दी है। उनकी कुर्बानी को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने जवानों की तारीफ करते हुए कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत रखने में उनकी भूमिका बेहद अहम है।
नक्सलवाद प्रभावित बस्तर में विकास का संदेश
बस्तर लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा है। प्रधानमंत्री ने अपने दौरे से पहले सोशल मीडिया पर भी इस क्षेत्र में आए बदलाव का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि जिस इलाके में कभी नक्सलवाद का दबदबा था, वहां अब विकास आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सुरक्षा बलों के त्याग, सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण को नमन करने की बात कही थी। केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में मिली सफलता का उल्लेख करते हुए देश को इस समस्या से मुक्त घोषित किया था। इस अभियान में कई वरिष्ठ नक्सली नेताओं और कैडरों के मारे जाने के साथ बड़ी संख्या में लोगों के आत्मसमर्पण की बात कही गई थी। बस्तर में जवानों के साथ प्रधानमंत्री का दीपावली मनाना इसी पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण है।