इस दिन घरों की साफ-सफाई करने के साथ दरवाजों और आंगन को फूलों, रंगोली और रोशनी से सजाया जाता है। शाम के समय दीपक जलाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन किया जाता है। मान्यता है कि दिवाली की पूजा में मां लक्ष्मी की स्तुति का पाठ करने और उनके मंत्रों का जाप करने से घर में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि का वातावरण बना रहता है।
हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव, सौभाग्य और समृद्धि की देवी माना गया है। उनकी आराधना में अष्टलक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों का विशेष महत्व बताया गया है। आदि लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी और गज लक्ष्मी सहित देवी के अलग-अलग स्वरूप जीवन की विभिन्न आवश्यकताओं और कल्याण का प्रतीक माने जाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली के दिन सच्चे मन और श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी की स्तुति करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस पाठ में मां से धन, विद्या, संतान, स्वास्थ्य, यश, साहस और सौभाग्य की कामना की जाती है।
दीपावली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान नीचे दी गई स्तुति का पाठ कर सकते हैं। इसमें देवी के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण करते हुए उनसे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करने की प्रार्थना की गई है।
माता लक्ष्मी की स्तुति
1. आदि लक्ष्मी
आदि लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु परब्रह्म स्वरूपिणि।
यशो देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।
2. संतान लक्ष्मी
सन्तान लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पुत्र-पौत्र प्रदायिनि।
पुत्रां देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।
3. विद्या लक्ष्मी
विद्या लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु ब्रह्म विद्या स्वरूपिणि।
विद्यां देहि कलां देहि सर्व कामांश्च देहि मे।
4. धन लक्ष्मी
धन लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व दारिद्र्य नाशिनि।
धनं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।
5. धान्य लक्ष्मी
धान्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वाभरण भूषिते।
धान्यं देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।
6. मेधा लक्ष्मी
मेधा लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु कलि कल्मष नाशिनि।
प्रज्ञां देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।
7. गज लक्ष्मी
गज लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वदेव स्वरूपिणि।
अश्वांश गोकुलं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।
8. धीर लक्ष्मी
धीर लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पराशक्ति स्वरूपिणि।
वीर्यं देहि बलं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।
9. जय लक्ष्मी
जय लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व कार्य जयप्रदे।
जयं देहि शुभं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।
10. भाग्य लक्ष्मी
भाग्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सौमाङ्गल्य विवर्धिनि।
भाग्यं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।
11. कीर्ति लक्ष्मी
कीर्ति लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु विष्णुवक्ष स्थल स्थिते।
कीर्तिं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।
12. आरोग्य लक्ष्मी
आरोग्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व रोग निवारणि।
आयुर्देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।
13. सिद्ध लक्ष्मी
सिद्ध लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व सिद्धि प्रदायिनि।
सिद्धिं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।
14. सौन्दर्य लक्ष्मी
सौन्दर्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वालङ्कार शोभिते।
रूपं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।
15. साम्राज्य लक्ष्मी
साम्राज्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु भुक्ति मुक्ति प्रदायिनि।
मोक्षं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।
मङ्गले मङ्गलाधारे माङ्गल्ये मङ्गल प्रदे।
मङ्गलार्थं मङ्गलेशि माङ्गल्यं देहि मे सदा।
सर्व मङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये।
दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान स्तुति पाठ के साथ विशेष मंत्रों का जाप भी किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मन को शांति मिलती है और भक्त देवी से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं।
1. मां लक्ष्मी का मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः॥
2. महालक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
3. कमला महालक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद, ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नमः॥
4. महालक्ष्मी गायत्री मंत्र
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
दीपावली पर प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की पूजा करना विशेष शुभ माना जाता है। इस साल 8 नवंबर को दिवाली मनाई जा रही है। जयपुर में मां लक्ष्मी की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 3 मिनट से 7 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। पूजा का समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय पंचांग और सूर्यास्त के अनुसार थोड़ा बदल सकता है।
पूजा के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का स्मरण करें। घर के मंदिर में दीपक जलाएं और पुष्प, फल, मिठाई तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक लक्ष्मी स्तुति और मंत्रों का पाठ करें।












